वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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बुधवार, 28 सितंबर 2011

अप्सरा (उपन्यास)




'अप्सरा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का उपन्यास है .

आधुनिक हिन्दी कविता के सर्वाधिक तेजस्वी और युगांतरकारी व्यक्तित्व सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला एक समर्थ, सोद्देश्य कथाकार के नाते भी सुप्रतिष्ठित हैं। काव्य-रचना के साथ-साथ उन्होंने जिन कई उपन्यासों की रचना की, उनमें अप्सरा पहला है यानी ‘निराला’ की कथा-यात्रा का प्रथम सोपान।

धरती पर उतरती अप्सरा-सी सुन्दर और कला-प्रेम में डूबी एक वीरांगना की यह कथा हमारे ह्रदय पर अमिट प्रभाव छोड़ती है। अपने व्यवसाय से उदासीन होकर वह अपना ह्रदय एक कलाकार को दे डालती है और नाना दुष्चक्रों का सामना करती हुई अन्ततः अपनी पावनता को बनाए रख पाने में समर्थ होती है। इस प्रक्रिया में उसकी नारी सुलभ कोमलताएँ तो उजागर होती ही हैं, उसकी चारित्रिक दृढ़ता भी प्रेरणा पद हो उठती है। इसके साथ ही इस उपन्यास में तत्कालीन भारतीय परवेश और स्वाधीनता-प्रेमी युवा-वर्ग की दृढ़ संकल्पित मानसिकता का चित्रण भी अत्यन्त सुन्दर ढंग से हुआ है, जो कि महाप्राण निराला की सामाजिक प्रतिबद्धता का एक ज्वलंत उदाहरण है।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (२१ फरवरी १८९९ - १५ अक्तूबर १९६१) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं।


प्रमुख कृतियाँ

काव्यसंग्रह: अनामिका, परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत कुंज, सांध्य काकली, अपरा।
उपन्यास- अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा।
कहानी संग्रह- लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी, सखी, देवी।
निबंध- रवीन्द्र कविता कानन, प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह।
पुराण कथा- महाभारत
अनुवाद - आनंद मठ, विष वृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, कपालकुंडला, दुर्गेश नन्दिनी, राज सिंह, राजरानी, देवी चौधरानी, युगलांगुल्य, चन्द्रशेखर, रजनी, श्री रामकृष्ण वचनामृत, भरत में विवेकानंद तथा राजयोग का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद .



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सोमवार, 26 सितंबर 2011

जल की खोज: अमृत की प्राप्ति (कहानी संग्रह)


'जल की खोज: अमृत की प्राप्ति' मिश्रीलाल जैन द्वारा लिखित एक कहानी संग्रह है. इसमें लेखक ने जैन धर्मं से सम्बंधित ऐतिहासिक कहानियां दी है.


जैन धर्म भारत की श्रमण परम्परा से निकला धर्म और दर्शन है । प्रोफ़ेसर महावीर सरन जैन का अभिमत है कि जैन धर्म की भगवान महावीर के पूर्व जो परम्परा प्राप्त है, उसके वाचक निगंठ धम्म (निर्ग्रन्थ धर्म), आर्हत्‌ धर्म एवं श्रमण परम्परा रहे हैं। पार्र्श्वनाथ के समय तक 'चातुर्याम धर्म' था। भगवान महावीर ने छेदोपस्थानीय चारित्र (पाँच महाव्रत, पाँच समितियाँ, तीन गुप्तियाँ) की व्यवस्था की। 

'जैन' कहते हैं उन्हें, जो 'जिन' के अनुयायी हों। 'जिन' शब्द बना है 'जि' धातु से। 'जि' माने-जीतना। 'जिन' माने जीतने वाला। जिन्होंने अपने मन को जीत लिया, अपनी वाणी को जीत लिया और अपनी काया को जीत लिया, वे हैं 'जिन'। जैन धर्म अर्थात 'जिन' भगवान्‌ का धर्म।

जैन धर्म का परम पवित्र और अनादि मूलमंत्र है- णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्वसाहूणं॥ अर्थात अरिहंतो को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सर्व साधुओं को नमस्कार। ये पाँच परमेष्ठी हैं।



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रविवार, 25 सितंबर 2011

देवता नहीं हूँ मैं (काव्य-संग्रह)




'देवता नहीं हूँ मैं' काव्य-संग्रह में महाकवि निराला की कुछ अकविताएं, कवितायेँ, गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, मुक्तक-गीत आदि संकलित है .

