वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शनिवार, 22 सितंबर 2012

सौंफ-चिकित्सा



रसोई में पाई जाने वाली सौंफ चाय बनाने से लेकर, खाना खाने के बाद मुख शोधक के रूप में खाने में प्रतिदिन काम लाई जाती है। प्रतिदिन प्रयोग में आने वाले मसालों में इसका विशिष्ट स्थान है।

'सौंफ-चिकित्सा ' पुस्तक में सौंफ का विभिन्न घरेलु नुस्खों में उपयोग बताया गया हैहर व्यक्ति के पढने लायक पुस्तक है
सौंफ का प्रयोग अचार के मसाले में किया जाता है।
पान खाने वाले पान में सौंफ को विशेष स्थान देते हैं।
मुख शुद्धि के रूप में सौंफ का प्रयोग किया जाता है।
ठंडाई आदि बनाते समय सौंफ का प्रयोग मुख्य रू प में किया जाता है।
आम की चटनी और चाय आदि में सौंफ का प्रयोग सुगंघ के लिए किया जाता है।
सौंफ पेट के रोगियों के लिए रामबाण औषधि है। सौंफ नेत्र रोग नाशक, कफनाशक, बुद्धिवर्द्धक पाचक के रू प में बहुत लाभदायक माना जाता है।
नेत्र ज्योति में वृद्धि के लिए सौंफ, बादाम और मिश्री समान भाग में पीस लें। एक चम्मच सुबह-शाम पानी के साथ दो माह तक लें। लगातार सेवन से आंखों की कमजोरी दूर होती है।
गले में खारिश होने पर सौंफ को मुंह में चबाते रहने से बैठा गला साफ हो जाता है।
सौंफ रक्त वर्ण को साफ करने वाली है एवं चर्म रोग नाशक है।
गर्मी के दिनों में ठंडाई में सौंफ मिलाकर पीजिए। इससे गर्मी शांत होगी और जी मिचलाना बंद हो जाएगा।
पेट दर्द होने पर भुनी हुई सौंफ चबाइए। तुरंत आराम मिलेगा।
पेट में वायु प्रकोप होने पर दाल तथा
सब्जी में सौंफ का छौंक कुछ दिनों तक प्रयोग में लाएं।
खट्टी डकारें आने पर थोड़ी सी सौंफ पानी में उबालकर मिश्री डालकर पीजिए। दो-तीन बार प्रयोग से आराम मिल जाएगा।
सौंफ-चिकित्सा

पृष्ठ संख्या: 50
आकार: 4 Mb

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शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

अब तो नींद खुले - नाटक


'अपनी हिंदी' में इस बार पेश है - एक नाटक - अब तो नींद खुले
श्री रामजीवन चौधरी द्वारा लिखा गया ये नाटक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर आधारित है। नाटक पढने में रोचक है। उम्मीद है नाटक सभी साहित्य प्रेमियों को पसंद आएगा।

पृष्ठ संख्या: 66
आकार: 2 MB


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गुरुवार, 20 सितंबर 2012

मीनाक्षी - काव्य संग्रह


'मीनाक्षी' श्री नन्दलाल भारती का काव्य संग्रह है। इसमें दी गयी कवितायेँ बहुत सुंदर है और पढने योग्य है।
अवश्य पढ़ें ।


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बुधवार, 19 सितंबर 2012

अभिशाप - उपन्यास




'अभिशाप' श्री नन्दलाल भारती का एक बेहतरीन उपन्यास है जो देश की जवलंत समस्याओं पर प्रहार करता है।

इनकी रचनाओं का देश की कई पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन होता रहता है।

इनकी प्रमुख कृतिया इस प्रकार है -

उपन्यास-अमानत, प्रतिनिधि पुस्तकें- काली मांटी, निमाड की माटी मालवा की छाँव,ये आग कब बुझेगी । उपन्यास-दमन,चांदी की हँसुली एवं अभिशाप, कहानी संग्रह-मुट्ठी भर आग, हँसते जख़्म एवं सपनों की बारात, लघुकथा संग्रह-उखड़े पाँव, कतरा-कतरा आँसू एवं एहसास । काव्यसंग्रह -कवितावलि, काव्यबोध । आलेख संग्रह-विमर्श एवं अन्य ।


