वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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रविवार, 28 नवंबर 2010

हिंदी सूक्तियां (संग्रह)


प्रस्तुत पुस्तक में प्रेरणादायक हिंदी सूक्तियों का संग्रह दिया गया है। इनका संग्रह अनुनाद द्वारा किया गया है.

"अच्‍छा वक्‍ता बनना है तो अच्‍छे श्रोता बनो, अच्‍छा लेखक बनना है तो अच्‍छे पाठक बनो, अच्‍छा गुरू बनना है तो अच्‍छे शिष्‍य बनो, अच्‍छा राजा बनना है तो अच्‍छा नागरिक बनो अच्‍छा स्‍वामी बनना है तो अच्‍छे नौकर बनो" - संकलित

अवश्य पढ़े।





फाइल का आकार: ७ Mb


डाउनलोड लिंक:
कृपया यहाँ क्लिक करें




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7 टिप्पणियां:

प्रवीण पाण्डेय on 28/11/10 11:27 am ने कहा…

धन्यवाद आपका।

बेनामी ने कहा…

Thanks to all the concerned people of this website whose sincere efforts to bring quality hindi articles & books to their readers can go a long way to make our hindi language reach its highest position globally......

Vijay on 3/9/11 7:38 am ने कहा…

muje apne jivan me is web site ko dekar bada aschrya hua k aaj b bade dilwale manushya jivit h jo gyan ki mahta ko samgte h or dusro ke jivan ko siresth banane ko praytanrat h

I love veeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeerrrrrrrrrrryyyyyyyyyyy much it.

Dinesh Nayal on 19/2/12 9:32 pm ने कहा…

बहुत अच्छे!!
'' चिल्‍ला कर और झल्‍ला कर बातें करना, बिना सलाह मांगे सलाह देना, किसी की मजबूरी में अपनी अहमियत दर्शाना और सिद्ध करना!......
ये कार्य दुनियां का सबसे कमजोर और असहाय व्‍यक्ति करता है, जो खुद को ताकतवर समझता हैऔर जीवन भर बेवकूफ बनता है,
घृणा का पात्र बन कर दर दर की ठोकरें खाता है । ''
शुभ रात्रि मित्रों मीठे स्वप्न स्वर्ग दूतों के साथ !!
(^_^) (^_^)

Dinesh Nayal on 19/2/12 9:34 pm ने कहा…

'' चिल्‍ला कर और झल्‍ला कर बातें करना, बिना सलाह मांगे सलाह देना, किसी की मजबूरी में अपनी अहमियत दर्शाना और सिद्ध करना!......
ये कार्य दुनियां का सबसे कमजोर और असहाय व्‍यक्ति करता है, जो खुद को ताकतवर समझता हैऔर जीवन भर बेवकूफ बनता है,
घृणा का पात्र बन कर दर दर की ठोकरें खाता है । ''
शुभ रात्रि मित्रों मीठे स्वप्न स्वर्ग दूतों के साथ !!
(^_^) (^_^)

Er.K.K.Choudhary on 18/9/12 6:35 pm ने कहा…

Dear sir is book ki link nahi please link dal dijiye

Rajesh_verma on 29/9/12 8:14 pm ने कहा…

मल्टीअपलोड साईट पर हिंदी सूक्तियां संग्रह का लिंक नहीं है. कृपया इस पुस्तक को डाउनलोड करने के लिए नया लिंक प्रदान करें. आपकी यह साईट हम हिंदी साहित्य के पाठको के लिए अनुपम भेंट हैं. आपका प्रयास सराहनीय हैं तथा हम पाठक आपको इस के लिए शुभकामना देते हैं . धन्यवाद

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