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (२१ फरवरी १८९९ - १५ अक्तूबर १९६१) हिन्दी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक माने जाते हैं। अपने समकालीन अन्य कवियों से अलग उन्होंने कविता में कल्पना का सहारा बहुत कम लिया है और यथार्थ को प्रमुखता से चित्रित किया है। वे हिन्दी में मुक्तछंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं।


प्रमुख कृतियाँ

काव्यसंग्रह: अनामिका, परिमल, गीतिका, द्वितीय अनामिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमा, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधना, गीत कुंज, सांध्य काकली, अपरा।
उपन्यास- अप्सरा, अलका, प्रभावती, निरुपमा, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा।
कहानी संग्रह- लिली, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी, सखी, देवी।
निबंध- रवीन्द्र कविता कानन, प्रबंध पद्म, प्रबंध प्रतिमा, चाबुक, चयन, संग्रह।
पुराण कथा- महाभारत
अनुवाद - आनंद मठ, विष वृक्ष, कृष्णकांत का वसीयतनामा, कपालकुंडला, दुर्गेश नन्दिनी, राज सिंह, राजरानी, देवी चौधरानी, युगलांगुल्य, चन्द्रशेखर, रजनी, श्री रामकृष्ण वचनामृत, भरत में विवेकानंद तथा राजयोग का बांग्ला से हिन्दी में अनुवाद .



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शनिवार, 24 सितंबर 2011

कुछ कच्चा कुछ पक्का (कहानी संग्रह)



'कुछ कच्चा कुछ पक्का ' कौतुक बनारसी के नाम से मशहूर शिवमूर्ति शिव का कहानी संग्रह है . 

कौतक बनारसी हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध गद्यकार और कवि रहे है . इनकी रचनाये पाठकों के दिल-ओ-दिमाग को छू लेती है.

प्रस्तुत पुस्तक की रचना १९५९ में की गयी थी. इसमें लेखक की 9 कहानियों का संकलन है  . सभी कहानियां रोचक है .

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शुक्रवार, 23 सितंबर 2011

रहीम कवितावली



'रहीम कवितावली' पुस्तक में नवाब अब्दुर्रहीम खान खाना की सभी उपलब्ध पुस्तकों तथा कविताओं का संकलन है .

रहीम मध्यकालीन सामंतवादी संस्कृति के कवि थे। रहीम का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न था। वे एक ही साथ सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी, कवि एवं विद्वान थे। रहीम सांप्रदायिक सदभाव तथा सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। वे भारतीय सामासिक संस्कृति के अनन्य आराधक थे। रहीम कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।


नवाब अब्दुर्रहीम खान खाना मध्यकालीन भारत के कुशल राजनीतिवेत्ता, वीर- बहादुर योद्धा और भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का आदर्श प्रस्तुत करने वाले मर्मी कवि माने जाते हैं। उनकी गिनती विगत चार शताब्दियों से ऐतिहासिक पुरुष के अलावा भारत माता के सच्चे सपूत के रुप में किया जाता रहा है। आपके अंदर वह सब गुण मौजूद थे, जो महापुरुषों में पाये जाते हैं। आप ऐसे सौ भाग्यशाली व्यक्तियों में से थे, जो अपनी उभयविद्य लोकप्रियता के कारण केवल ऐतिहासिक न होकर भारतीय जनजीवन के अमिट पृष्टों पर यश शरीर से जीवित पाये जाते हैं। आप एक मुसलमान होते हुए भी हिंदू जीवन के अंतर्मन में बैठकर आपने जो मार्मिक तथ्य अंकित किये थे, उनकी विशाल हृदयता का परिचय देती हैं।

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गुरुवार, 22 सितंबर 2011

सर्दी-खांसी-जुकाम और उनका इलाज


यह पुस्तक प्राकृतिक चिकित्सा पर आधारित है. इसमें सर्दी-खांसी-जुकाम के प्राकृतिक उपाय बताये गए है

यदि सर्दी-जुकाम का उपचार उसके लक्षण नजर आते ही कर लिया जाए तो शरीर को अन्य दूसरी बीमारियों की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती है।
 
खांसी कोई बीमारी नहीं वरन् बीमारियों का लक्षण है। यदि खांसी लगातार बनी रहती है तो कई बीमारियां पैदा कर देती है। अत: खांसी होते ही उसका इलाज अवश्य करा लेना चाहिए। खांसी के लिए डाक्टर के पास जाने के बजाए आप खुद भी डॉक्टर बन सकते हैं घरेलू इलाज करके। खांसी कई प्रकार की होती है जैसे काली खांसी, सूखी व बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में काफी कठिनाई से थूक आता है बलगमी खांसी में बलगम निकलता है और काली खांसी में खांसते-खांसते मुंह लाल हो जाता है। यह प्राय: बच्चों में होती है।
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बुधवार, 21 सितंबर 2011

सम्राट विक्रमादित्य और उनके नवरत्न

यह पुस्तक विक्रमादित्य और उनके नवरत्नों पर प्रकाश डालती है.

विक्रमादित्य (ई.पू.102 से 15 ईस्वी तक) उज्जैन, भारत के अनुश्रुत राजा थे, जो अपने ज्ञान, वीरता और उदारशीलता के लिए प्रसिद्ध थे. "विक्रमादित्य" की उपाधि भारतीय इतिहास में बाद के कई अन्य राजाओं ने प्राप्त की थी, जिनमें उल्लेखनीय हैं गुप्त सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय और सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (जो हेमु के नाम से प्रसिद्ध थे).

