वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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'भूदानआन्दोलन'के द्वारा भारतीय समाज की दशा और दिशा बदल देने वाले आचार्य विनोबा भावे के बारे में यह पुस्तक हमें बहुत सी जानकारियां देती है।
आचार्य विनोबा भावे (11 सितेम्बर, 1895 - 15 नवंबर, 1982) के जन्म का नाम विनायक नरहरी भावे था। उनका जन्म गागोडे, महाराष्ट्र मे हुआ था। उन्हे भारत का राष्ट्रीय आध्यापक और महात्मा गांधी का आध्यातमिक उत्तराधीकारी समझा जाता है। उन्होने अपने जीवन के आखरी वर्ष पुनार, महाराष्ट्र के आश्रम मे गुजारे। इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल को अनुशासन पर्व कहने के कारण वे वि्वाद मे भी थे।
Author: Admin
| Posted at: 11:32 am |
Filed Under: बाल-साहित्य,
विज्ञान
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'अंगूठेकीछाप' एक बहुत ही उपयोगी पुस्तक है। इसमें अंगूठे की छाप से विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ बनाना सिखाया गया है। आप खुद भी सीखें और अपने बच्चों को भी सिखाएं ।
कुमार विश्वास हिंदी के जाने-माने कवि है। इन्ही की एक और कविता कविता "पगली लड़की" यहाँ पेश है।
डॉ कुमार विश्वास जो अपनी वाक्-पटुता, विद्वता, और समय-अवसर पर अपनी विराट स्मरण-शक्ति के प्रयोग के कारण कवि-सम्मेलनों में काफी लोकप्रिय है।आई.आई.टी और कॉरपरेट-जगत के सचेत श्रोता हों अथवा कोटा-मेले में बेतरतीब फैला लाखों का जन समूह , प्रत्येक मंच को अपने संचालन से डॉ कुमार विश्वास इस तरह लयबद्ध कर देते हैं कि पूरा समारोह अपनी संपूर्णता को जीने लगता है।
श्रोताओं को अपने जादुई सम्मोहन में लेने का उनका यही अदभुत कौशल, उन्हें समकालीन हिन्दी कवि-सम्मेलनों का सबसे दुलारा कवि बनाता है। स्व० धर्मवीर भारती ने उन्हें हिन्दी की युवतम पीढ़ी का सर्वाधिक संभावनाशील गीतकार कहा था। महाकवि नीरज जी उनके संचालन को निशा नियामक कहते हैं और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार वे इस पीढ़ी के एकमात्र ISO 2006 कवि हैं ।
ये कविता आपको कैसी लगी? कृपया अपनी टिप्पणियां अवश्य दें।
कुमार विश्वास हिंदी के जाने-माने कवि है। इन्ही की कविता "कोई दीवाना कहता है" का वीडियो यहाँ पेश है।
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'अपनापानीअपनाजीवन ' पुस्तक में पानी के बारे में अच्छी जानकारी दी गयी है। पुस्तक में बताया गया है कि जल-चक्र क्या है, जल को सुरक्षित कैसे रखें, पानी को साफ़ कैसे रखें, पानी से कौनसे रोग होते है, जल-प्रबंधन क्या है । इत्यादि जानकारियां इस पुस्तक में दी गयी है। अवश्य पढ़ें।
'हिंदीआलोचना: अतीतऔरवर्तमान" पुस्तक में हिंदी साहित्य की आलोचनात्मक पद्धति के २ युगों की तुलना की गयी है। यह पुस्तक हिंदी भाषा के अनुभवी साहित्यकार श्री प्रभाकर माचवे के व्याख्यानों पर आधारित है।
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| Posted at: 11:57 am |
Filed Under: कविता,
जयशंकर प्रसाद
