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शनिवार, 8 मई 2010

पंडित जवाहरलाल नेहरु की रचना - भारत की खोज


'भारत की खोज' पंडित जवाहरलाल नेहरु की लिखी हुई एक प्रसिद्ध पुस्तक है।

आइये इस पुस्तक के बारे में श्याम बेनेगल के विचार आपको पढवाते है, जिन्होंने इस पुस्तक पर एक प्रसिद्ध धारावाहिक भी बनाया था:
मैं तीन में से कोई एक चीज करना चाहता था। या तो मैं रामायण पर धारावाहिक बनाना चाहता था, या महाभारत पर, या फिर भारत की कहानी पर एक लंबा सा धारावाहिक। वह एक ऐसा दौर था, जब इस देश में टेलीविजन का तेजी से विस्तार हो रहा था। तब तक कुछ निर्माताओं ने रामायण और महाभारत पर सीरियल को बनाना शुरू भी कर दिया था। इसलिए मैंने तय किया कि मैं भारत के इतिहास पर धारावाहिक बनाऊंगा। इसके लिए मैंने नेहरू के काम को चुना। इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि नेहरू की किताब ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ एक खास मकसद से लिखी गई थी। इस किताब में नेहरू भारत को एक राष्ट्र के रूप में परिभाषित करने की कोशिश कर रहे थे।
हमने समय-समय पर अपने देश को कई तरह से परिभाषित करने की कोशिश की है। 2300 साल पहले सम्राट अशोक से लेकर अब तक। इसके अलावा हमारे पास कई पौराणिक परिभाषाएं तो हैं ही। सम्राट अकबर के राज ने बाद में भारत को एक राजनैतिक परिभाषा भी देने की कोशिश की। नेहरू ने अपनी यह किताब तब लिखी, जब भारत आजाद नहीं हुआ था और इसकी आजादी की लड़ाई की वजह से वे जेल में थे। उनके लिए उस समय भारत को एक राष्ट्र के तौर पर परिभाषित करना काफी महत्वपूर्ण और जरूरी था। वह भी पश्चिम के इतिहास से एकदम अलग करके।