विक्रमादित्य, संस्कृत और भारत के क्षेत्रीय भाषाओं, दोनों में एक लोकप्रिय व्यक्तित्व है. उनका नाम बड़ी आसानी से ऐसी किसी घटना या स्मारक के साथ जोड़ दिया जाता है, जिनके ऐतिहासिक विवरण अज्ञात हों, हालांकि उनके इर्द-गिर्द कहानियों का पूरा चक्र फला-फूला है. संस्कृत की सर्वाधिक लोकप्रिय दो कथा-श्रृंखलाएं हैं वेताल पंचविंशति  या बेताल पच्चीसी  ("पिशाच की 25 कहानियां") और सिंहासन-द्वात्रिंशिका ("सिंहासन की 32 कहानियां" जो सिहांसन बत्तीसी के नाम से भी विख्यात हैं). इन दोनों के संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं में कई रूपांतरण मिलते हैं.


भारतीय परंपरा के अनुसार धनवंतरी, क्षपनक, अमरसिंह, शंकु, खटकरपारा, कालिदास, वेतालभट्ट (या (बेतालभट्ट), वररुचि, और वराहमिहिर उज्जैन में विक्रमादित्य के राज दरबार का अंग थे. कहते हैं कि राजा के पास "नवरत्न" कहलाने वाले नौ ऐसे विद्वान थे.


कालिदास प्रसिद्ध संस्कृत राजकवि थे. वरामिहिर उस युग के प्रमुख ज्योतिषी थे, जिन्होंने विक्रमादित्य की बेटे की मौत की भविष्यवाणी की थी. वेतालभट्ट एक धर्माचार्य थे. माना जाता है कि उन्होंने विक्रमादित्य को सोलह छंदों की रचना "नीति -प्रदीप" (Niti-pradīpa सचमुच "आचरण का दीया") का श्रेय दिया है.
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मंगलवार, 20 सितंबर 2011

कौवारोर (हास्य काव्य संग्रह)


'कौवारोर' कौतुक बनारसी के नाम से मशहूर शिवमूर्ति शिव का हास्य काव्य संग्रह है . 

कौतक बनारसी हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध गद्यकार और कवि रहे है . इनकी रचनाये पाठकों के दिल-ओ-दिमाग को छू लेती है.

प्रस्तुत पुस्तक की रचना १९५९ में की गयी थी. इसमें हास्य-रस की ऐसी कविताओं का संकलन है जो पाठकों के मन को गुदगुदाती है. जैसे कि 'मच्छर-सम्मलेन', 'प्रेमनगर की होली', 'बड़ी मांग है' इत्यादि .

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रविवार, 18 सितंबर 2011

आगामी आकर्षण

[Updated]

यह पृष्ठ एक तरह से पूर्वालोकन पृष्ठ भी कहा जा सकता है । इस पृष्ठ पर उन पुस्तकों की जानकारी दी जाएगी, जो आने वाले दिनों में 'अपनी हिंदी' पर प्रकाशित होगी। इस पृष्ठ को सुविधानुसार लगातार अपडेट किया जाता रहेगा।


नोट: यहाँ पर कुछ ख़ास पुस्तकों की सूची ही दी जाएगी, सभी पुस्तकों की सूची देना संभव नहीं है


'अपनी हिंदी' पर आने वाले दिनों में जो पुस्तकें प्रकाशित की जाएगी, उनमे से कुछ खास पुस्तकें इस प्रकार है:



सितम्बर माह  :





(1) विराटा की पद्मिनी


विराटा की पद्मिनी वृंदावनलाल वर्मा का अमर उपन्यास है !इसके बारे में कुछ कहना सूरज को दिया दिखाने के समान है .


(2)रोहतास मठ चंद्रकांता, भूतनाथ के बाद देवकीनंदन खत्री और 'अपनी हिंदी' की एक और महान पेशकश ।
(3) महाकवि निराला की विभिन्न पुस्तकें।




और भी बहुत कुछ...

नोट: 'अपनी हिंदी' द्वारा अगस्त माह को धर्म एवं ज्योतिष पुनरुत्थान माह घोषित किया गया हैइसलिए अगस्त माह में धर्म एवं ज्योतिष से सम्बंधित कुछ अति विशिष्ट पुस्तकें उपलब्ध करवाई जाएँगी




हमारा ये नया प्रयास आपको कैसा लगा, हमें अवश्य बताएं । आपकी प्रतिक्रिया का इन्तजार रहेगा।


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जोश मलीहाबादी - जीवनी और संकलन





'जोश मलीहाबादी - जीवनी और संकलन' पुस्तक में मशहूर शायर जोश मलीहाबादी का जीवन चरित और उनकी शायरी दी गयी है.