फाइल का आकार: ३ Mb

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यश का शिकंजा - व्यंग्य उपन्यास



यश का शिकंजा - श्री यशवंत कोठारी का व्यंग्य उपन्यास है।

यशवंत कोठारी के व्यंग्य आज की भौतिकवादी मानसिकता पर जमकर प्रहार करते है और आत्मचिंतन करने पर मजबूर करते हैं कि आखिर यह प्रवृत्ति हमें कहाँ ले जाएगी !

अवश्य पढ़ें।

फाइल का आकार: १ Mb


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ऐतिहासिक उपन्यास - वसंत सेना


आप सभी के लिए पेश है एक ऐतिहासिक उपन्यास - वसंत सेना


वसंतसेना राजा पलाका के दरबार में नर्तकी होती है। लेकिन राजा के साले संस्थानक की गंदी नज़र से अपने आप को बचते बचाते वो चित्रकार चारुदत्त के घर में आश्रय लेती है। यह जानते हुए भी कि चारुदत्त विवाहित हैं अदिती से और उनके पास कोई रोज़गार नहीं है, वसंतसेना उससे प्यार कर बैठती है, और उनका प्रेम संबंध शुरु हो जाता है।कहानी की नायिका वसंत सेना एक ऐतिहासिक चरित्र है

आगे क्या होता है, जानने के लिए पढ़िए - 'वसंत सेना'

इस पुस्तक को हमारे पास श्री अक्षय कुमार ओझा ने भेजा है। इसके लिए उनका धन्यवाद्।

फाइल का आकार: 700 Kb


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मंगलवार, 18 सितंबर 2012

'असत्यम, अशिवम , असुन्दरम'



'असत्यम, अशिवम , असुन्दरम' श्री यशवंत कोठारी का व्यंग्य उपन्यास है।

यशवंत कोठारी के व्यंग्य आज की भौतिकवादी मानसिकता पर जमकर प्रहार करते है और आत्मचिंतन करने पर मजबूर करते हैं कि आखिर यह प्रवृत्ति हमें कहाँ ले जाएगी !

लेखक के लगभग १००० लेख, निबन्ध, कहानियाँ, आवरण कथाएँ, धर्मयुग, साप्ताहिक हिन्दुस्तान, सारिका, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, राजस्थान पत्रिका, भास्कर, नवज्योती, राष्ट्रदूत साप्ताहिक, अमर उजाला, नई दुनिया, स्वतंत्र भारत, मिलाप, मधुमती, स्वागत आदि में प्रकाशित/ आकाशवाणी / दूरदर्शन ...इन्टरनेट से प्रसारित है ।

कार्यक्षेत्र-
देश-विदेश में दस राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों में आमंत्रित / भाग लिया राजस्थान साहित्य अकादमी की समितियों के सदस्य १९९१-९३, १९९५-९७, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार की हिन्दी समिति के सदस्य-२०१०-१३

अवश्य पढ़ें।


फाइल का आकार: 1 MB

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मुट्ठी भर आग



मुट्ठी भर आग - श्री नन्दलाल भारती का कहानी संग्रह है।

इनकी रचनाओं का देश की कई पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन होता रहता है।

इनकी प्रमुख कृतिया इस प्रकार है -

उपन्यास-अमानत, प्रतिनिधि पुस्तकें- काली मांटी, निमाड की माटी मालवा की छाँव,ये आग कब बुझेगी । उपन्यास-दमन,चांदी की हँसुली एवं अभिशाप, कहानी संग्रह-मुट्ठी भर आग, हँसते जख़्म एवं सपनों की बारात, लघुकथा संग्रह-उखड़े पाँव, कतरा-कतरा आँसू एवं एहसास । काव्यसंग्रह -कवितावलि, काव्यबोध । आलेख संग्रह-विमर्श एवं अन्य ।