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जयशंकरप्रसादकी 'कामायनी' को हिंदी-साहित्य की सर्वोत्तम रचना माना जाता है। कामायनी हिंदी के महानतम महाकाव्यों में से है । 'कामायनी ' इनकी श्रेष्ठ कृति और हिंदी का गौरव ग्रंथ है। दार्शनिक पृष्ठभूमि पर लिखा यह प्रबंध-काव्य छायावादी कविता की सर्वोच्च उपलब्धि है।
जिस समय खड़ी बोली और आधुनिक हिन्दी साहित्य किशोरावस्था में पदार्पण कर रहे थे। काशी के ‘सुंघनी साहु’ के प्रसिद्ध घराने में श्री जयशंकर प्रसाद का संवत् 1946 में जन्म हुआ। व्यापार में कुशल और साहित्य सेवी – आपके पिता श्री देवी प्रसाद पर लक्ष्मी की कृपा थी। इस तरह का प्रसाद का पालन पोषण लक्ष्मी औऱ सरस्वती के कृपापात्र घराने में हुआ। प्रसाद जी का बचपन अत्यन्त सुख के साथ व्यतीत हुआ। आपने अपनी माता के साथ अनेक तीर्थों की यात्राएँ की।
पिता और माता के दिवंगत होने पर प्रसाद जी को अपनी कॉलेज की पढ़ाई रोक देनी पड़ी और घर पर ही बड़े भाई श्री शम्भुरत्न द्वारा पढ़ाई की व्यवस्था की गई। आपकी सत्रह वर्ष की आयु में ही बड़े भाई का भी स्वर्गवास हो गया। फिर प्रसाद जी ने पारिवारिक क्षण मुक्ति के लिए सम्पत्ति का कुछ भाग बेचा। इस प्रकार आर्थिक सम्पन्नता और कठिनता के किनारों में झूलता प्रसाद का लेखकीय व्यक्तित्व समृद्धि पाता गया। संवत् 1984 में आपने पार्थिव शरीर त्यागकर परलोक गमन किया।
Author: Admin
| Posted at: 8:00 am |
Filed Under: कविता,
कुमार विकल
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'एक छोटी-सी लड़ाई' प्रसिद्ध कवि कुमार विकल का कविता-संग्रह है।
कुमार विकल ने बहुत कम लिख कर बड़ा नाम कमाया। बेशक उनकी काव्य-यात्रा ज्यादा लंबी नहीं थी। बीस सालों में उनके महज तीन संग्रह आए और बेहद ज्यादा चर्चित रहे। 'एक छोटी-सी लड़ाई' (१९८०), 'रंग खतरे में हैं' (१९८२) और 'निरुपमा दत्त मैं बहुत उदास हूं' (१९९३) आदि की कविताओं से जनवादी कविता का नया मुहावरा शुरू होता है। बेवजह ही उनकी कविताओं को अंधेरे के खिलाफ सशक्त चीख की कविताएं नहीं बताया जाता।
तेइस फरवरी, १९९७ को वह मौत को हासिल हो गए, लेकिन उनकी कविताएं जिंदा हैं। उनकी आखिरी कविताओं में से एक कविता 'मृत्यु-द्वार' है :
दुनिया की सबसे खूबसूरत/ औरत के बाद/ यदि कोई खूबसूरत चीज है/ वह है केवल मृत्यु/ मृत्यु जो हमें/ परियों के संसार में ले जाती है/ तरह-तरह के जादूगरों से मिलाती है/ जादूगरों का वह संसार/ अद्भुत होता है/ वहां आदमी/ किसी वक्त भी मर सकता है/ और दोबारा जी भी सकता है/ मैं उस जादूगर की तलाश में हूं/ जो मुझे सिर्फ मृत्यु-द्वार तक ले जाए/ और फिर वापस ले आए/ जहां दुनिया की सबसे खूबसूरत/ औरत/ मेरा इंतजार कर रही हो।
यूँ उजालों से वास्ता रखना शम्मा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर चाहे जैसी हो इस में रोने की जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना
मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो मिलने-जुलने का हौसला रखना
