वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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सोमवार, 31 अक्तूबर 2011

अलंकार




'अलंकार'  प्रेमचंद का एक प्रसिद्ध उपन्यास है।


प्रेमचंद (३१ जुलाई, १८८० - ८ अक्तूबर १९३६) के उपनाम से लिखने वाले धनपत राय श्रीवास्तव हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेमचंद व नवाब राय नाम से भी जाना जाता है और उपन्यास सम्राट के नाम से सम्मानित किया जाता है। इस नाम से उन्हें सर्वप्रथम बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने संबोधित किया था।

प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिस पर पूरी शती का साहित्य आगे चल सका। इसने आने वाली एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित किया और साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नीव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी का विकास संभव ही नहीं था।

वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ।

प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनके साथ प्रेमचंद की दी हुई विरासत और परंपरा ही काम कर रही थी। बाद की तमाम पीढ़ियों, जिसमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं, को प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की। 

ये पुस्तक हमें श्री अनुराग व्यास ने भेजी है .


अवश्य पढ़ें।

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7 टिप्पणियां:

बेनामी ने कहा…

HALLO SIR ,

PL. SIR KAPALKUNDALA PDF FILE ME BHEJANE KI KRUPA KARE.MAI APAKI BAHUT ABHARI RAHUNGI.

बेनामी ने कहा…

sir, i m so greatful to all of you.. for doing a lot of work for hindi...

बेनामी ने कहा…

sir, i m so greatful to all of you.. for doing a lot of work for hindi...i would like to die while reading hindi great writers.(Amitosh lko 8948757932}s hindi ke deewane plz contact karen...

amitosh ...jankipuram lko ने कहा…

If i were a crorepati...i wd've been bought a library or a big book shop and my rest of life wd ve been passed away while enjoing those books.[8948757932]

बेनामी ने कहा…

इस वेब साईट का विस्तार किया जाना चाहिए ताकि लोगों को हिंदी का महत्त्व पता चल सके..........PRAVEEN SINGH

SURENDER KUMAR JALWA on 19/4/12 9:49 pm ने कहा…

please publish kalidas' ''kumar sambhav'' in hindi.

बेनामी ने कहा…

kya godan ki link bhejenge

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