उस समय हमारे पास जो राष्ट्र का सिद्धांत था, वह मूल रूप में एक यूरोपीय सिद्धांत था। सैकड़ों साल के युद्ध के बाद यूरोप को देशों को एक राष्ट्र के रूप में नई पहचान मिली थी। उनकी यह पहचान जातीयता, भाषा और धर्म वगैरह कई चीजों पर आधारित थी। लेकिन भारत को इस तरीके से परिभाषित नहीं किया जा सकता। अगर आकार के हिसाब से देखें तो अपने आप में यह एक पूरे महाद्वीप की तरह ही है। इसमें अलग-अलग तरह की सभ्यता और संस्कृति वाले लोग रहते हैं। यहां आपको कई तरह की जातीय पहचान के लोग मिल जाएंगे। और उतनी तरह की भाषाएं मिल जाएंगी, जितनी तरह की किसी महाद्वीप में होती हैं। दुनिया में जितनी भी तरह के धर्म हैं उन सबके मानने वाले आपको कहीं न कहीं भारत में मिल सकते हैं।
नेहरू एक राष्ट्र के तौर पर भारत को एक परिभाषा देना चाहते थे। इस काम के लिए उन्हें इतिहास में जाने की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए उन्होंने इस देश की उत्पत्ति और इसके विकास का अध्ययन किया। इस पूरे देश में जो विभिन्नताएं हैं, वे दिमाग को चकरा देने वाली हैं। वे यह समझने और ढूंढने की कोशिश कर रहे थे कि वे कौन से कारण हैं, जिन्होंने इतने बड़े देश को अब तक एक बनाए रखा। और इसके साथ ही इसे कभी छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटने नहीं दिया। हमारा समाज कोई एकरस यानी होमोजीनियस किस्म का समाज नहीं है। इसमें कई तरह की विभिन्नताएं हैं, लेकिन इसके साथ ही इसमें हमेशा ही ऐसा कुछ भी है, जो इसे एकजुट बनाए रखता है। नेहरू की किताब इन्हीं कारणों को खोजती और तलाशती है। मुझे लगा कि यह एक अदभुत किताब है, जो भारत की कहानी कहने का आधार बन सकती है। इसी से बना ‘भारत एक खोज’, जिसका सीधा सा अर्थ ही है- भारत की खोज।
मैंने इसका नाम ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ नहीं रखा, भारत की खोज ही रखना पसंद किया। उनकी किताब में कोई संदर्भ नहीं दिए गए हैं, क्योंकि जब उन्होंने यह किताब लिखी वे जेल में थे। इतिहास के लिए ई. पी. थॉमसन जैसे लोग उनके सलाहकार थे। थॉमसन की राय काफी दिलचस्प भी हुआ करती थी। लेकिन नेहरू एक अलग तरह का इतिहास लिखने की कोशिश कर रहे थे। पहली बार एक ऐसा इतिहास जिसके नजरिये का केंद्र भारत था। हालांकि तब तक औपनिवेशिक काल में इतिहास एक अध्ययन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय बन गया था, लेकिन उस समय जो भारत का इतिहास लिखा गया वह यूरोपीय नजरिये से लिखा गया। भारत के इतिहास को यूरोपीय लोगों की नजर से देखा गया। एक तो यह बहुत ही संक्षिप्त सा था। दूसरे यह संरक्षण देने वाले नजरिये से लिखा गया था। फिर सांस्कृतिक नजरिये से देखें तो कई बार इसमें एक तरह की घमंडभरी अक्खड़ता नजर आती थी।
नेहरू की कोशिश थी कि जब वे इतिहास की बात करें तो उसे यूरोपीय व्याख्याओं और रंगों से मुक्त कर दें। एक तरह से उनकी यह किताब प्रारंभिक और मूल किताब है। कई ऐसी चीजें थीं जिनके बारे में वे बहुत ज्यादा नहीं जानते थे, खासतौर पर दक्षिण भारत के बारे में।
और जब मैं अपना टेलीविजन सीरियल ‘भारत एक खोज’ बनाने लगा तो इसके लिए मैने 22 इतिहासकारों को नियुक्त किया। ये सब लोग किसी न किसी खास काल के विशेषज्ञ थे। तकरीबन इतने ही लोगों को मैंने सलाहकार और परामर्शदाता भी बनाया। हम किताब में छूट गई सारी खाली जगहों को भरना चाहते थे। इसके साथ ही हमने यह कोशिश भी कि जहां तथ्यों के मामले में नेहरू गलत थे वहां उन्हें ठीक भी कर दिया जाए। इसके बाद हमने ‘भारत एक खोज’ सीरियल बनाया। इसमें नेहरू सूत्रधार की तरह थे। जिसमें वे खुद भारत के इतिहास की कहानी कहते हैं। और अपनी किताब के लगातार उद्धरण भी देते हैं।
लेखक प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हैं
‘बॉलीवुड बेबीलोन’ से साभार




फाइल का आकार: 3 Mb




8 डाउनलोड लिंक (Rapidshare, Hotfile आदि) :
कृपया यहाँ क्लिक करें





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7 टिप्पणियां:

** PRINCESS KAUSHALYA** on 10/5/10 1:09 pm ने कहा…

Dhanyawad...yah pustak ke liye...
bahut "Anmol" hai yah pustak..

Admin on 10/5/10 8:45 pm ने कहा…

Dhanyawad

बेनामी ने कहा…

mai kai tippani kar chuka hu par sari benami se.apne nam se tippani kaise kar sakte hai or apnihindi ke liye shubhkamnaye or dhanyavad

Mayank Pathak on 19/2/12 9:43 pm ने कहा…

Apki site se files download nahi ho rahi hain. multiuplod site nahi chal rahi hai kripaya jaldi kuch karein

dhanyawad

shailesh on 21/2/12 8:36 pm ने कहा…

we are not able to download any book from your site. There is something wrong with the downloading link

Shailesh

Hit Sharma on 21/3/12 4:06 pm ने कहा…

Dear Admin.
as soon as i click on skip add option,, it show server not found,,please help and suggest what to do,

Hitendra Sharma
HKS.PANDIT@GMAIL.com

prashant on 23/4/14 2:25 pm ने कहा…

कृपया मुझे भी लिंक उपलब्ध करदे। दिया गया लिंक काम नहीं करता है।

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