वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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रविवार, 2 अक्तूबर 2011

सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा



'सत्य के प्रयोग' महात्मा गांधी की आत्मकथा है। यह आत्मकथा उन्होने मूल रूप से गुजराती मे लिखी थी। हिंदी में इसका अनुवाद हरिभाऊ उपाध्याय ने किया था । यह इस पुस्तक का सातवाँ संस्करण है ।

बीसवी शताब्दी में 'सत्य के प्रयोग' अथवा 'आत्मकथा' के नाम से लेखन मोहनदास करमचंद गाँधी (1869-1948) ने- सत्य, अहिंसा, ईश्वर का मर्म समझने-समझाने के विचार से किया था। उसका प्रकाशन भले ही 1925 में हुआ, पर उसमें निहित बुनियादी सिद्धांतों पर वे अपने बचपन से चलने की कोशिश करते आए थे। बेशक इस क्रम में माँसाहार, बीड़ी पीने, चोरी करने, विषयासक्त रहना जैसी कई आरंभिक भूलें भी उनसे हुईं और बैरिस्टरी की पढ़ाई के लिए विदेश जाने पर भी अनेक भ्रमों-आकर्षणों ने उन्हें जब-तब घेरा, लेकिन अपने पारिवारिक संस्कारों, माता-पिता के प्रति अनन्य भक्ति, सत्य, अहिंसा तथा ईश्वर साध्य बनाने के कारण गाँधीजी उन संकटों से उबरते रहे। 




महात्मा गाँधी बीसवीं सदी के सबसे अधिक प्रभावशाली व्यक्ति हैं; जिनकी अप्रत्यक्ष उपस्थिति उनकी मृत्यु के साठ वर्ष बाद भी पूरे देश पर देखी जा सकती है। उन्होंने भारत की कल्पना की और उसके लिए कठिन संघर्ष किया। स्वाधीनता से उनका अर्थ केवल ब्रिटिश राज से मुक्ति का नहीं था बल्कि वह गरीबी, निरक्षरता और अस्पृश्यता जैसी बुराइयों से मुक्ति का सपना देखते थे। वह चाहते थे कि देश के सारे नागरिक समान रूप से आज़ादी और समृद्धि का सुख पा सकें।

अवश्य पढ़ें।






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5 टिप्पणियां:

Arvind Mishra on 3/10/11 7:43 pm ने कहा…

गांधी महामानव थे ...मानवता और मानवीयता का एक और अवतार !

बेनामी ने कहा…

Please upload autobiography of Vivekanandji and Bhagatsinghji.

बेनामी ने कहा…

please upload a book titled 'aur gunj raha jati hain'

dewendra on 31/10/11 3:34 pm ने कहा…

Boss from where to download, your link is for advertisements not for book.
Great Service !!

Ravi Kumar Antal on 11/11/12 4:45 pm ने कहा…

Book not available for download plz upload it again or mail me @ antalravikumar@gmail.com thanks

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