उर्दू के म-आरुफ़ शायर जोश मलीहाबादी जो की साहिर के पसंदीदा शायर थे; जवाहरलाल नेहरु साहब के अज़ीज़ों में थे | इस की एक ख़ास वजह उनका इंकेलाबी और आतिशबार अंदाज़ था जिसके लिए उन्हें शायर-ऐ-इन्किलाब भी कहा जाता था |

शब्बीर वासन खान जोश (1898-1982) की पैदाइश मलीहाबाद (उत्तर प्रदेश) की थी और वो अफरीदी पठान के वारिस थे | इन्होने कुछ हिंदी फिल्मों के लिए गाने लिखे और एक 'आज कल कलाम' नाम के रिसाले को भी मुदीर की हैसियत से चलाया | बहरहाल, 1956 में बिना किसी को खबर किये ये पाकिस्तान मुन्ताकिल हो गए, शायद अपनी बेटियों के लिए लायक खाविंद की तलाश में |

पंडितजी (जवाहर लाल नेहरु) जोश के इस फैसले से बेहद न-खुश थे | जोश भी पाकिस्तान में कोई कमाल नहीं कर पाए, बल्कि उन्हें हिंदुस्तान की याद सताने लगी | जो इज्ज़त और शौहरत उन्हें हिंदुस्तान ने बख्शी थी, वो उन्हें पाकिस्तान में न मिल सकी | 

उनके नाम से एक किस्सा भी खासा मशहूर है वो ये के अपनी ज़िन्दगी के आखिरी दिनों में इन्होने पंजाबी ज़बान का इल्म भी हासिल करना शुरू कर दिया था | उनका मानना था के मरने के बाद वो जहन्नम जायेंगे और वहां की कौमी ज़बान पंजाबी है | जोश का इन्तेकाल 1982 में रावलपिंडी में हुआ |

(विवरण http://ek-shayar-tha.blogspot.com से साभार)

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शनिवार, 17 सितंबर 2011

अमेरिका की उन्नति का कारण



'अमेरिका की उन्नति का कारण' पुस्तक स्वामी रामतीर्थ के उस व्याख्यान पर आधारित है जो उन्होंने गाजीपुर में दिया था .


स्वामी रामतीर्थ (१८७३ - १९०६) वेदांत की जीती-जागती मूर्ति थे। इनकी वाणी के शब्द शब्द से आत्मानुभति का उल्लास टपकता है। केवल 33 वर्ष की अल्पायु में कैसे इन्होंने आत्मज्ञान के प्रकाश से स्वदेश और विदेशों को आलोकित किया, यह एक चमत्कार जैसा है।

राम विकासवाद के समर्थक थे। मनुष्य भिन्न भिन्न श्रेणियों है। कोई अपने परिवार के, कोई जाति के, कोई समाज के और कोई धर्म के घेरे से घिरा हुआ है। उसे घेरे के भीतर की वस्तु अनुकूल और घेरे से बाहर की प्रतिकूल। यही संकीर्णता अनर्थों की जड़ है। प्रकृति में कोई वस्तु स्थिर नहीं। अपनी सहानुभति के घेरे में भी फैलना चाहिए। सच्चा मनुष्य वह है, जो देशमय, विश्वमय हो जाता है।

राम आनंद को ही जीवन का लक्ष्य मानते हैं पर जन्म से मरण पर्यंत हम अपने आनंदकेंद्रों को बदलते रहते हैं। कभी किसी पदार्थ में सुख मानते हैं और भी किसी व्यक्ति में। आनंद का स्रोत हमारी आत्मा है। हम उसके लिए प्राणों का भी उत्सर्ग देते हैं।


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शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

घरेलु इलाज

आजकल के दौर में जब अन्य इलाज महंगे हो गए है, 'घरेलु  इलाज' बेहतरीन विकल्प है. 'घरेलु इलाज' एक उपयोगी पुस्तक है. इसमें विभिन्न बीमारियों से सम्बंधित घरेलु इलाज दिए गए ही जो गुणकारी और निरापद है. इसके अलावा ये उपाय प्राथमिक चिकित्सा  के तौर पर भी काम में लिए जा सकते है.

हर घर में ये पुस्तक अवश्य होनी चाहिए .


घरेलु इलाज के कुछ उदाहरण :
हिचकी
· यदि किसी को हिचकी आ रही हो तो दो चम्मच प्याज के रस में दो चम्मच ही शहद मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बन्द हो जाती है।

जी मिचलाना
· तुलसी रस का एक छोटा चम्मच पी जाएँ, या शहद मिलाकर चाटने से जी मिचलना बंद हो जाएगा।
· जीरे को नींबू के रस में भिंगोकर नमक मिलाकर खटाई का जीरा बनाएं। जी मिचलाने पर या गर्भवती स्त्री के जी मिचलाने या उबकाई आदि में यह चूर्ण खाना विशेष लाभदायक है।

पेट दर्द· यदि पेट दर्द हो रहा हो तो काली मिर्च, हींग, सोठ तीनों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस कर आधा चम्मच फांक कर ऊपर से गुनगुने पानी से लेने से पेट दर्द से तुरंत राहत मिलती है।
· अदरक के रस में नींबू का रस, काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर पीने से पेट दर्द गायब हो जाता है।

अनिद्रा
· सेब का मुरब्बा सोने से पहले खाएं तो अच्छी नींद आएगी। सेब खाकर सोने से भी अच्छी नींद आती है।
· सोने से पहले शहद गर्म पानी में घोलकर पीयें, भरपूर नींद आयेगी।



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बुधवार, 14 सितंबर 2011

वोल्गा से गंगा (Volga se Ganga)





'वोल्गा से गंगा' में राहुल सांकृत्यायन ने ६००० ई. पू. से १९४२ तक मानव समाज के ऐतिहासिक, आर्थिक, राजनैतिक आधारों का २० कहानियों के रूप में पूर्ण चित्रण किया है.

