वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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रविवार, 12 सितंबर 2010

श्री पी.एन. ओक की विवादास्पद पुस्तक - 'ताजमहल मंदिर भवन है'



श्री पी.एन. ओक अपनी विवादास्पद पुस्तक 'ताजमहल मंदिर भवन है' में 100 से भी अधिक प्रमाण एवं तर्क देकर दावा करते हैं कि ताजमहल वास्तव में शिव मंदिर है जिसका असली नाम तेजोमहालय है|

उन्होंने कहा है कि ताज किसी मुमताज की कब्रगाह नहीं बल्कि हिन्दुओं का देव स्थान " शिव मन्दिर" था। और इसका वास्तविक नाम तेजो महालय है। आपने छानबीन के दौरान उन्होंने ये जाना कि तेजो महालय , शाह जहाँ ने जयपुर के राजा जय सिन्ह से हड़प लिया था। ये तो अपने बादशाह-नामा में भी शाह जहाँ ने कबूला है कि एक बेहद खूबसूरत इमारत उन्होंने ली थी, मुमताज की कब्रगाह बनने के लिए।

श्री पी.एन. ओक के तर्कों और
प्रमाणों के समर्थन करने वाले छायाचित्रों का संकलन भी है



फाइल का आकार: 17 Mb


डाउनलोड लिंक :
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35 टिप्पणियां:

वन्दना on 12/9/10 1:20 pm ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति के प्रति मेरे भावों का समन्वय
कल (13/9/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

राजभाषा हिंदी on 13/9/10 8:28 am ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश कि शीघ्र उन्नत्ति के लिए आवश्यक है।

एक वचन लेना ही होगा!, राजभाषा हिन्दी पर संगीता स्वारूप की प्रस्तुति, पधारें

cmpershad on 13/9/10 3:11 pm ने कहा…

क्या इतिहास के पन्नों को बदला जाएगा ?

बेनामी ने कहा…

ITIHAS KA PUNRAVLOKAN,BAHUT SAHAJ NAHI HOTA HAI,GADI HUE VASTUE PAHLE DURGANDH FAILATI HAIN,
AAP AISA SOCHTE HAIN LEKIN ADHISANKHAYA LOG YAH NAHI SOCHTE KI PURANI ME SAMAY NA NASSHT KARKE KUCHH UPYOGI KIYA JAYE,MSLIM DHARM JINHONE APNI VYAKHAYA HI IS TARAH KARLI KI ATANKVADF HI UNKI PHCHAN BAN GAYI,YA WORK IS WORSHIP KE STHAN PAR ,WORSHIP IS ONLY WORK ,JABTAK DHARATI PAR RAHNE WALA HAR KAFIR ALLH ME VISHAS NALE AAYE(ISLAM SVIKAR NA KAR LE)TAB TAK JEHAD KARENGE.
MARNE DE UNHE HU AAP APNI GEN EX KO KYA DEKAR JAYENGE ISLAMI VYAVSTHA,IS PAR VICHAR KAREN ,KAMBALI NE ISAI DHARM SWIKA R KAR LIYA ,HUM ME SE BAHUT SE LOG HINDU DHARM ME APNE KO SURAKSHIT NAHI MANTE,APNE SAMAJ KOP KAISE MAJBOOT AUR SANGATHIT KAREN.
IS PAR DHYAN DEN.
AAPKA
ABHISEKSHUKLA@YAHOO.COM

ओशो रजनीश on 13/9/10 7:45 pm ने कहा…

बहुत ही बढ़िया लगी ओक साहब की ये पुस्तक , क्या इन की और साडी पुस्तके मिल सकती है , यदि हा तो जल्द उपलब्ध करवाए ....

बेनामी ने कहा…

kripya is tarah ke materials na publish kare jo vivaad paida kare..

parveen kumar snehi on 19/9/10 10:48 pm ने कहा…

is pustak me jaisa benami ji ne kahaa kuchh vivadaspad nahi lgta..
pustak shodhparak evm prabhavit karne vaali hai.. PN OAK ji ki sabhi pustke bahut hi khojbeen karke likhi gayi hain.. yadi sambhav ho to unki baaki pustke bhi uplabdh karayen... dhanyavaad aapka.. is anmol pustak ke liye...

बेनामी ने कहा…

विवाद कैसा बन्धु, इतना शोध करने के पश्चात हि ये सभि बाते लिखि गयि है, किसि और ने इसे गलत साबित नहि किया है, और एक बात हर चिज को विवादित बनाने से पहले उसकि जाच जरुर करानि चाहिये.

