वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

प्रेमा




'प्रेमा' प्रेमचंद का पहला उपन्यास था जो १९०७ में हिन्दी में प्रकाशित हुआ था। इसके उर्दू संस्करण का नाम था 'हमखुर्मा हमसवाब'।


प्रेमचंद (३१ जुलाई, १८८० - ८ अक्तूबर १९३६) के उपनाम से लिखने वाले धनपत राय श्रीवास्तव हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेमचंद व नवाब राय नाम से भी जाना जाता है और उपन्यास सम्राट के नाम से सम्मानित किया जाता है। इस नाम से उन्हें सर्वप्रथम बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने संबोधित किया था।

प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिस पर पूरी शती का साहित्य आगे चल सका। इसने आने वाली एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित किया और साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नीव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी का विकास संभव ही नहीं था।

वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ।

प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनके साथ प्रेमचंद की दी हुई विरासत और परंपरा ही काम कर रही थी। बाद की तमाम पीढ़ियों, जिसमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं, को प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की। 

ये पुस्तक हमें श्री अनुराग व्यास ने भेजी है .


अवश्य पढ़ें।

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6 टिप्पणियां:

बेनामी ने कहा…

aaj tak ek bhi file download nahi kar paya hun...

बेनामी ने कहा…

upar bhai sahab ne sahi kaha hai.aaj tak ek bhi file download nahi kar paya hoon.

बेनामी ने कहा…

download link kaam nahi kar rhe hai.

Amit kumar on 4/9/12 5:26 pm ने कहा…

https://docs.google.com/open?id=0B30PbCgN8stceEFJOTg5VkEwOU0

Amit kumar on 4/9/12 5:29 pm ने कहा…

YOU CAN DOWNLOAD IT FROM HERE. AND IF YOU HAVE ANY BOOK PLEASE JUST UPLOAD IT ANYWHERE AND GIVE LINK.
THANK YOU

Shakti Shukla on 6/9/12 2:24 pm ने कहा…

Koi bhi download link kaam nahi kar raha hain. deposit files me error aati hain..

"This file does not exist, the access to the following file is limited or it has been removed due to infringement of copyright. "

aisi books ka kya fayda jise pad na sake.

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