निदा फ़ाज़ली हिन्दी और उर्दू के मशहूर शायर हैं। वो छोटी उम्र से ही लिखने लगे थे। निदा फ़ाज़ली इनका लेखन का नाम है। निदा का अर्थ है स्वर/ आवाज़/ Voice। फ़ाज़िला क़श्मीर के एक इलाके का नाम है जहाँ से निदा के पुरखे आकर दिल्ली में बस गए थे, इसलिए उन्होंने अपने उपनाम में फ़ाज़ली जोड़ा।
इन्होने शायरी के अलावा गद्य भी लिखा है । इनके संस्मरण कि एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी - तमाशामेरेआगे। इसी का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है।
फणीश्वर नाथ रेणु(४ मार्च, 1921 - ११ अप्रैल, 1977) एक हिन्दी साहित्यकार थे । इन्होंने प्रेमचंद के बाद के काल में हिन्दी में श्रेष्ठतम गद्य रचनाएं कीं । इनके पहले उपन्यास मैला आंचल को बहुत ख्याति मिली थी जिसके लिए उन्हे पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।
'इसजलप्रलयमें' फणीश्वर नाथ रेणु का रिपोर्ताज है जिसमे पटना शहर में आई बाढ़ का दिलचस्प वर्णन किया गया है।
'प्रेमचंदकीमशहूरकहानियां' एक कहानी-संग्रह है जिसमे मुंशी प्रेमचंद की मशहूर कहानियां दी गयी है।
प्रेमचंद आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाते हैं। यों तो उनके साहित्यिक जीवन का आरंभ १९०१ से हो चुका था पर उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर अंक में १९१५ में सौत नाम से प्रकाशित हुई और १९३६ में अंतिम कहानी कफन नाम से। बीस वर्षों की इस अवधि में उनकी कहानियों के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। उनसे पहले हिंदी में काल्पनिक, एय्यारी और पौराणिक धार्मिक रचनाएं ही की जाती थी। प्रेमचंद ने हिंदी में यथार्थवाद की शुरूआत की।
'अपनी हिंदी' के पाठकों के लिए एक ख़ास पेशकश है मन्नूभंडारीकाअमरउपन्यास - "महाभोज" ।
मन्नू भंडारी (जन्म ३ अप्रैल १९३१) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। मन्नू भंडारी ने कहानियां और उपन्यास दोनों लिखे हैं। विवाह विच्छेद की त्रासदी में पिस रहे एक बच्चे को केंद्र में रखकर लिखा गया उनका उपन्यास `आपका बंटी' (१९७१) हिन्दी के सफलतम उपन्यासों में गिना जाता है। मन्नू भंडारी हिन्दी की लोकप्रिय कथाकारों में से हैं। नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के बीच आम आदमी की पीड़ा और दर्द की गहराई को उद्घाटित करने वाला उनका उपन्यास `महाभोज' (१९७९) अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था।
निशा निमंत्रण हरिवंशराय बच्चन के गीतों का संकलन है जिसका प्रकाशन १९३८ ई० में हुआ। ये गीत १३-१३ पंक्तियों के हैं जो कि हिन्दी साहित्य की श्रेष्ठतम उपलब्धियों में से हें।
ये गीत शैली और गठन की दृष्टि से अतुलनीय है। नितान्त एकाकीपन की स्थिति में लिखी गईं ये त्रयोदशपदियाँ अनुभूति की दृष्टि से वैसी ही सघन हैं जैसी भाषा शिल्प की दृष्टि से परिष्कृत। संकलन के सभी गीत स्वतंत्र हैं फिर भी प्रत्येक की रचना का गठन एक मूल भाव से अनुशासित है। पहला गीत "दिन जल्दी जल्दी ढलता है" से प्रारम्भ होकर "निशा निमंत्रण" रात्रि की निस्तब्धता के बड़े सघन चित्र करता हुआ प्रातःकालीन प्रकअश में समाप्त होता है। प्रत्येक दृष्टि से निशा निमंत्रण के गीत उच्चकोटि के हैं और बच्चन का कवि अपने चरम पर पहुँच गया प्रतीत होता है।
