वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
कृपया दायीं तरफ दिए गए 'हमारे प्रशंसक' लिंक पर क्लिक करके 'अपनी हिंदी' के सदस्य बनें और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान दें। सदस्यता निशुल्क है।
Flipkart.com

शनिवार, 14 मई 2011

देवी अहिल्याबाई


अपने बेटे के अत्याचारों को देखकर एक दिन महारानी का खून खौल उठा । उसने आदेश दिया - 'इसे हाथी के पैरों से कुचलवा डालो ' जन-हित के लिए अपने बेटे को मरवा डालने वाली यह माँ थी - इंदौर के होलकर राज्य की देवी - अहिल्याबाई।

अहिल्याबाई किसी बड़े भारी राज्य की रानी नहीं थीं। उनका कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित था। फिर भी उन्होंने जो कुछ किया, उससे आश्चर्य होता है।

अहिल्याबाई ने अपने राज्य की सीमाओं के बाहर भारत-भर के प्रसिद्ध तीर्थों और स्थानों में मंदिर बनवाए, घाट बँधवाए, कुओं और बावड़ियों का निर्माण किया, मार्ग बनवाए-सुधरवाए, भूखों के लिए अन्नसत्र (अन्यक्षेत्र) खोले, प्यासों के लिए प्याऊ बिठलाईं, मंदिरों में विद्वानों की नियुक्ति शास्त्रों के मनन-चिंतन और प्रवचन हेतु की। और, आत्म-प्रतिष्ठा के झूठे मोह का त्याग करके सदा न्याय करने का प्रयत्न करती रहीं-मरते दम तक ।

ये उसी परंपरा में थीं जिसमें उनके समकालीन पूना के न्यायाधीश रामशास्त्री थे और उनके पीछे झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई हुई। अपने जीवनकाल में ही इन्हें जनता ‘देवी’ समझने और कहने लगी थी । इतना बड़ा व्यक्तित्व जनता ने अपनी आँखों देखा ही कहाँ था। जब चारों ओर गड़बड़ मची हुई थी। शासन और व्यवस्था के नाम पर घोर अत्याचार हो रहे थे। प्रजाजन-साधारण गृहस्थ, किसान मजदूर-अत्यंत हीन अवस्था में सिसक रहे थे। उनका एकमात्र सहारा-धर्म-अंधविश्वासों, भय त्रासों और रूढि़यों की जकड़ में कसा जा रहा था। न्याय में न शक्ति रही थी, न विश्वास। ऐसे काल की उन विकट परिस्थितियों में अहिल्याबाई ने जो कुछ किया-और बहुत किया ।-वह चिरस्मरणीय है।

फाइल का आकार: 2 Mb

डाउनलोड लिंक (Multi-Mirrors):
कृपया यहाँ क्लिक करें

या
Megauploadcom से डाउनलोड करें (Recommended):
कृपया यहाँ क्लिक करें


(डाउनलोड करने में कोई परेशानी हो तो कृपया यहाँ क्लिक करें)

ये पुस्तक आपको कैसी लगी? कृपया अपनी टिप्पणियां अवश्य दें।

[ Keywords: Free hindi books, Free hindi ebooks, Free hindi stories, Hindi stories pdf, Hindi PDF Books, Hindi sahitya , Hindi kahani, Hindi e books, Hindi e book, free hindi novels, Hindi Text Book ]

4 टिप्पणियां:

प्रवीण पाण्डेय on 14/5/11 9:53 am ने कहा…

ऐसे चरित्र सब पढ़ें।

Akshay kumar ojha on 14/5/11 4:36 pm ने कहा…

बहुत ही अच्छी पुस्तक है ये मैं बहुत दिनों से इंतजार कर रहा था धन्यवाद

मनोज कुमार on 14/5/11 10:37 pm ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" on 15/5/11 10:39 am ने कहा…