राहुल सांकृत्यायन जिन्हें महापंडित की उपाधि दी जाती है, हिन्दी के एक प्रमुख साहित्यकार थे । वे एक प्रतिष्ठित बहुभाषाविद् थे और बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में उन्होंने यात्रा वृतांत/यात्रा साहित्य तथा विश्व-दर्शन के क्षेत्र में साहित्यिक योगदान किए । वह हिंदी यात्रा सहित्य के पितामह कहे जाते हैं। बौद्ध धर्म पर उनका शोध हिन्दी साहित्य में युगान्तरकारी माना जाता है, जिसके लिए उन्होंने तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक भ्रमण किया था । इसके अलावा उन्होंने मध्य-एशिया तथा कॉकेशस भ्रमण पर भी यात्रा वृतांत लिखे जो साहित्यिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं ।

२१वीं सदी के इस दौर में जब संचार-क्रान्ति के साधनों ने समग्र विश्व को एक ‘ग्लोबल विलेज’ में परिवर्तित कर दिया हो एवं इण्टरनेट द्वारा ज्ञान का समूचा संसार क्षण भर में एक क्लिक पर सामने उपलब्ध हो, ऐसे में यह अनुमान लगाना कि कोई व्यक्ति दुर्लभ ग्रन्थों की खोज में हजारों मील दूर पहाड़ों व नदियों के बीच भटकने के बाद, उन ग्रन्थों को खच्चरों पर लादकर अपने देश में लाए, रोमांचक लगता है। पर ऐसे ही थे भारतीय मनीषा के अग्रणी विचारक, साम्यवादी चिन्तक, सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत, सार्वदेशिक दृष्टि एवं घुमक्कड़ी प्रवृत्ति के महान् पुरूष राहुल सांकृत्यायन।

राहुल सांकृत्यायन के जीवन का मूलमंत्र ही घुमक्कड़ी यानी गतिशीलता रही है। घुमक्कड़ी उनके लिए वृत्ति नहीं वरन् धर्म था। आधुनिक हिन्दी साहित्य में राहुल सांकृत्यायन एक यात्राकार, इतिहासविद्, तत्वान्वेषी, युगपरिवर्तनकार साहित्यकार के रूप में जाने जाते है ।


राहुल सांकृत्यायन की अन्य पुस्तकें भी 'अपनी हिंदी' पर उपलब्ध है . इन्हें डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें .



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सोमवार, 12 सितंबर 2011

'भूतनाथ' (Bhootnath Novel)


'भूतनाथ'  इक्कीस भाग व सात खण्डों में,चन्द्रकान्ता’ व ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ की ही परम्परा और श्रृंखला का, बाबू देवकीनन्दन खत्री विरचित एक अत्यन्त लोकप्रिय और बहुचर्चित प्रसिद्ध उपन्यास है। ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ में ही बाबू देवकीनन्दन खत्री के अद्भुत पात्र भूतनाथ (गदाधर सिंह) ने अपनी जीवनी (जीवन-कथा) प्रस्तुत करने का संकल्प किया था।

यह संकल्प वस्तुतः लेखक का ही एक संकेत था कि इसके बाद ‘भूतनाथ’ नामक बृहत् उपन्यास की रचना होगी। देवकीनन्दन खत्री की अद्भुत कल्पना-शक्ति को शत-शत नमन है। लाखों करोड़ों पाठकों का यह उपन्यास कंठहार बना हुआ है।

उनका उपन्यास भूतनाथ अधूरा ही रहा। मरणोपरान्त उनके पुत्र दुर्गाप्रसाद खत्री ने उसे पूर्ण किया।

जब यह कहा जाता है कि चन्द्रकान्ता’ और ‘चन्द्रकान्ता-सन्तति’ उपन्यासों को पढ़ने के लिए लाखों लोगों ने हिन्दी भाषा सीखी तो इस कथन में ‘भूतनाथ’ भी स्वतः सम्मिलित हो जाता है क्योंकि ‘भूतनाथ’ उसी तिलिस्मी और ऐयारी उपन्यास परम्परा ही नहीं, उसी श्रृंखला का प्रतिनिधि उपन्यास है। कल्पना की अद्भुत उड़ान और कथारस की मार्मिकता इसे हिन्दी साहित्य की विशिष्ट रचना सिद्ध करती है। मनोरंजन का मुख्य उद्देश्य होते हुए भी इसमें बुराई और असत् पर अच्छाई और सत् की विजय का शाश्वत विधान ऐसा है जो इसे एपिक नॉवल (Epic Novel) यानी महाकाव्यात्मक उपन्यासों की कोटि में लाता है। ‘भूतनाथ’ का यह शुद्ध पाठ-सम्पादन और भव्य नवप्रकाशन, आशा है, पाठकों को विशेष रुचिकर प्रतीत होगा।



देवकीनंदन खत्री का अन्य महान उपन्यास 'चंद्रकांता' भी 'अपनी हिंदी' पर उपलब्ध है. इसे डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करें.
देवकीनंदन खत्री के अन्य सभी उपन्यास डाउनलोड करने के लिए
यहाँ क्लिक करें




Download Bhootnath Novel in Hindi. Download Links Are Given Below!