Author: Admin
| Posted at: 7:16 am |
Filed Under: उपन्यास,
शरत चन्द्र
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'अन्धकारमेंआलोक' शरत चन्द्र का एक छोटा उपन्यास है जिसमे एक युवक के प्रेम को चित्रित किया गया है।
शरत चन्द्र हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार रहे है। इनके 'देवदास' उपन्यास पर कई फिल्में भी बन चुकी है।
शरत के उपन्यासों के कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। कहा जाता है कि उनके पुरुष पात्रों से उनकी नायिकाएँ अधिक बलिष्ठ हैं। शरत्चंद्र की जनप्रियता उनकी कलात्मक रचना और नपे तुले शब्दों या जीवन से ओतप्रोत घटनावलियों के कारण नहीं है बल्कि उनके उपन्यासों में नारी जिस प्रकार परंपरागत बंधनों से छटपटाती दृष्टिगोचर होती है, जिस प्रकार पुरुष और स्त्री के संबंधों को एक नए आधार पर स्थापित करने के लिए पक्ष प्रस्तुत किया गया है, उसी से शरत् को जनप्रियता मिली।
'आखरीदाँव' - भगवतीचरण वर्मा का एक मशहूर उपन्यास है।
30 अगस्त 1903 को उन्नाव के शफीपुर गांव में जन्मे भगवती चरण वर्मा ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत कविता से की थी लेकिन उन्हें ख्याति बतौर उपन्यासकार मिली। साहित्य अकादमी सहित कई पुरस्कारों के अलावा उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया और उन्हें राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया।
आधुनिक हिन्दी उपन्यासकारों में भगवती चरण वर्मा का एक खास मुकाम है क्योंकि उनकी कृतियों में रोचकता का तत्व सर्वोपरि रहता है तथा आज भी 'चित्रलेखा', 'रेखा' और 'भूले-बिसरे चित्र' जैसी उनकी रचनाएं काफी चाव से पढी जाती हैं।
वर्मा जी ने अपने दौर में ऐसे विषयों पर कलम चलाई जिन पर लिखना उस समय बेहद साहस का काम समझा जाता था । इस मामले में उनकी कृति 'चित्रलेखा' और 'रेखा' की मिसाल दी जाती है। वर्मा जी की एक अन्य विशेषता यह थी कि उनके उपन्यासों के कथाशिल्प के अनुसार उनकी वर्णनशैली भी बदलती रहती थी। उनकी कई रचनाएं तो हिंदी में सर्वाधिक पढी जाने जाने वाली पुस्तकों में शामिल है।
रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम आयु लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए।
इनकी कहानी 'धर्मयुद्ध' एक भावना प्रधान कहानी है। अवश्य पढ़ें।
'दूसरा देवदास' ममताकालियाकीएकप्रसिद्धकहानीहै । यह कहानी प्रेम और रूमानियत का अनोखा उदहारण है। नायक संभव और नायिका पारो के हृदय में प्रेम बड़ी अजीब परिस्थितियों में उत्पन्न होता है। कथ्य, विषयवस्तु, भाषा और शिल्प की दृष्टि से कहानी बेजोड़ है।
ममता कालिया की रचनाओं में उनके कहानी संग्रह 'उसका यौवन', 'छुटकारा', 'जाँच अभी जारी है', 'चर्चित कहानियाँ' और 'प्रतिदिन' उल्लेखनीय हैं। उनके प्रमुख उपन्यास हैं- 'नरक दर नरक', 'बेघर', 'प्रेम कहानी' और 'एक पत्नी के नोट्स।' ममता कालिया को इससे पहले 'कहानी' पत्रिका (सरस्वती प्रेस) सम्मान, उ० प्र० हिंदी संस्थान का यशपाल सम्मान तथा अभिनव-भारती (कलकत्ता) का रचना सम्मान मिल चुके हैं।