प्रिय दोस्तों! क्षमा करें.कुछ निजी कारणों से आपकी पोस्ट/सारी पोस्टों का पढने का फ़िलहाल समय नहीं हैं,क्योंकि 20 मई से मेरी तपस्या शुरू हो रही है.तब कुछ समय मिला तो आपकी पोस्ट जरुर पढूंगा.फ़िलहाल आपके पास समय हो तो नीचे भेजे लिंकों को पढ़कर मेरी विचारधारा समझने की कोशिश करें.
दोस्तों,क्या सबसे बकवास पोस्ट पर टिप्पणी करोंगे. मत करना,वरना......... भारत देश के किसी थाने में आपके खिलाफ फर्जी देशद्रोह या किसी अन्य धारा के तहत केस दर्ज हो जायेगा. क्या कहा आपको डर नहीं लगता? फिर दिखाओ सब अपनी-अपनी हिम्मत का नमूना और यह रहा उसका लिंक प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से
श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी लगाये है.इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है.मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.
क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ.
अगर आप चाहे तो मेरे इस संकल्प को पूरा करने में अपना सहयोग कर सकते हैं. आप द्वारा दी दो आँखों से दो व्यक्तियों को रोशनी मिलती हैं. क्या आप किन्ही दो व्यक्तियों को रोशनी देना चाहेंगे? नेत्रदान आप करें और दूसरों को भी प्रेरित करें क्या है आपकी नेत्रदान पर विचारधारा?
यह टी.आर.पी जो संस्थाएं तय करती हैं, वे उन्हीं व्यावसायिक घरानों के दिमाग की उपज हैं. जो प्रत्यक्ष तौर पर मनुष्य का शोषण करती हैं. इस लिहाज से टी.वी. चैनल भी परोक्ष रूप से जनता के शोषण के हथियार हैं, वैसे ही जैसे ज्यादातर बड़े अखबार. ये प्रसार माध्यम हैं जो विकृत होकर कंपनियों और रसूखवाले लोगों की गतिविधियों को समाचार बनाकर परोस रहे हैं.? कोशिश करें-तब ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है क्या है आपकी विचारधारा?

एक टिप्पणी भेजें

आपकी टिप्पणियां हमारी अमूल्य धरोहर है। कृपया अपनी टिप्पणियां देकर हमें कृतार्थ करें ।

Blogger Tips And Tricks|Latest Tips For Bloggers Free Backlinks

Deals of the Day

Related Posts with Thumbnails

लिखिए अपनी भाषा में

 

ताजा पोस्ट:

लेबल

कहानी उपन्यास कविता धार्मिक इतिहास प्रेमचंद जीवनी विज्ञान सेहत हास्य-व्यंग्य शरत चन्द्र तिलिस्म बाल-साहित्य ज्योतिष मोपांसा देवकीनंदन खत्री पुराण बंकिम चन्द्र वीडियो हरिवंश राय बच्चन अनुवाद देशभक्ति प्रेरक यात्रा-वृतांत दिनकर यशपाल विवेकानंद ओ. हेनरी कहावतें धरमवीर भारती नन्दलाल भारती ओशो किशोरीलाल गोस्वामी कुमार विश्वास जयशंकर प्रसाद महादेवी वर्मा संस्मरण अमृता प्रीतम जवाहरलाल नेहरु पी.एन. ओक रहीम रांगेय राघव वृन्दावनलाल वर्मा हरिशंकर परसाई अज्ञेय इलाचंद्र जोशी कृशन चंदर गुरुदत्त चतुरसेन जैन भारतेन्दु हरिश्चन्द्र मन्नू भंडारी मोहन राकेश रबिन्द्रनाथ टैगोर राही मासूम रजा राहुल सांकृत्यायन शरद जोशी सुमित्रानंदन पन्त असग़र वजाहत उपेन्द्र नाथ अश्क कालिदास खलील जिब्रान चन्द्रधर शर्मा गुलेरी तसलीमा नसरीन फणीश्वर नाथ रेणु

ताजा टिप्पणियां:

अपनी हिंदी - Free Hindi Books | Novel | Hindi Kahani | PDF | Stories | Ebooks | Literature Copyright © 2009-10. A Premium Source for Free Hindi Books

;