'लहरी प्रेस' की तरफ से प्राप्त अनुरोध के बाद 'भूतनाथ' उपन्यास के लिंक 'अपनी हिंदी' से हटा दिए गए है. पाठकों को हुई असुविधा के लिए खेद है.


कृपया 'ध्यान दें: लहरी प्रेस के अनुरोध पर, भूतनाथ'. 'रोहतास मठ ' और बाबु दुर्गाप्रसाद खत्री जी द्वारा रचित अन्य सभी पुस्तकों का लिंक यहाँ उपलब्ध करवाना मना है.

और अपनी साईट का प्रचार बिना हमारी अनुमति के 'अपनी हिंदी' पर करना मना है. इसलिए अपने ब्लॉग/साईट का लिंक यहाँ हमारी अनुमति के बिना न दें.
धन्यवाद!

-प्रबंधक .









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डाउनलोड कैसे करें


कृपया डाउनलोड सम्बन्धी कोई भी शिकायत करने से पहले ये पोस्ट जरूर देखें
प्रिय पाठकों ,
हमें पता चला है कि कुछ पाठकों को 'अपनी हिंदी' से पुस्तकें डाउनलोड करने में दिक्कत आ रही है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि पुस्तकें डाउनलोड कैसे करनी है। इसीलिए आप सभी की सुविधा के लिए हम आपको ये जानकारी दे रहे है।

डाउनलोड कैसे करें:

हमारी हर पुस्तक अन्य फाइल होस्टिंग वेबसाइट पर अपलोड की जाती है. ये वेबसाइट अपने सदस्य की फाइल को आपने यहाँ पर सुरक्षित रखते है. इनकी सेवा मुफ्त होती है. ये फाइल डाउनलोड करने के लिए कोई पैसा नहीं लेते।
( इनमे मुख्य है. Rapidshare .com , megaupload .com , Hotfile .com इत्यादि) ।

जब हम इनसे कोई फाइल डाउनलोड करते है तो ये हमें कुछ सेकंड का timer दिखाती है. हमें उतने सेकंड इन्तजार करना होता है. उसके बाद डाउनलोड लिंक दिखाई देता है ।

डाउनलोड करना बहुत आसान है। बस आपको निम्न कार्य करना है:

() Step 1
अब जैसे आपने 'सरल वास्तु शास्त्र' पुस्तक डाउनलोड करनी है. इसे डाउनलोड करने के लिए पोस्ट में दो डाउनलोड लिंक दिए गए है। एक megaupload का है तो दूसरा multi-mirror है। (multi-mirror का मतलब होता है की एक ही फाइल एक से ज्यादा जगहों से डाउनलोड की जा सकती है अपनी सुविधानुसार)

इनमे से किसी एक पर क्लिक करें.


अब adf.ly का पन्ना खुलेगा । यह एक विज्ञापन सेवा है। इस पन्ने पर ५ सेकंड तक इन्तजार करें। ५ सेकंड के बाद सबसे ऊपर दायीं तरफ SKIP AD लिखा आएगा । इस पर क्लिक करें । (देखें चित्र )

अब डाउनलोड प्रदान करने वाली वेबसाइट खुलेगी।

नोट: यह step सभी के लिए समान है चाहे किसी भी लिंक पर क्लिक करें

(2) Step २ अब माना आपने Megaupload वाले लिंक पर क्लिक किया । तो adf.ly के बाद जो पन्ना खुला, उसमे ऊपर बाएँ कोने पर हमारी फाइल से सम्बंधित सारी जानकारी आ जाएगी जैसे की फाइल का नाम, आकार आदि । नीचे दायीं ओर Timer अपने आप चल पड़ेगा जो कि अमूमन ४०-४५ सेकंड का होता है (देखें चित्र)। ४०-४५ सेकंड के बाद Timer के स्थान पर लिखा आएगा - Regular Download। इस पर क्लिक करें । Download अपने आप शुरू हो जायेगा। (देखें चित्र)

(2) Step ३ अगर आपने multi-mirror वाले लिंक पर क्लिक किया है तो एक नया पेज खुलेगा जिस पर 1 से लेकर 8 तक लिंक दिए हुए हो सकतेहै. इसका मतलब है कि 'सरल वास्तु शास्त्र ' पुस्तक हमने पाठकों की सहूलियत के लिए 8 websites पर लोड कर रखी है. ताकि अगर एक लिंक काम न करें तो दुसरे से डाउनलोड किया जा सके. आपको इनमे से किसी एक पर क्लिक करना है. फाइल सभी पर एक ही है । (देखें चित्र)
३. अब जैसे आपने Rapidshare वाले लिंक (जहाँ इसके आगे डाउनलोड फाइल लिखा हुआ है.) पर क्लिक किया. अब Rapidshare की वेबसाइट का पेज खुलेगा. जिस पर पुस्तक को डाउनलोड करने के लिए निर्देश दिए हुए होंगे.
जैसे लिखा हुआ होगा:
Free Users Click here to Download या Download या फ्री Download या Regular Download।
आपने इस लिंक पर क्लिक करना है.

