वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
कृपया दायीं तरफ दिए गए 'हमारे प्रशंसक' लिंक पर क्लिक करके 'अपनी हिंदी' के सदस्य बनें और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दें। सदस्यता निशुल्क है।
Flipkart.com

रविवार, 3 नवंबर 2013

लेन -देन (शरत चन्द्)


लेन -देन  शरत चन्द्र का एक बेहतरीन उपन्यास है। यह पाठकों का भरपूर मनोरंजन करता है ।

शरत चन्द्र हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार रहे है। इनके 'देवदास' उपन्यास पर कई फिल्में भी बन चुकी है।

शरत के उपन्यासों के कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। कहा जाता है कि उनके पुरुष पात्रों से उनकी नायिकाएँ अधिक बलिष्ठ हैं। शरत्चंद्र की जनप्रियता उनकी कलात्मक रचना और नपे तुले शब्दों या जीवन से ओतप्रोत घटनावलियों के कारण नहीं है बल्कि उनके उपन्यासों में नारी जिस प्रकार परंपरागत बंधनों से छटपटाती दृष्टिगोचर होती है, जिस प्रकार पुरुष और स्त्री के संबंधों को एक नए आधार पर स्थापित करने के लिए पक्ष प्रस्तुत किया गया है, उसी से शरत् को जनप्रियता मिली।

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


चण्डीगढ़ की चण्डीजी बहुत प्राचीन देवी हैं।
कहते हैं कि राजा वीरबाहु के किसी पूर्व पुरुष ने किसी युद्ध में विजयी होकर बरुई नदी के तट पर इस मन्दिर की स्थापना की थी और बाद में केवल इसी के आश्रय से धीर-धीरे वह चण्डीगढ़ तैयार हो गया। शायद किसी दिन वास्तव में ही यह गांव देवोत्तर सम्पत्ति में ही गिना जाता था, किन्तु अब तो मन्दिर से सटी हुई केवल कुछ ही बीघे जमीन छोड़कर बाकी सारी मनुष्यों ने छीन ली है। इन दिनों यह गांव बीजगांव की जमींदारी में शामिल है। किस प्रकार और किस दुर्जेय रहस्यपूर्ण उपाय से अनाथ और असक्त की सम्पत्ति अर्थात् असहाय देवता का धन अन्त में जमींदार के उदर में आकर सुस्थिर बन गया, उसकी कहानी साधारण पाठकों के लिए निष्प्रयोजन है। मेरा वक्तव्य केवल यही है कि चण्डीगढ़ का अधिकांश भाग अब चण्डीगढ़ के हाथ से निकल चुका है। हो सकता है कि देवता का इससे कुछ भी नहीं बनता-बिगड़ता किन्तु जो लोग उनके सेवा-स्वत्वाधिकारी हैं उनके मन में क्षोभ आज तक भी दूर नहीं हुआ है; इसीलिए अब भी झगड़े-बखेड़े उठते ही रहते हैं और कभी तो बहुत ही उग्र रूप धारण कर लेते हैं।

बीज गांव के जमींदार वंश के लोग अत्याचारी समझे जाने से सदा से ही बदनाम हैं। किन्तु दो-एक ही साल पहले पुत्रहीन जमींदार की मृत्यु हो जाने से जिस दिन उनके भानजे जीवननन्द चौधरी को बादशाही मिल गई है, उसी दिन से छोटे-बड़े सभी प्रजाजनों का जीवन कष्टमय हो गया है। इस प्रकार की जनश्रुति प्रचलित हो चुकी है कि भूतपूर्व जमींदार कालीमोहन बाबू ने इस मनुष्य की उच्छृंखलता सहन न करने के कारण इसे त्याग करने का निश्चय कर लिया था, किन्तु अकस्मात मृत्यु हो जाने से उनकी उस इच्छा की पूर्ति न हो सकी।

वे ही जीवननन्द चौधरी आजकल इलाका देखने के बहाने चचण्डीगढ़ गांव में आकर उपस्थित हुए हैं।
इस गांव में सदा के ही एक मामूली अदालत ‘कचहरी बाड़ी’ के नाम से मौजूद है, किन्तु जिले के ऊबड़-खाबड़ पहाड़ से सटे हुए इस गांव के स्वास्थ्यकर जलवायु और विशेषकर बालू से भरी बरुई नदी का जल अत्यन्त रुचिकर समझकर इसी जीवनन्द के ही नाना राधामोहन बाबू ने गांव के छोर पर ‘शान्ति निकुंज’ नामक एक बंगला बनावाया था।
वे प्रायः ही बीच-बीच में आकर इसी में ठहरते थे। किन्तु उनके पुत्र कालीमोहन ने किसी दिन भी यहाँ पदार्पण नहीं किया। इस कारण किसी समय जिस गृह में सौन्दर्य था, ऐश्वर्य था, मर्यादा थी—चारों ओर का जो बगीचा दिन-रात सुन्दर फूल-फूलों से भरा रहता था, वही फिर किसी दिन दूसरे के हाथ में पड़ लापरवाही के कारण जीर्ण, मलिन और निकम्मे पौधों से भर उठा। यहां माली नहीं था। केवल बरुई के सूखे तट पर एक विशाल टूटा-फूटा मकान जंगल के मध्य में खड़ा रहकर अपमानित गौरव की भांति दिन-रात शून्य स्थल में उदासी फैला रहा था। कितने दिनों से यहां किसी ने प्रवेश नहीं किया, कितने दिनों से यहाँ की कचहरी का प्रधान कर्मचारी सदर मुकाम की झूठी कैफियतें भेजता आया है, इन सब का हिसाब लगाने वाला कोई नहीं है।

