वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

रंग दे बसंती



जगह- मुंबई सीएसटी स्टेशन। समय- 4.52 मिनट....ठीक वही, जब तीन बरस पहले कसाब ने यहां लाशों के ढेर लगा दिए थे। रविवार का नजारा- रंग दे बंसती गाने पर थिरकते सैकड़ों युवा। उद्देश्य- अनोखे फ्लैश मॉब डांस के माध्यम से मुंबई हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि।और उन आतंकियों को चेतावनी जो अपने खतरनाक मंसूबों से आम लोगों के हौसले को खत्म करने की नापाक कोशिश में जुटे हैं।आइडिया- युवा छात्रा शोनेन कोठारी का, जिसने अपने 12 दोस्तों को मॉब डांस के लिए तैयार करके इसकी शुरूआत की। बाद में लोग जुड़ते गए। और रविवार की शाम सैकड़ों लोगों ने स्वतःस्फूर्त तरीके से आयोजन में शिरकत कर जता दिया कि मुंबईकर का जज्बा कोई भी ऐरा-गैरा यूं ही नहीं तोड़ सकता है।
सीएसटी पर रंग दे बंसती गीत पर झूमते लोगों को देखकर ऐसा लग रहा था मानो मुंबई मनोरंजन, और कला के दम पर आतंक को व्यंग्य में जवाब दे रही हो। 4 से 60 साल के आयुवर्ग के लोग इस फ्लैश मॉब के माध्यम से 26 नवंबर 2008 के आतंकी हमले में मारे गए लोगों को अपनी तरफ से श्रदांजलि दी। स्टेशन के एनाउंसमेंट सिस्टम से रंग दे बसंती का टाइटल ट्रैक बजा जिस पर इस फ्लैश मॉब में लोगों ने भाग लिया।

इंटरनेट पर वायरल बन चुका है डांस का वीडियोदेश के इस पहले फ्लैश मॉब डांस का वीडियो इंटरनेट में धूम मचा रहा है और इसे अभी तक 5 लाख से अधिक हिट्स मिल चुके हैं। मुंबई का यह पहला फ्लैश मोब इंटरनेट पर वायरल बन चुका है और यू ट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर इसकी खूब चर्चा हो रही है। यू ट्यूब इस वीडियो को बहुत पंसद किया जा रहा है और 4 से 60 साल के आयुवर्ग को झूमते नाचते गाते देखकर जय हिन्द और वंदेमातरम़् के फीडबैक पोस्ट किए जा रहे है।
यू ट्यूब पर 5 लाख हिट्स और 11000 हजार 3 हजार से अधिक कमेंटशोनेन कोठारी द्वारा यू ट्यूब पर अपलोड किए गए इस फ्लैश मॉब वीडियो को अभी तक 5 लाख से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया है और 3 हजार से अधिक लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। 11 हजार से अधिक लोगों ने इसे अपनी पंसद के रूप में चुना है।
क्या है फ्लैश मॉब:यह ऐसे लोगों का समूह होता है जो अचानक किसी स्थान पर आते है और मनोरंजन, कोई कलात्मक अभिव्यक्ति या फिर व्यंग्य की भाषा में प्रदर्शन करते हैं। इस तरह का पहला समूह 2003 में मैनहट्टन में दिखा था जिसको हॉर्पर पत्रिका के वरिष्ठ संपादक बिल वासिक ने फ्लैश मॉब का नाम दिया था। इसके बाद संसार के कई देशों में इस तरह के आयोजन हुए।
कैसे हुई शुरुआत:इस इवेंट की सफलता का पूरा क्रेडिट 23 साल की शोनेन कोठारी को है जिन्होंने हॉर्वर्ड की पढ़ाई के दौरान इस तरह के कला आंदोलन होते हुए देखा था। शोनेन भी ऐसा भारत में करना चाहती थी और मुंबई में उन्होंने इसे कर दिखाया। शुरुआत में 20 दोस्तों के साथ अपने इस आइडिए को बताया और इस मुहिम को आगे बढ़ाया। कारवां बढ़ा लोगों की संख्या 300 से ऊपर पहुंची। लोगों के ट्रेंड करने के लिए कोरियोग्राफर भौमिक शाह की मदद शोनेन ने ली। पूरे कार्यक्रम की वीडियो फिल्मांकन से लेकर , अभ्यास के लिए जगह की तलाश और सभी तरह के खर्चे शोनेन कोठारी ने अपनी जेब से खर्च किए।
बड़ी मुश्किल से मनाया रेलवे कोसीएसटी पर फ्लैश मोब की अनुमति शोनेन को बहुत मुश्किल से मिली। उनको पहले कोई खास उत्साहजनक जवाब नहीं मिला था लेकिन जब उन्होंने अपने लेपटॉप से संसार में अन्य स्थानों पर होने वाले आंदोलन के बारे में बताया तो अधिकारी इस शर्त पर तैयार हुए कि आप यह पूरा आयोजन रंग दे बंसती गीत पर ही करेंगी। और उसके बाद जो हुआ उसने अचानक शोनेन कोठारी को इंटरनेट जगत में चर्चा में ला दिया। वो कुछ असाधारण काम करना चाहती थी और उन्होंने जो सोचा कर दिखाया। इस फ्लैश मॉब को देखकर मनोज बदरा लिखते हैं शानदार.. क्या एनर्जी लेवल है..टू गुड..साधारण और अद्भुत। विजेन्द्र अपना फीडबैक देते हुए लिखते है कमाल है यार, आश्चर्यचकित कर दिया।


समाचार 'दैनिक भास्कर' से साभार  

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