आपके क्लिक करते ही timer शुरू हो जाएगा। उसके बाद डाउनलोड लिंक दिखाई देगा। इस पर क्लिक करते ही आपका डाउनलोड शुरू हो जायेगा जो की एक पीडीऍफ़ फाइल है. इसे पढने के लिए आपके पास Adobe Acrobat Reader या Foxit PDF Reader software होना चाहिए.

बाकी सभी वेबसाइट का भी इससे मिलता-जुलता तरीका है. आप किसी से भी डाउनलोड कर सकते है.

कृपया ध्यान दे:
१। अधिकतर वेबसाइट पर आप एक वेबसाइट से एक बार में एक ही पुस्तक डाउनलोड कर सकते है। दूसरी पुस्तक डाउनलोड करने के लिए पहला डाउनलोड ख़तम होने का इन्तजार करना होगा।

२। कुछ वेबसाइट पर डाउनलोड शुरू करने के लिए एक कोड भरना पड़ेगा (जैसे hotfile पर ) जो उसी पेज पर एक फोटो के रूप में दिया गया होगा। अगर कोड गलत भर दिया जाए तो आपको फिर से दूसरा सही कोड भरने को कहा जायेगा।

३। कुछ वेबसाइट एक के बाद एक लगातार दो फाइल डाउनलोड करने की इजाजत नहीं देती। इसके लिए कुछ समय इन्तजार करना होता है। उसके बाद दूसरा डाउनलोड शुरू होता है। जैसे Hotfile पर आप आधे घंटे में एक ही पुस्तक डाउनलोड कर सकते है। मान लीजिये आपने 10:40 पर एक फाइल डाउनलोड की तो आप 11:10 तक दूसरी फाइल Hotfile.com से डाउनलोड नहीं कर सकते।


४। अगर एक वेबसाइट पर फाइल उपलब्ध नहीं है या ज्यादा समय इन्तजार करना पड़े तो आप दूसरी वेबसाइट से भी पुस्तक डाउनलोड कर सकते है।

हमने शुरुआत में जो पुस्तकें उपलब्ध करवाई थी वो सभी Rapidshare पर उपलब्ध है। हम कोशिश कर रहे है कि इनको भी एक से ज्यादा वेबसाइट पर उपलब्ध करवाया जायें।
कृपया अपना सहयोग बनाये रखें।


धन्यवाद्,


प्रबंधक।

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रविवार, 11 सितंबर 2011

नरक का मार्ग (कहानी संग्रह)



'नरक का मार्ग' प्रेमचंद जी की कहानियों का संग्रह है। इसमें उनकी कुल १९ कहानियों का संकलन किया गया है। इनकी सूची नीचे दी जा रही है।




प्रेमचंद (३१ जुलाई, १८८० - ८ अक्तूबर १९३६) के उपनाम से लिखने वाले धनपत राय श्रीवास्तव हिंदी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेमचंद व नवाब राय नाम से भी जाना जाता है और उपन्यास सम्राट के नाम से सम्मानित किया जाता है।










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लोहारबारी (कहानी)


'लोहारबारी' परदेशीराम वर्मा की एक प्रसिद्ध कहानी है. 

परदेशीराम वर्मा एक महत्‍वपूर्ण कथाकर हैं. वे छत्‍तीसगढ के एक आंचलिक कथाकर हैं. परदेशीराम वर्मा भारत के गांवों की अंतरूणी सच्‍चाई के जानकार हैं.
परदेशीराम वर्मा की भाषा उनकी शक्ति है. वे संस्‍मरण से ज्‍यादा ताकतवर एक कहानीकार के रूप में दिखते हैं. सहज से दिखते समाज के संघर्ष को परदेशीराम वर्मा नें खूब पकडा है. आज कहानियों में जहां भाषा और शिल्‍प का चमत्‍कार दिखलाया जा रहा है वहां परदेशीराम वर्मा जैसे लेखक गहन कथ्‍य और भाषा की सहजता का संस्‍कार लेकर कथा की यात्रा आगे बढा रहे हैं.