 फाइल का आकार: 24  Mb


डाउनलोड लिंक :
(निम्न में से कोई भी एक क्लिक करें . अगर कोई लिंक काम नहीं कर रहा है तो अन्य लिंक प्रयोग करके देखेंडाउनलोड करने में कोई परेशानी हो या डाउनलोड करना नहीं आता तो कृपया यहाँ क्लिक करें)
 
SendMyWay
TurboBit
2Shared
RapidShare
Ziddu
MirrorCreator


(डाउनलोड करने में कोई परेशानी हो तो कृपया यहाँ क्लिक करें)
ये पुस्तक आपको कैसी लगी? कृपया अपनी टिप्पणियां अवश्य दें।


अगर आपको ये पुस्तक पसंद आई हो तो इसे नीचे दिए गए लिंक से फेसबुक  पर लाइक  करें!

[ Keywords: Free hindi books, Free hindi ebooks, Free hindi stories, Hindi stories pdf, Hindi PDF Books, Hindi sahitya , Hindi kahani, Hindi e books, Hindi e book, free hindi novels, Hindi Text Book , Manu Samriti, Hindi Shorthand Manual free download, Chandrakanta Santati in hindi free download]

6 टिप्पणियां:

नगेन्द्र फौजदार on 4/11/13 9:52 pm ने कहा…

very good job

Mukul Verma on 13/11/13 1:47 am ने कहा…

बहुत सराहनीय काम…इसके लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद्

Bhavana Lalwani on 18/11/13 6:49 pm ने कहा…

Sharatchandra ke do teen novel padhe hain aur "Dena Paawna" ko padhne ki kai din se ichha thi .. aapke blog par aakar bahut achha laga. plz comment k liye word verification process hataa dein is se comment karne mein aasani hogi.

Betu Tithi on 26/11/13 12:47 pm ने कहा…

Kya aap saratchandra ke aur uppanys apni hindi me uplabdh kra sakte hai

Betu Tithi on 27/11/13 3:52 pm ने कहा…

Kya aap sartchandra ka navvidhan apni hindi uplabdh karne ki krapa karenge main bahut din se lse padna chathi hu krapya jaldi uplabdh kre

Betu Tithi on 6/1/14 12:41 am ने कहा…

Saratji ke aur upanyaso ka me besabri se intjar kar rahi hu aur aasha karti hu ki me ise apni hindi me jald pa sakungi

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणियां हमारी अमूल्य धरोहर है। कृपया अपनी टिप्पणियां देकर हमें कृतार्थ करें ।

Blogger Tips And Tricks|Latest Tips For Bloggers Free Backlinks

Deals of the Day

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में

 

ताजा पोस्ट:

लेबल

कहानी उपन्यास कविता धार्मिक इतिहास प्रेमचंद जीवनी विज्ञान सेहत हास्य-व्यंग्य शरत चन्द्र तिलिस्म बाल-साहित्य ज्योतिष मोपांसा देवकीनंदन खत्री पुराण बंकिम चन्द्र वीडियो हरिवंश राय बच्चन अनुवाद देशभक्ति प्रेरक यात्रा-वृतांत दिनकर यशपाल विवेकानंद ओ. हेनरी कहावतें धरमवीर भारती नन्दलाल भारती ओशो किशोरीलाल गोस्वामी कुमार विश्वास जयशंकर प्रसाद महादेवी वर्मा संस्मरण अमृता प्रीतम जवाहरलाल नेहरु पी.एन. ओक रहीम रांगेय राघव वृन्दावनलाल वर्मा हरिशंकर परसाई अज्ञेय इलाचंद्र जोशी कृशन चंदर गुरुदत्त चतुरसेन जैन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र मन्नू भंडारी मोहन राकेश रबिन्द्रनाथ टैगोर राही मासूम रजा राहुल सांकृत्यायन शरद जोशी सुमित्रानंदन पन्त असग़र वजाहत उपेन्द्र नाथ अश्क कालिदास खलील जिब्रान चन्द्रधर शर्मा गुलेरी तसलीमा नसरीन फणीश्वर नाथ रेणु

ताजा टिप्पणियां:

अपनी हिंदी - Free Hindi Books | Novel | Hindi Kahani | PDF | Stories | Ebooks | Literature Copyright © 2009-10. A Premium Source for Free Hindi Books

;