वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

स्वपनदर्शी इंजीनियर विश्वेश्रैया




 15 सितम्बर को विश्वेश्रैया  जी की  याद में  इंजीनियरस डे  मनाया जाता है . उन्ही की याद में प्रस्तुत है ये पुस्तक - स्वपनदर्शी इंजीनियर विश्वेश्रैया

डा. विश्वेश्रैया का नाम विश्व में प्रसिद्ध है। डा. विश्वेश्रैया ने अभियंत्रण विभाग को पहचान दी है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण की तकनीक में उनके योगदान को भूलाया नहीं जा सकता।
मैसूर राज्य के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया अपने समय के सबसे महान अभियंता थे जिन्होंने बांध और सिंचाई व्यवस्था के लिए नए तरीकों का इजाद किया।  विश्वेसरैया अपने समय के महान इंजीनियर थे। उन्होंने आधुनिक भारत में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और नवीनतम तकनीक पर आधारित नदी पर बांध बनाए तथा पनबिजली परियोजना शुरू करने की जमीन तैयार की। वह आधुनिक भारत के पहले महान इंजीनियर थे।

विश्वेसरैया ने कावेरी नदी पर उस समय एशिया के सबसे बड़े जलाशय का निर्माण किया और बाढ़ बचाव प्रणाली विकसित कर हैदराबाद पर मंडराते बाढ़ के खौफ को खत्म किया। इससे उन्हें खूब शोहरत मिली। 1912 में मैसूर राज्य के राजा ने उन्हें अपना दीवान नियुक्त किया और 1918 तक इस पद पर रहते हुए उन्होंने सैकड़ों स्कूल, सिंचाई की बेहतर सुविधा और कई अस्पताल समेत अनेकों विकासन्नोमुखी कार्य किए।

विश्वेसरैया के उल्लेखनीय कार्यो को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1955 में सर्वाेच्च नागरिक अलंकरण 'भारत रत्न' से सम्मानित किया। उनके नाम पर पूरे भारत खासकर कर्नाटक में कई शिक्षण संस्थान हैं तथा उनके जन्मदिन को इंजीनियर दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा इस उपलक्ष्य में कर्नाटक के कुछ हिस्सों में सार्वजनिक अवकाश रहता है।

विश्वेसरैया को 'सर एमवी' और 'आधुनिक मैसूर का पितामह' भी कहा जाता है। 15 सितंबर, 1861 को विश्वेश्रैया का जन्म कर्नाटक के कोलार जिले के चक्कबल्लारपुर तलुका के मुद्देनभल्ली गांव में पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से धनाढ़य परिवार में हुआ था। उनके पिता संस्कृत के विद्वान थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए वह बेंगलूर आए, लेकिन आर्थिक तंगी ने उन्हें कई तरह की विपरीत परिस्थतियों का सामना करने के लिए मजबूर किया।

1881 में बीए करने के बाद मैसूर सरकार के सहयोग से पुणे के एक इंजीनियरिंग कालेज में उन्होंने दाखिला लिया और प्रथम स्थान हासिल किया। नासिक में सहायक अभियंता के पद पर नियुक्ति के साथ उनकी नौकरी की शुरुआत हुई।




 फाइल का आकार: 4 Mb



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1 टिप्पणियां:

amit ray on 17/12/14 4:29 pm ने कहा…

आप की कोई भी पुस्तक डाउनलोड नहीं हो रही है। बिना डाउनलोड हुए कैसे कहे की आप की वेबसाइट सही और अच्छी है। आपने इन अलग अलग होस्टिंग वेबसाइट के लिंक दिए है जो सिर्फ विज्ञापन दिखा रहे है और गलत सलत एंड्राइड एप्लीकेशन की फाइल्स डाउनलोड करवा रहे है है।

क्या फायदा इतनी साडी बेकार लिनक्स देने का जब इनमे से एक भी लिंक सही काम नहीं कर रही है ।

आपकी वेबसाइट बहुत अछि है हिंदी साहित्य के लिए पर अगर यूजर इससे कुछ डाउनलोड न कर पाए तो इसका ज्यादा फायदा नहीं होगा।

जितनी भी फाइल्स है उन्हेआप गूगल ड्राइव में दाल के दे सकते हो ताकि अधिक से अधिक उसेर्स तक ये सब चीज़े पहुचे ।

गूगल ड्राइव एक अकाउंट पर आपको 15 GB की स्पेस देती है आपप दो तीन अकाउंट बना कर या उससे ज्यादा भी अपने सरे कंटेंट को उसमे अपलोड कर सकते है।

इससे यूजर को दूसरी होस्टिंग वेबसाइट जैसे rapidshare,zindu इत्यादि की जरुरत नहीं पड़ेगी। और आपकी वेबसाइट की विस्वशनियता भी बढ़ेगी।

मई आपको ये सब इसलिए बोल रहा हु मई भी एक वेबसाइट डेवलपर और डिज़ाइनर हु और मुझे हिंदी साहित्य से बहुत लगाव है।

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