हिन्दी और छत्तीसगढी में समान रूप से लिखकर पहचान बनाने वाले चुनिंदा साहित्यकारों में से एक कथाकार डा परदेशीराम वर्मा नें कहानी, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी, निबंध, शोध प्रबंध आदि सभी विधओं में पर्याप्त लेखन किया है । 

भारतीय साहित्य जगत उन्हे एक कथाकार के रूप में पहचानता है । उनकी कृति 'औरत खेत नही' कथा संग्रह को अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा मदारिया सम्मान प्राप्त हुआ । तीन हिन्दी एक छत्तीसगढी कहानी पुरस्कृत हुई है । जीवनी आरूग फूल को मघ्य प्रदेश साहित्य परिषद का सप्रे सम्मान मिला । उपन्यास प्रस्थान को महन्त अस्मिता पुरस्कार प्राप्त हुआ । छत्तीसगढी उपन्यास आवा रविशंकर विश्वविद्वालय के एम ए हिन्दी के पाठयक्रम में सम्मिलित हुआ । 
(विवरण आरम्भ से साभार )

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गुरुवार, 8 सितंबर 2011

'अक्षर-अक्षर' - पाश


'अक्षर-अक्षर' पुस्तक में पंजाबी के जनकवि अवतार सिंह 'पाश ' की सभी काव्य रचनाओं का संग्रह है. 

 जिंदगी भर  इन्सानियत  के कातिलो के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाले पंजाबी के जनकवि अवतार सिंह 'पाश ' को ३७ साल की उम्र में ही  २३ मार्च १९८८ को धर्मांध दहशतों गर्दों ने गोलियां बरसाकर  मार  दिया  था | शहीदे-आज़म भगत सिंह ने २३ मार्च १९३१ को फांसी चढ़कर  इन्कलाब की  जिस लौ को जलाया  जनकवि अवतार सिंह 'पाश' उसे मशाल बनाकर जिये | 

उनका जन्म  ९ सितम्बर १९५० को ग्राम तलवंडी सलेम जिला जालंधर (पंजाब) में हुआ था | उन्होंने पहली कविता १५ वर्ष  की आयु में लिखी | वे १९६७ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और १९६९ में नक्सलवादी आन्दोलन से जुड़े | १९८५ में वे अमेरिका चले गए वहाँ एंटी -४७(१९८६-८८) का संपादन करते हुए खालिस्तानी आन्दोलन के विरुद्ध सशक्त प्रचार किया |

 अवतार सिंह 'पाश' द्वारा लिखित कुल १२५ कविताये उपलब्ध है | जो उनके चार कविता संग्रहों लौहकथा (१९७०), उडडदे  बजान  मगर (१९७४), साडे समियां विच (१९७८), लडांगे साथी(१९८८)  में संगृहीत हैं  |
              पंजाबी भाषा  के कवि 'पाश' को उनकी म्रत्यु के बाद अन्य भाषा भाषियों ने भी बखूबी पहचाना| 'पाश' की कविता की धार निराला, नागार्जुन और गोरख पाण्डेय की याद ताज़ा कर देती है | 'पाश' एक ऐसा जन कवि था जिसने केवल शब्दों का बडबोलापन ही नहीं दिखाया बल्कि व्यवस्था के खिलाफ लगातार लड़ाई भी लड़ी | वे कई बार जेल गए और पुलिस की यातना सही | उनका कहना था -
                                                                      हम झूठ  मूठ का कुछ भी नहीं चाहते
                                                                      और हम सब कुछ सचमुच देखना चाहते है 
                                                                      जिन्दगी, समाजवाद या कुछ ओर |

 जनकवि 'पाश' के लिए देशभक्ति अपने देश  की  जनता कि मोहब्बत  में, उसके दुःखदर्द में बसती है |तभी तो वे कहते हैं -
                                                              
                                              मुझे देश द्रोही भी कहा जा सकता है 
                                              लेकिन मैं सच कहता हूँ यह देश अभी मेरा नहीं है 
                                              यहाँ के जवानों या किसानों का नहीं है 
                                              यह तो केवल कुछ 'आदमियों'  का है
                                              ओर हम अभी आदमी नहीं हैं ,बड़े निरीह पशु हैं | 
                                              हमारे जिस्म में जोंकों ने नहीं पालतू मगरमच्छों ने दांत गड़ाएं हैं 
                                              उठो, 
     अपने घरों के धुओं उठो |
     उठो काम करने वाले मजदूरों उठो | 
      खेमो पर लाल झंडे लगाकर बैठने  से कुछ न होगा 
       इन्हें अपने रक्त की  रंगत दो |
आगे वे कहते हैं -
 अगर देश कि सुरक्षा ऐसी होती कि
 हर हड़ताल को कुचल कर अमन को रंग चढ़ेगा   
 कि वीरता बस सरहदों पर मरकर परवान चढ़ेगी  
 कला का फूल बस राजा कि खिड़की में ही खिलेगा
 अक्ल, हुकुम   के कुँए पर रहट कि तरह ही धरती 
सींचेगी,
 मेहनत राज महलों के दर पर बुहारी ही बनेगी 
 तो हमें देश कि सुरक्षा से खतरा है |


 बगावत की ऐसी आवाज शायद ही किसी कवि ने बुलंद की हो | 'पाश' के तेवर तानाशाही निजाम के साथ-साथ धर्मांध दहशतगर्दों के खिलाफ भी उसी हौसलें से लोहा लेते रहे | उन्होंने धर्मगुरुओं को चुनौती देते हुए कहा -
                                                         किसी भी धर्म का कोई ग्रन्थ
                                                          मेरे जख्मी होठों की चुप से अधिक पवित्र नहीं है |


(विवरण jalesmeerut.blogspot.com से साभार )




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