वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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सोमवार, 17 जनवरी 2011

महाराणा प्रताप - जीवनी (1923)


आप सभी के लिए प्रस्तुत है वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जीवनी । इसे पंडित नन्द कुमार देव शर्मा ने १९२३ में लिखा था ।

महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया है।
महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास में वीरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान के पर्याय हैं। वे एक कठिन और उथल-पुथल भरे कालखण्ड में पैदा हुए थे, जब मुगलों की सत्ता समूचे भारत पर छाई हुई थी और मुगल सम्राट अकबर अपनी विशिष्ट कार्य शैली के कारण ‘महान’ कहा जा सकता है।

लेकिन महाराणा प्रताप उसकी ‘महानता’ के पीछे छिपी उसकी साम्राज्यवादी आकांक्षा के विरुद्ध थे, इसलिए उन्होंने उसकी अधीनता स्वीकार नहीं की। परिणामस्वरूप अकबर उसके विरुद्ध युद्ध में उतरा। इस प्रक्रिया में महाराणा प्रताप ने जिस वीरता, स्वाभिमान और त्यागमय जीवन को वरण किया, उसी ने उन्हें एक महान लोकनायक और वीर पुरुष के रूप में सदा-सदा के लिए भारतीय इतिहास में प्रतिष्ठित कर दिया है।


महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। हन्होंने कई वर्षों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। इनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जीवत कँवर के घर हुआ था। १५७६ के हल्दीघाटी युद्ध में २०,००० राजपूतों को साथ लेकर राणा प्रताप ने मुगल सरदार राजा मानसिंह के ८०,००० की सेना का सामना किया। शत्रु सेना से घिर चुके महाराणा प्रताप को शक्ति सिंह ने बचाया। उनके प्रिय अश्व चेतक की भी मृत्यु हुई। यह युद्ध तो केवल एक दिन चला परन्तु इसमें १७,००० लोग मारे गएँ। मेवाड़ को जीतने के लिये अकबर ने सभी प्रयास किये। महाराणा की हालत दिन-प्रतिदिन चिंतीत हुइ। २५,००० राजपूतों को १२ साल तक चले उतना अनुदान देकर भामा शा भी अमर हुआ।

लोक में रहेंगे परलोक हु ल्हेंगे तोहू,

पत्ता भूली हेंगे कहा चेतक की चाकरी ||

में तो अधीन सब भांति सो तुम्हारे सदा एकलिंग,

तापे कहा फेर जयमत हवे नागारो दे ||

करनो तू चाहे कछु और नुकसान कर ,

धर्मराज ! मेरे घर एतो मत धारो दे ||

दीन होई बोलत हूँ पीछो जीयदान देहूं ,

करुना निधान नाथ ! अबके तो टारो दे ||

बार बार कहत प्रताप मेरे चेतक को ,

एरे करतार ! एक बार तो उधारो||






फाइल का आकार: 10 Mb



डाउनलोड लिंक:




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9 टिप्पणियां:

Akshay kumar ojha on 17/1/11 5:41 pm ने कहा…

बहुत ही सुन्दर भेट है आपकी शुक्रिया :)

gss on 22/3/12 12:05 pm ने कहा…

Dear Sir,

It is not possible to download महाराणा प्रताप - जीवनी (1923) since your system is asking me down load some software first instead of downloading the book which could be risky for my computer. Previously I was able to download books by megaupload which was very easy.

G.S.SENGAR, gssengar@gmail.com

कुन्नू सिंह on 30/8/12 1:04 pm ने कहा…

GSS ji,

कहां कुछ साफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कह रहा है?

अगर कोई Advertisement आ रहा है तो पहले आप SKIP Add पर चटका लगाएं फिर Free वाला लिंक 60 second मे आ जाएगा और आप उसको डान्लोड कर सकते हैं

udaan on 19/9/12 11:45 am ने कहा…

shri man lekhak ji maharana pratap ka janm kumbhalgarh main nahi kolyari gaon main hua tha

Ajeet Soni on 24/7/13 2:59 pm ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Gajander solanki usmapur on 28/7/13 11:36 am ने कहा…

Bahut he sundr tepni hain

Sushil Kumawat on 9/8/13 9:55 pm ने कहा…

DEAR LEKHAK JI MAHARANA PRATAP KI MATA KA NAME JAIWANTA BAI THA

navnit kumar on 16/8/13 1:28 pm ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
somesh kumar on 28/8/13 8:32 am ने कहा…

Hi I am not able to download the pdf it is giving a html page instead of pdf. please put this file on mediafire upload site.Thanks,

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