वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

क्रिश्चयनिटी कृष्ण-नीति है





आज 'अपनी हिंदी' में प्रस्तुत है श्री पी. एन. ओक की पुस्तक - "क्रिश्चयनिटी कृष्ण-नीति है"



पुरुषोत्तम नागेश ओक, (2 मार्च,1917-7 दिसंबर,2007), जिन्हें लघुनाम श्री०पी. एन.ओक ने नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध भारतीय इतिहास लेखक थे।


उन्हीं की एक पुस्तक में दिये उनके परिचय के अनुसार, श्री ओक का जन्म इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के सम्य उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी में प्रविष्टि ली, जिसके द्वारा इन्होंने जापानियों के संग अंग्रेज़ों से लड़ाई की थी। इन्होंने कला में स्नातकोत्तर (एम.ए.) एवं विधि स्नातक (एल.एल.बी.) की डिग्री मुंबई विश्वविद्यालय से ली थीं। सन 1947 से 1953 तक ये हिंदुस्तान टाइम्स एवं द स्टेट्स्मैन समाचार पत्रों के रिपोर्टर रहे। १९५३-१९५७ तक इन्होंने भारतीय केन्द्रीय रेडियो एवं जन मंत्रालय में कार्य किया। 1959 से 1957 तक इन्होंने भारत में अमरीकी दूतावास में कार्य किया।


फाइल का आकार: २० Mb



डाउनलोड लिंक:
कृपया यहाँ क्लिक करें





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12 टिप्पणियां:

प्रवीण पाण्डेय on 5/11/10 12:16 pm ने कहा…

बहुत धन्यवाद, अब पढ़ते हैं बैठकर।

Kamal on 5/11/10 8:51 pm ने कहा…

धन्यवाद्, मै इस पुस्तक का बेताबी से इंतजार का रहा था

कुमार on 5/11/10 10:35 pm ने कहा…

Dear apnihindi moderator,

I have been following the website since a long time. I appreciate your effort and get benefited day by day.

I request u to remove the 'विवादास्पद / vivadaspad' word from the book titled'पी.एन. ओक की विवादास्पद पुस्तक - 'ताजमहल मंदिर भवन है'' rather u can use the word' सूचनापरक / soochna parak'.

I want to submit a book by P N Oak titled 'विश्व इतिहास के विलुप्त अध्याय'aka Some Missing Chapters of World History (http://www.scribd.com/doc/31193563/Vishwa-Itihaas-Ke-Vilupt-Adhyay-aka-Some-Missing-Chapters-of-World-History-PN-Oak-01).
plz follow the link and u can download it.

If there is any problem plz tell me.

बेनामी ने कहा…

ऐसे तो इसलाम ईश राम हो शायद.

बेनामी ने कहा…

apko bahut sadhuvad is pustak ko uplabdh karane ke liye

Admin on 27/12/10 9:19 pm ने कहा…

कृपया ध्यान दे:

एक ही प्रकार की टिप्पणी को बार-बार पोस्ट करना SPAM कहलाता है जो की गैरकानूनी है . इसके लिए सखत सजा का प्रावधान है.

हर टिप्पणीकार का IP Address हमारे सर्वर द्वारा रिकॉर्ड किया जाता है.

इसलिए सभी पाठकों से निवेदन है की SPAM कमेंट्स न करें वेरना आपके विरुद्ध आवश्यक कार्यवाही की जाएगी.

Admin on 27/12/10 9:33 pm ने कहा…

इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी पुस्तकों के लिंक इन्टरनेट से ल्लिये गयें है . 'अपनी हिंदी' इन सभी लिंक का एक संकलन मात्र है .

हम अपने सर्वर पर कोई भी डाटा स्टोर नहीं करते है. बल्कि इन्टरनेट पर पहले से उपलब्ध लिंक ही अपने पाठकों को उपलब्ध करवाते है जो की ग़ैरक़ानूनी नहीं है.

अगर किसी भी व्यक्ति को इन पुस्तकों के इन्टरनेट पर उपलब्ध होने से परेशानी है तो उन वेबसाइट से सम्पर्क कर सकते है जहाँ से ये पुस्तकें डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. या फिर आप गूगल पर कानूनी कार्यवाही कर सकते है क्योंकि गूगल भी इसी परकार से लिंक उपलब्ध करवाता है. मगर पहले अपने विधि विशेषज्ञ से अवश्य सलाह ले लें. .

रही बात पुस्तक खरीदने की तो इसमें हम भी लेखकों के साथ है. हमारा सभी पाठकों से अनुरोध है की अगर कोई भी पुस्तक आपको पसंद आती है तो इन पुस्तकों को खरीदकर पढ़े जिससे लेखकों और प्रकाशकों की कुछ सहायता हो सके.

अगर किसी भी पुस्तक का कॉपीराइट आपके नाम पर है और आप उसे यहाँ पर नहीं देखना चाहते है तो कृपया हमारे ई-मेल एड्रेस apnihindi (at) gmail (dot) com पर आवश्यक सबूतों के साथ हमसे संपर्क कर सकते है। कृपया ई-मेल के Subject में copyright अवश्य लिखें। आपकी शिकायत सही पाई जाने पर ३० कार्य-दिवसों के भीतर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

-Administrator

gaurav ने कहा…

Is hindi pustako ke sagar ko pakar mai bahut khus hoonn....administrator ji mai ek bat kahna chahunga...maine aksar dekha hai ki aaj ki nai pidhi angreji upanyaas adhik padhti hai,hindi nahi....hum ye kahte bhi hai ki log Hindi saahitya se durr ja rahe hai....par mujhe lagta hai ki hum Hindi se door nahi balki angreeji hamare adhik karib aa raha hai....matlab ye ki agar hum kisi vyakti se kisi hindi lekhak ya kitab ka naam puche to hume Premchand ji( kitab me Goodan) ke alaw bahut kam hi naam sunne ko milte hai.... karan.....jo 1 karan mujhe kuch logo se pata chala aur jo maine b mahsus kiya ki hindi ki kitabo ka ADHIK MULYA hona....jaha aajkal angreeji ki bahut chalne wale (chetan bhagat etc)k upanayaas 99 rupaye me uplabdhya hai wahi Hindi ki acchi ktabo k liye mujhe sochna pad jata hai... premchandji ki kitabe bahut kam moolya pe har jagah mil jati hai.....
to mai yahi kahna chahta hoon ki gar Hindi ki kitabo ka moolaya b kam ho to fir iski bikri bhi apne aap jada ho jayegi.....waise aapka in kitabo ke sagar k liye dhanyavaad.....

gaurav ने कहा…

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Atul on 23/4/12 3:08 pm ने कहा…

कृपया LINK सही करे डाउनलोड करने में परेशानी हो रही है

yogendra pandey ने कहा…

hindi ke atulniye athah saagar ki kuch boondien bhi agar main paa sakoon to eh bade saubhagya ki baat hai.

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