'आधुनिकहवाईअड्डे' एक उपयोगी पुस्तक है । 240 पृष्ठों की इस पुस्तक में हवाई अड्डों के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गयी है तथा विश्व के आधुनिक हवाई अड्डों के बारे में भी बताया गया है ।
अमरकांत नयी कहानी आन्दोलन के एक प्रमुख कहानीकार है। उन्होंने अपनी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण किया है। उनकी शैली सहज और भाषा में नवीनता है।
दोपहर का भोजन एक गरीबी से जूझ रहे एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है। मुंशीजी के पुरे परिवार का संघर्ष भावी उमीदों पर टिका हुआ है । सिद्धेश्वरी गरीबी के अहसास को मुखर नहीं होने देती और उसकी आंच से अपने परिवार को बचाए रखती है ।
फाइल का आकार: 400 Kb
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अल्बर्टआइन्स्टीनएक सर्वकालिक महान वैज्ञानिक रहे है। यह पुस्तक उन्ही के ऊपर लिखी गयी है। इस पुस्तक में उनके बारे में दिलचस्प जानकारियां दी गयी है।
अल्बर्ट आइंस्टीन (14 मार्च 1879-18 अप्रैल, 1955) एक सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानीक, दार्शनिक और लेखक थे. उन्हे व्यापक रूप से सबसे अधिक प्रभावशाली और सबसे अच्छा ज्ञात वैज्ञानिक और सभी समय के बुद्धिजीवियों के रूप में माना जाता है. उन्हे अक्सर आधुनिक भौतिकी का पिता माना जाता है. उसे फोटोवेलेक्ट्रिक प्रभाव की व्यवस्था की खोज के लिए भौतिकी में 1921 नोबेल पुरस्कार प्राप्त है. आइंस्टीन ने भौतिक विज्ञान में अनेक योगदान दिए जिसमें सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांतों को स्थापित करना, गुरुत्व द्वारा प्रकाश के विक्षेपन की कल्पना करना और बोस आइंस्टीन संघनन की भविष्यवाणी करना शामिल है.
टॉर्च बेचने वाले - हरिशंकर परसाई कीएकव्यंग्यरचनाहैजोपाठकोंकेमनकोगुदगुदातीहै और सामाजिक सरोकारों पर चोट करती है।
हरिशंकर परसाई (२२ अगस्त, १९२२ - १० अगस्त, १९९५) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार थे। उनका जन्म जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ था। वेहिंदीकेपहलेरचनाकारहैंजिन्होंनेव्यंग्यकोविधाकादर्जादिलायाऔरउसेहल्के–फुल्केमनोरंजनकीपरंपरागतपरिधिसेउबारकरसमाजकेव्यापकप्रश्नोंसेजोड़ा।
उनकी व्यंग्य रचनाएँ हमारे मन में गुदगुदी ही पैदा नहीं करतीं बल्कि हमें उन सामाजिक वास्तविकताओं के आमने–सामने खड़ा करती है, जिनसे किसी भी व्यक्ति का अलग रह पाना लगभग असंभव है। लगातार खोखली होती जा रही हमारी सामाजिक और राजनॅतिक व्यवस्था में पिसते मध्यमवर्गीय मन की सच्चाइयों को उन्होंने बहुत ही निकटता से पकड़ा है। सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी जीवन–मूल्यों की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने सदैव विवेक और विज्ञान–सम्मत दृष्टि को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। उनकीभाषा–शैलीमेंखासकिस्मकाअपनापाहै, जिससेपाठकयहमहसूसकरताहैकिलेखकउसकेसामनेहीबैठाहै।