वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

मोपांसा की कहानी - 'खतरे की घंटी'




'खतरे की घंटी' मोपांसा के द्वारा लिखी हुई कहानी है जो एक औरत की नासमझी और उससे उपजे अंतर्द्वंद को व्यक्त करती है।

प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां (Guy de Maupassant ) (५ अगस्त, १८५०- ६ जुलाई, १८९३), निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के युद्ध में भाग लिया, अलग अलग नौकरियाँ कीं और पत्रों में स्तंभ लिखे।


इनकी प्रथम कहानी संग्रह बाल ऑप फैट थी जिसके प्रकाशित होते ही ये प्रसिद्ध हो गए। १८८० से १८९१ तक का समय इनके जीवन का सबसे महत्पूर्ण काल था। इन ११ वर्षों में मोपांसा के लगभग ३०० कहानियाँ, ६ उपन्यास, ३ यात्रा संस्मरण एवं एक कविता संग्रह प्रकाशित हुए। युद्ध कृषक जीवन, स्त्री पुरुष संबंध, आभिजात्य वर्ग और मनुष्य की भावनात्मक समस्याएँ मोपासां की रचनाओं की विषय-वस्तु बने।




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भेड़िया (मोपांसा)



'भेड़िया' मोपांसा की एक प्रसिद्ध कहानी है। इसमें एक भेडिये के शिकार की रोचक कहानी दी गयी है।


प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां (Guy de Maupassant ) (५ अगस्त, १८५०- ६ जुलाई, १८९३), निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के युद्ध में भाग लिया, अलग अलग नौकरियाँ कीं और पत्रों में स्तंभ लिखे।


इनकी प्रथम कहानी संग्रह बाल ऑप फैट थी जिसके प्रकाशित होते ही ये प्रसिद्ध हो गए। १८८० से १८९१ तक का समय इनके जीवन का सबसे महत्पूर्ण काल था। इन ११ वर्षों में मोपांसा के लगभग ३०० कहानियाँ, ६ उपन्यास, ३ यात्रा संस्मरण एवं एक कविता संग्रह प्रकाशित हुए। युद्ध कृषक जीवन, स्त्री पुरुष संबंध, आभिजात्य वर्ग और मनुष्य की भावनात्मक समस्याएँ मोपासां की रचनाओं की विषय-वस्तु बने।



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शनिवार, 20 अप्रैल 2013

सम्राट अशोक


'सम्राट अशोक' पुस्तक में मगध सम्राट अशोक महान का जीवन  चरित दिया गया है.

इतिहास में 'महान' कही जाने वाली  तीन‍ विभूतियाँ हैं अशोक महान, सिकंदर महान और अकबर महान।

सम्राट अशोक मौर्यवंश का तीसरा राजा था। उसके पिता का नाम बिंदुसार और माता का जनपद कल्याणी था। अशोक का जन्म लगभग 297 ई. पूर्व माना गया है। अशोक का साम्राज्य प्राय: संपूर्ण भारत और पश्चिमोत्तर में हिंदुकुश एवं ईरान की सीमा तक था।

कलिंग के भीषण युद्ध ने अशोक के हृदय पर बड़ा आघात पहुँचाया और उसने अपनी हिंसा आधारित दिग्विजय की नीति छोड़कर, धर्म विजय की नीति को अपनाया। लगभग इसी समय अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया। अब सम्राट अशोक, शासक और संत-दोनों का मिश्रित चरित्र था। उसने अपने साम्राज्य के सभी साधकों को लोकमंगल के कार्यों में लगा दिया था। अशोक की राजनीति धर्म और नीति से पूर्णत: प्रभावित थी। अशोक का आदर्श था - 'लोकहित से बढ़कर दूसरा और कोई कर्म नहीं है जो कुछ मैं पुरुषार्थ करता हूँ, वह लोगों पर उपकार नहीं, अपितु इसलिए कि मैं उनमें उऋण हो जाऊँ और उनको इहलौकिक सुख और परमार्थ प्राप्त कराऊँ।' 

अशोक जनता में अत्यधिक लोकप्रिय था। वह जनता को अपनी संतान के समान स्नेह करता था। जनता का सुख-दुख जानने के लिए वह वेश बदलकर भ्रमण किया करता था जिसे वह जनता के संपर्क में आकर उसके सुख को समझने का अवसर पाता था। अशोक अपनी प्रजा की भौतिक एवं नैतिक दोनों प्रकार की उन्नति चाहता था। इस कारण वह अपने शासन में नैतिकता को अधिक बल देता था।

  फाइल का आकार: ५ Mb


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गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

साइमन का पिता (मोपांसा)