Raja babu on 21/9/10 7:11 pm ने कहा…

सन 2000 में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने श्री ओक की ताज को एक हिन्दू राजा ने निर्माण कराया था; को रद्द कर दिया, और साथ ही इन्हें झिड़की भि दी, कि उनके दिमाग में ताज के लिये कोई कीड़ा है।

सन 2005 में ऐसी ही एक याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा भी रद्द कर दी गयी, जिसमें अमरनाथ मिश्र, एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा यह दावा किया गया था, कि ताज को हिन्दू राजा परमार देव ने 1196]] में निर्माण कराया था।

डॉ. मनोज चतुर्वेदी on 23/10/10 2:42 pm ने कहा…

ताजमहल की वास्तविकता(एक ऐतिहासिक शोध)
पेशेवर इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता तथा भवनशास्त्रियों के दिमाग में ताज से जुड़े बहुत सारे कुतर्क और चतुराई से भरे झूठे तर्क या कम से कम भ्रामक विचार भरे हैं। शुरू से ही उनका विश्वास रहा है कि ताज पूरी तरह से मुस्लिम भवन है। उन्हें यह बताने पर कि ताज का कमलाकार होना, चार स्तंभों का होना आदि हिंदू लक्षण हैं, वे गुणवान लोग इस प्रकार से अपना पक्ष रखते हैं कि ताज को बनाने वाले कारीगर, कर्मचारी आदि हिंदू थे और शायद इसीलिये उन्होंने हिंदू शैली से उसे बनाया। पर उनका पक्ष गलत है क्योंकि मुस्लिम वृतान्त दावा करता है कि ताज के रूपांकक (designers) बनवाने वाले शासक मुस्लिम थे, और कारीगर, कर्मचारी इत्यादि लोग मुस्लिम तानाशाही के विरुद्ध अपनी मनमानी कर ही नहीं सकते थे।इस्‍लाम का मुख्‍य काम भारत को लूटना मात्र था, उन्‍होने तत्‍कालीन मन्दिरो अपना निशाना बनया। हिन्‍दू मंदिर उस समय अपने ऐश्वर्य के चरम पर रहे थे। इसी प्रकार आज का ताजमहल नाम से विख्‍यात तेजोमहाजय को भी अपना निशाना बनाया। मुस्लिम शासकों ने देश के हिंदू भवनों को मुस्लिम रूप देकर उन्हें बनवाने का श्रेय स्वयं ले लिया इस बात का ताज एक आदर्श उदारहरण है।

अब जब यह सवाल उठा ही दिया है तो बता दूं कि इस सवाल पर २००० में उच्चतम न्यायालय और २००५ में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जम कर बहस हो चुकी है तथा सभी पक्षों और विषय विशेषज्ञों को सुन कर माननीय न्यायालयों ने क्या कहा उसे यहाँ पर और यहाँ पर भी देख सकते हैं आप....
उद्धृत करता हूँ:-"On July 14 2000 the Supreme Court in New Delhi dismissed a petition that sought to force a declaration that a Hindu king built Taj Mahal, as P.N. Oak has claimed. The court reprimanded the petitioner saying he had a "bee in his bonnet" about the Taj.In 2005 a similar petition was dismissed by the Allahabad High Court. This case was brought by Amar Nath Mishra, a social worker and preacher who says that the Taj Mahal was built by the Hindu King Parmar Dev in 1196."

डॉ. मनोज चतुर्वेदी on 23/10/10 2:43 pm ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
ममता त्रिपाठी on 20/12/10 5:49 pm ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
बेनामी ने कहा…

वैधानिक चेतावनी---- आप इस प्रकार से 'श्री पुरुषोत्तम नागेश ओक' की पुस्तकों को अपनी 'वेबसाईट' के द्वारा नहीं बाँट सकते हैं | इस पुस्तक पर 'श्री पुरुषोत्तम नागेश ओक' के वारिसों का "कापीराईट" है और इस पुस्तक को छापने और बेचने का अधिकार ---- "हिन्दी साहित्य सदन, करौल बाग़, नई दिल्ली" के पास में है |

अत: आपको वैधानिक चेतावनी दी जाती है कि---- आप इस प्रकार से 'श्री पुरुषोत्तम नागेश ओक' की पुस्तकों को अपनी 'वेबसाईट' के द्वारा बाँटना तुरंत ही बन्द कर दें ----अन्यथा---- आपके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जायेगी |

बेनामी ने कहा…
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बेनामी ने कहा…
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बेनामी ने कहा…
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Admin on 27/12/10 9:15 pm ने कहा…

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Admin on 27/12/10 9:31 pm ने कहा…