फाइल का आकार: ५ Mb



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सोमवार, 17 सितंबर 2012

'जीने के लिए'


'जीने के लिए' श्री महेंद्र भटनागर का काव्य संग्रह है। पुस्तक में कुल ४० कवितायेँ संकलित है। इन कविताओं में सकारात्मक जीवन जीने का सन्देश दिया गया है।

महेन्द्र भटनागरजी वरिष्ठ रचनाकार है जिनका हिन्दी व अंग्रेजी साहित्य पर समान दखल है। सन् 1941 से आरंभ आपकी रचनाशीलता आज भी अनवरत जारी है। आपकी प्रथम प्रकाशित कविता 'हुंकार' है; जो 'विशाल भारत' (कलकत्ता) के मार्च 1944 के अंक में प्रकाशित हुई।

आप सन 1946 से प्रगतिवादी काव्यान्दोलन से सक्रिय रूप से सम्बद्ध रहे हैं तथा प्रगतिशील हिन्दी कविता के द्वितीय उत्थान के चर्चित हस्ताक्षर माने जाते हैं। समाजार्थिक यथार्थ के अतिरिक्त आपके अन्य प्रमुख काव्य-विषय प्रेम, प्रकृति, व जीवन-दर्शन रहे हैं। आपने छंदबद्ध और मुक्त-छंद दोनों में काव्य-सॄष्टि की है। आपका अधिकांश साहित्य 'महेंद्र भटनागर-समग्र' के छह-खंडों में एवं काव्य-सृष्टि 'महेंद्रभटनागर की कविता-गंगा' के तीन खंडों में प्रकाशित है। अंतर्जाल पर भी आप सक्रिय हैं।

फाइल का आकार: 900 Kb

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चाणक्य सूत्र (चाणक्य नीति)




आचार्य चाणक्य एक ऐसी महान विभूति थे, जिन्होंने अपनी विद्वत्ता और क्षमताओं के बल पर भारतीय इतिहास की धारा को बदल दिया। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत ‍और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया।

वर्तमान दौर की सामाजिक संरचना, भूमंडलीकृत अर्थव्यवस्था और शासन-प्रशासन को सुचारू ढंग से बताई गई ‍नीतियाँ और सूत्र अत्यधिक कारगर सिद्ध हो सकते हैं।



चाणक्य नीति के द्वितीय अध्याय से यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ अंश:

1. जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं।

2. झूठ बोलना, उतावलापन दिखाना, दुस्साहस करना, छल-कपट करना, मूर्खतापूर्ण कार्य करना, लोभ करना, अपवित्रता और निर्दयता - ये सभी स्त्रियों के स्वाभाविक दोष हैं। चाणक्य उपर्युक्त दोषों को स्त्रियों का स्वाभाविक गुण मानते हैं। हालाँकि वर्तमान दौर की शिक्षित स्त्रियों में इन दोषों का होना सही नहीं कहा जा सकता है।

3. भोजन के लिए अच्छे पदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने की शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए कामशक्ति का होना, प्रचुर धन के साथ-साथ धन देने की इच्छा होना। ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते हैं।

4. चाणक्य कहते हैं कि जिस व्यक्ति का पुत्र उसके नियंत्रण में रहता है, जिसकी पत्नी आज्ञा के अनुसार आचरण करती है और जो व्यक्ति अपने कमाए धन से पूरी तरह संतुष्ट रहता है। ऐसे मनुष्य के लिए यह संसार ही स्वर्ग के समान है।

5. चाणक्य का मानना है कि वही गृहस्थी सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है। पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे। इसी प्रकार ऐसे व्यक्ति को मित्र नहीं कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो।



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देवकीनंदन खत्री का अन्य महान उपन्यास 'चंद्रकांता'  'अपनी हिंदी' पर उपलब्ध है. इसे डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें.
देवकीनंदन खत्री के अन्य सभी उपन्यास डाउनलोड करने के लिए
यहाँ क्लिक करें .