मोपांसा की कहानी - साइमन का पिता एक दिल को छू लेने वाली कहानी है। कहानी बहुत ही रोचक शैली में लिखी गयी है ।

अगर आपने बहुत दिनों से कोई अच्छी कहानी ना पढ़ी हो तो इसे अवश्य पढ़ें।


प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां (Guy de Maupassant ) (५ अगस्त, १८५०- ६ जुलाई, १८९३), निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के युद्ध में भाग लिया, अलग अलग नौकरियाँ कीं और पत्रों में स्तंभ लिखे।


इनकी प्रथम कहानी संग्रह बाल ऑप फैट थी जिसके प्रकाशित होते ही ये प्रसिद्ध हो गए। १८८० से १८९१ तक का समय इनके जीवन का सबसे महत्पूर्ण काल था। इन ११ वर्षों में मोपांसा के लगभग ३०० कहानियाँ, ६ उपन्यास, ३ यात्रा संस्मरण एवं एक कविता संग्रह प्रकाशित हुए। युद्ध कृषक जीवन, स्त्री पुरुष संबंध, आभिजात्य वर्ग और मनुष्य की भावनात्मक समस्याएँ मोपासां की रचनाओं की विषय-वस्तु बने।


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एक राज काज (मोपांसा)





मोपांसा की कहानी - एक राज काज पाठक को एक ऐसे लोक में ले जाती है जहाँ पर एक डॉक्टर युद्ध और हिंसा के वातावरण में देश-प्रेम की भावना को जगाये रखने की कोशिश करता है और अपने कर्तव्य का पालन करता है। ।


प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां (Guy de Maupassant ) (५ अगस्त, १८५०- ६ जुलाई, १८९३), निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के युद्ध में भाग लिया, अलग अलग नौकरियाँ कीं और पत्रों में स्तंभ लिखे।

इनकी प्रथम कहानी संग्रह बाल ऑप फैट थी जिसके प्रकाशित होते ही ये प्रसिद्ध हो गए। १८८० से १८९१ तक का समय इनके जीवन का सबसे महत्पूर्ण काल था। इन ११ वर्षों में मोपांसा के लगभग ३०० कहानियाँ, ६ उपन्यास, ३ यात्रा संस्मरण एवं एक कविता संग्रह प्रकाशित हुए। युद्ध कृषक जीवन, स्त्री पुरुष संबंध, आभिजात्य वर्ग और मनुष्य की भावनात्मक समस्याएँ मोपासां की रचनाओं की विषय-वस्तु बने।


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गुरुवार, 11 अप्रैल 2013

हीरे का हार (कहानी)



'हीरे का हार' मोपांसा की एक प्रसिद्ध कहानी है। इसे लगभग हर भाषा में प्रकाशित किया जा चुका है।

यह एक मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है । इसमें बताया गया है कि इंसान की एक छोटी सी नादानी उसे गहरी मुसीबत में डाल सकती है और उसकी सारी जिंदगी तबाह कर सकती है ।

प्रकृतिवादी विचारधारा से प्रभावित गाय दी मोपासां (Guy de Maupassant ) (५ अगस्त, १८५०- ६ जुलाई, १८९३), निर्विवाद रूप से फ्रांस के सबसे महान कथाकार हैं। वे जब ग्यारह वर्ष के थे तभी उनके माता-पिता अलग हो गए थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा धार्मिक स्कूलों में हुई जिससे उन्हें चिढ़ थी। उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के युद्ध में भाग लिया, अलग अलग नौकरियाँ कीं और पत्रों में स्तंभ लिखे।


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गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

गुलाब (मोपांसा)




'गुलाब' मोपांसा की एक प्रसिद्ध कहानी है।
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मंगलवार, 2 अप्रैल 2013

असग़र वजाहत का उपन्यास - 'गरजत-बरसत'


असग़र वजाहत (जन्म - 5 जुलाई, 1946) हिन्दी के प्रोफ़ेसर तथा रचनाकार हैं । इन्होंने नाटक, कथा, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत तथा अनुवाद के क्षेत्र में रचा है । ये दिल्ली स्थित जामिला मिलिया इस्लामिया के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं ।

असग़र वजाहत का उपन्यास 'गरजत-बरस' एक बेहतरीन उपन्यास है। अवश्य पढ़ें ।


पृष्ठ संख्या: 204
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धूप और धुआं (रामधारी सिंह दिनकर)


'धूप और धुआं' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर का कविता संग्रह है। रामधारी सिंह दिनकर स्वतंत्रता पूर्व के विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने जाते रहे। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति की पुकार है, तो दूसरी ओर कोमल श्रृँगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें कुरूक्षेत्र और उवर्शी में मिलता है।

फाइल का आकार:
3 Mb

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