वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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मंगलवार, 14 सितंबर 2010

डॉ. महेंद्र भटनागर की कविता - मातृभाषा

हिंदी दिवस के अवसर पर डॉ महेंद्र भटनागर ने हमें अपनी कविता 'मातृभाषा' भेजी है।

बहुत ही सुंदर कविता है। अवश्य पढ़ें।



डाउनलोड लिंक:
यहाँ क्लिक करें

2 टिप्पणियां:

गजेन्द्र सिंह on 14/9/10 7:06 pm ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
(प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

गजेन्द्र सिंह on 15/9/10 4:15 pm ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .......


मेरे ब्लॉग कि संभवतया अंतिम पोस्ट, अपनी राय जरुर दे :-
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html

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