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-Administrator

बेनामी ने कहा…

एक ही टिप्पणी को "कई-कई बार" इसलिये पोस्ट किया गया है क्योंकि------------- आप भी तो अपनी 'वेब साईट' के द्वारा एक ही लेखक की "कई-कई" पुस्तकों के लिन्क उपलब्ध करा रहे हैं -------- वह भी उस पुस्तक के लेखक या प्रकाशक की लिखित अनुमति लिये बिना |
फिर आप इस बात का भी ध्यान रखें कि---- एक ही टिप्पणी को एक ही जगह पर बार-बार पोस्ट नहीं किया गया है बल्कि---- जहाँ-जहाँ पर भी उस टिप्पणी को देने की अत्यन्त आवश्यकता प्रतीत हुई है, वहाँ-वहाँ पर ही उसको पोस्ट किया गया है | अस्तु,
आपने लिखा है कि-------------
अगर किसी भी पुस्तक का कॉपीराइट आपके नाम पर है और आप उसे यहाँ पर नहीं देखना चाहते है तो कृपया हमारे ई-मेल एड्रेस apnihindi (at) gmail (dot) com पर आवश्यक सबूतों के साथ हमसे संपर्क कर सकते है।
-----------------हम शीघ्र ही आपको इस सम्बन्ध में जानकारी भेज रहे हैं | आप इन पुस्तकों के लिन्कों को अपनी वेबसाईट से हटाने की व्यवस्था करके रखें |

अमित जैन (जोक्पीडिया ) on 7/1/11 11:56 pm ने कहा…

कमाल की किताब है , ओंकार जी ने तो हमऋ सोच ही बदल डी ,इस किताब को पढ़ने के बाद मै हर स्मारक को नए नजरिये से देखने लगा

बेनामी ने कहा…

sir ,
no doubt that p.n. oak was a great personalty but unfortunately his thinking was always rejected by some people .
but we admire him to bring realty before us .
we salute him ..

बेनामी ने कहा…

Tustikaran ki niti ne hame kahi ka nahi rakha.Aajadi ke nam par Desh ko lutne ki hod lagi hai. Esme desh ke bare me kaun sochata hai.Jaise hi kisi Neta ki Giraftari hoti hai,unhe heart attack ho jata hai aur wo nurshing home treatment ke bahane aaram farmate hai.Desh ka durbhagya hai ki jinka khud charecter thik nahi, unse charecter certificate lena padata hai.Jaha Prime Minister sareaam kahate hai mai majboor hu,waha kya apechha aap rakhte hai.Baki Bhagwan bharose aur kya.

Jai Hindu on 9/7/11 1:44 pm ने कहा…

Sir
Kya is thare ki aur bhi book aap provide karva sakte hai.
jankari bheje mere email par
vimalrathour.pbt@gmail.com

Jai Hindu on 9/7/11 1:49 pm ने कहा…

श्रीमान जी बहुत बहुत धन्यबाद किताब को उपलब्ध करबाने के लिए, यदि इस तरह की और भी किताबे हो तो किर्पया ज़रूर उपलब्ध करबे

Jai Hindu on 9/7/11 1:52 pm ने कहा…

श्रीमान Shri P N ऑक की और भी किताबे उपलब्ध करने का कष्ट करे,

Jai Hindu on 9/7/11 1:53 pm ने कहा…

श्रीमान Shri P N ऑक की और भी किताबे उपलब्ध करने का कष्ट करे,
ईमेल - vimalrathour.pbt@gmail.com

बेनामी ने कहा…

actual me baat ye hai ki taajmehal ki ginti saat ajoobo me hai. isliye govt. sachai se peeche hat rahi hai. varna sachai to itihas bayan kar he raha hai ki taaj mehal hindu mandir tha. ek na ek din jarur is mandir ko insaaf jarur milega. aman chaudhary india

Jai Hindu on 15/11/11 8:27 am ने कहा…

insaf yu hi nahi milta. Insaf lena padta hai.

Jai Hindu on 15/11/11 8:32 am ने कहा…

jhindu.blogspot.com

Hit Sharma on 22/3/12 2:41 pm ने कहा…

if any one have this book please send it to me or share its link bcoz Am unable to download it. it showing server not found error,,, while i click on skip add,,

my ID is- hks.pandit@gmail.com

RAVI SINGH on 27/4/12 1:34 am ने कहा…

agar kisi ke pass ye pustak hai to muje mail kare ravijosh2323@gmail.com

Dharmendra on 5/6/12 3:32 pm ने कहा…

ताज महल एक रहस्य तो कहीं से डाउनलोड ही नहीं हो प् रही है प्ल्ज़ इसका कोई और लिनक्स हो तो भेंजे मेरी ईद है
dharamsumant@gmail.com
कृपया जरुर भेंजे इसे पड़ने का बहुत मनन है प्ल्ज़........

Prince on 2/1/13 1:54 pm ने कहा…

Ebook pdf of Tajmahal P.N.Oak is not available kindly mail me the url link on my mail begrajsharma@gmail.com

praveen pathak on 12/6/15 1:44 pm ने कहा…

please send me this book by mail. my mail id is praveenPathak330@GMAIL.COM

praveen pathak on 12/6/15 1:46 pm ने कहा…

yaar ye book download ho hi nhi rhi hai kisi k passs ye book hai to please send me by email my mail id is praveenpathak33@gmail.com

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