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रविवार, 9 सितंबर 2012

आखिरी पड़ाव का दुःख - कहानी संग्रह





'आखिरी पड़ाव का दुःख'
श्री सुभाष नीरव का कहानी संग्रह है जिसमे उनकी १४ कहानियां दी गयी है। सभी कहानियां खूबसूरत बन पड़ी है।

सुभाष नीरव नौवें दशक के प्रतिभासंपन्न लघुकथाकार हैं। रूपसिंह चंदेल व हीरालाल नागर के साथ उनकी लघुकथाओं का एक संकलन ‘कथाबिंदु’ सन् 1997 में आ चुका है। लेखन, अनुवाद, आलोचना व संपादन आदि लघुकथा की बहुआयामी सेवा के मद्देनजर लघुकथा के लिए पूर्णतः समर्पित पंजाब की साहित्यिक संस्था ‘मिन्नी’ द्वारा सन् 1992 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘माता शरबती देवी पुरस्कार’ से सम्मानित किया जा चुका है।

उनकी लघुकथाओं को पढ़कर निःसंकोच कहा जा सकता है कि अपने समकालीनों की तुलना में भले ही उन्होंने कम और कभी-कभार लेखन किया है लेकिन जितना भी किया है वह अनेक दृष्टि से उल्लेखनीय है। सबसे बड़ी बात यह है कि लघुकथा के प्रति समर्पित भाव उनमें लगातार बना रहा है। उनके इस जुड़ाव के कारण ही पंजाबी का लघुकथा-संसार हिन्दी क्षेत्र के संपर्क में बहुलता से आना प्रारम्भ हुआ जिसे सौभाग्य से श्याम सुन्दर अग्रवाल सरीखे अन्य अनुवादकों का भी संबल हाथों-हाथ मिला।



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'बंगाल का काल' - हरिवंश राय बच्चन


'बंगाल का काल' हरिवंश राय बच्चन का कविता संग्रह है। इसमें बंगाल के काल का मार्मिक वर्णन किया गया है। इसकी रचना १९४६ में की गयी थी

हरिवंश राय बच्चन हिंदी के एक प्रसिद्ध कवि और लेखक थे ।

बच्चन जी ने कभी किसी धारा या वाद से जुडने की आतुरता नहीं दिखाई। यह उनकी सबसे बडी विशेषता थी। जब हिंदी में ’प्रगतिवादी‘ आंदोलन चला तब बच्चन अपने मधुकाव्य की हाला पी मस्ती में झूम रहे थे। जब हिंदी में ’प्रयोगवाद का स्वर गूँजा तब बच्चन जी ’बंगाल का काल‘ लिख रहे थे और जब नई कविता की धूम मची तब वे ’मिलन यामिनी‘ और ’प्रणय पत्रिका‘ लिखने में व्यस्त रहे।

बच्चन जी हिंदी के ऐसे कवि हैं जिन्होंने खुद कविता नहीं लिखी है बल्कि कविता ने ही स्वयं जिन्हें लिखा है। बच्चन जी हिंदी के ऐसे कवि हैं जिन्होंने खुद कविता नहीं लिखी है बल्कि कविता ने ही स्वयं जिन्हें लिखा है। वह ज्ञान के बल पर किताबें पढ़कर या काव्य के सिद्धांत सीखकर नहीं लिखी गई है, वह सीधे उनके जीवन से फूटकर आई है। वह लिखी इसलिए गई कि वह न लिखने पर बच्चन जी जीवित नहीं रह सकते थे। वह अनिवार्यता थी, विवशता थी यानी उनके जीने की शर्त। तुलसी ने जिस आस्था और विश्वास के साथ स्वयं को राम के चरणों में समर्पित किया था उसी आस्था और विश्वास के साथ बच्चन जी ने खुद को कविता के हाथों सौंपा है।




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