वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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बुधवार, 28 सितंबर 2011

अप्सरा (उपन्यास)




'अप्सरा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का उपन्यास है .

आधुनिक हिन्दी कविता के सर्वाधिक तेजस्वी और युगांतरकारी व्यक्तित्व सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला एक समर्थ, सोद्देश्य कथाकार के नाते भी सुप्रतिष्ठित हैं। काव्य-रचना के साथ-साथ उन्होंने जिन कई उपन्यासों की रचना की, उनमें अप्सरा पहला है यानी ‘निराला’ की कथा-यात्रा का प्रथम सोपान।

धरती पर उतरती अप्सरा-सी सुन्दर और कला-प्रेम में डूबी एक वीरांगना की यह कथा हमारे ह्रदय पर अमिट प्रभाव छोड़ती है। अपने व्यवसाय से उदासीन होकर वह अपना ह्रदय एक कलाकार को दे डालती है और नाना दुष्चक्रों का सामना करती हुई अन्ततः अपनी पावनता को बनाए रख पाने में समर्थ होती है। इस प्रक्रिया में उसकी नारी सुलभ कोमलताएँ तो उजागर होती ही हैं, उसकी चारित्रिक दृढ़ता भी प्रेरणा पद हो उठती है। इसके साथ ही इस उपन्यास में तत्कालीन भारतीय परवेश और स्वाधीनता-प्रेमी युवा-वर्ग की दृढ़ संकल्पित मानसिकता का चित्रण भी अत्यन्त सुन्दर ढंग से हुआ है, जो कि महाप्राण निराला की सामाजिक प्रतिबद्धता का एक ज्वलंत उदाहरण है।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (२१ फरवरी १८९९ - १५ अक्तूबर १९६१) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं।


प्रमुख कृतियाँ

काव्यसंग्रह: अनामिका, परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत कुंज, सांध्य काकली, अपरा।
उपन्यास- अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा।
कहानी संग्रह- लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी, सखी, देवी।
निबंध- रवीन्द्र कविता कानन, प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह।
पुराण कथा- महाभारत
अनुवाद - आनंद मठ, विष वृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, कपालकुंडला, दुर्गेश नन्दिनी, राज सिंह, राजरानी, देवी चौधरानी, युगलांगुल्य, चन्द्रशेखर, रजनी, श्री रामकृष्ण वचनामृत, भरत में विवेकानंद तथा राजयोग का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद .



 फाइल का आकार: 13 Mb




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8 टिप्पणियां:

Atul Kumar Jaiswal on 30/9/11 10:21 am ने कहा…

महोदय अप्सरा के लिए धन्यवाद मई बहुत दिनों से इसकी खोज में था

sunil on 10/10/11 9:07 pm ने कहा…

आप की महानता का कोई अंत नहीं
एसी हिंदी समर्पित साईट दूसरी नहीं

Skanda on 17/10/11 5:05 pm ने कहा…

i think this book is missing some last pages.... otherwise, i always liked your collection of hindi books :-)

बेनामी ने कहा…

ये उपन्यास संपूर्ण नहीं है. यदि पुस्तक की सम्पूर्णता लोड करने से पहले देखभाल ली जाय तो अति उत्तम हो
कृपया यदि संभव हो तो अप्सरा उपन्यास का शेष भाग भी उपलब्ध कराएं अथवा संपूर्ण उपन्यास लोड करें

संजय

बेनामी ने कहा…

Dear Admin
मैं पुस्तकें प्रिंट कर के पढ़ता हूँ प्रत्येक पृष्ठ के मध्य में आपका Logo (www.apnihindi.com) लगभग तीन पक्तियों को प्रिंट नहीं होने देता और पढ़ते समय सारा मजा किरकिरा कर देता है कृपया कुछ रास्ता निकाले. क्या प्रत्येक पृष्ठ के अंत में logo देना काफी नहीं ?

संजय

Admin on 30/11/11 1:21 am ने कहा…

लोगो देने में पहले के मुकाबले अभी काफी सुधार किया गया है. अभी हमारा लोगो इस तरीके से तरीके से दिया जा रहा है की आपको कम से कम सुविधा हो.
आगे से और भी ध्यान रखेंगे.
धन्यवाद्

-Admin

बेनामी ने कहा…

Dear Admin
शीघ्र उत्तर हेतु धन्यवाद क्या अप्सरा उपन्यास का logo सुधारकर दुबारा से लोड करना संभव है ? वैसे भी जैसा की मैंने अपने पिछले पत्र में कहा था कि अप्सरा उपन्यास संपूर्ण नहीं है.
अतः कृपया यदि इस पुस्तक की सम्पूर्णता देखभालकर एवं logo सुधारकर दोबारा से लोड कर दें तो अति उत्तम हो.
संजय

बेनामी ने कहा…

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