वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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रविवार, 29 अगस्त 2010

'अपनी हिंदी' - अब एक नए स्वरुप में

प्रिय पाठकों,

आपकी प्रिय वेबसाइट 'अपनी हिंदी' अब एक नए स्वरुप में आपके सामने है। 'अपनी हिंदी' को और अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाने के लिए हमने इसके स्वरुप में परिवर्तन किया है।

'अपनी हिंदी ' में किये गए परिवर्तनों की सूची:

1. 'अपनी हिंदी' के डिजाईन में परिवर्तन किया गया है। इसका डिजाईन पहले से अधिक उपयोगी और आकर्षक बनाने की कोशिश की गयी है।

2. अब आप किसी भी पुस्तक को लेखकानुसार और वर्गानुसार ढूंढ सकते है। पाठकों की सुविधा के लिए यह कदम उठाया गया है।

3. 'मल्टीमीडिया' के अंतर्गत आप साहित्यिक वीडियो, फोटो और स्क्रीनसेवर डाउनलोड कर सकते है ।

4. 'लेखक-परिचय' के अंतर्गत हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखकों का जीवन परिचय दिया जायेगा।

5. 'नियमित पाठक' स्तम्भ के अंतर्गत हमारे नियमित पाठकों और 'अपनी हिंदी' में योगदान देने वालों के बारे में बताया जायेगा। अधिक जानकारी के लिए 'नियमित पाठक' लिंक पर क्लिक करें।

6. 'आपकी फरमाइश' के अंतर्गत आपकी फरमाइश शामिल की जाएगी।

7. 'आगामी आकर्षण' के अंतर्गत आने वाले दिनों में प्रकाशित होने वाली पुस्तकों की जानकारी दी जाएगी।


आपको 'अपनी हिंदी' का ये नया रूप कैसा लगा? अपनी टिप्पणियों के द्वारा हमें अवगत करवाएं।


- प्रबंधक ।

8 टिप्पणियां:

गजेन्द्र सिंह on 29/8/10 8:29 pm ने कहा…

बहुत ही अच्छा है अपनी हिंदी का नया रूप ......
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/

मनोज कुमार on 29/8/10 9:58 pm ने कहा…

बहुत अच्छा लगा।

राजभाषा हिंदी on 30/8/10 8:12 am ने कहा…

बहुत अच्छी लगा।

हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।

KAHI UNKAHI on 30/8/10 9:15 am ने कहा…

बहुत पसन्द आया यह नया रूप...। बधाई...। कॄपया कुछ दुर्लभ पुस्तकों को भी उपलब्ध कराएँ...।

विजयप्रकाश on 30/8/10 7:42 pm ने कहा…

"अपनी हिंदी" का यह नया रूप सराहनीय है.लेखकों एवं उपलब्ध साहित्य के वर्गीकरण द्वारा आपने इसे प्रयोगकर्ताओं के लिये और भी सरल एवं मनोरंजक बना दिया है.
मेरी शुभकामनायें.

Anika on 30/8/10 10:04 pm ने कहा…

यह नया रूप बहुत अच्छा लगा। क्रुपया रबिन्द्रनाथ टैगोर के उपन्यास भी उपलब्ध कराये। धन्यवाद्।

Shiv Raj on 31/8/10 11:52 am ने कहा…

accha hai apni hindi ka ye naya rup.

Dr Dinesh pathak shashi on 11/12/10 9:20 pm ने कहा…

apani hindi ka is roop mai vargikaran karana lekhko evm pathako ke liye kafi suvidha janak hoga. sadhubad.
Dr.Dinesh pathak shashi, 28n sarang vihar, Mathura. Mbl 09412727361

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