वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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रविवार, 18 अप्रैल 2010

प्रेमचंद की मशहूर कहानियां


'प्रेमचंद की मशहूर कहानियां' एक कहानी-संग्रह है जिसमे मुंशी प्रेमचंद की मशहूर कहानियां दी गयी है।

प्रेमचंद आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाते हैं। यों तो उनके साहित्यिक जीवन का आरंभ १९०१ से हो चुका था पर उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर अंक में १९१५ में सौत नाम से प्रकाशित हुई और १९३६ में अंतिम कहानी कफन नाम से। बीस वर्षों की इस अवधि में उनकी कहानियों के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। उनसे पहले हिंदी में काल्पनिक, एय्यारी और पौराणिक धार्मिक रचनाएं ही की जाती थी। प्रेमचंद ने हिंदी में यथार्थवाद की शुरूआत की।


फाइल का आकार: 5 Mb



8 डाउनलोड लिंक (Rapidshare, Hotfile आदि) :

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9 टिप्पणियां:

बेनामी ने कहा…

धन्यवाद इष पुस्तक के लिए.

बेनामी ने कहा…

bahut he achi book hai jise padhne ke baad indian hone ka garv hota hai

बेनामी ने कहा…

bahut khushi hui...aapki site dekhkar...

बेनामी ने कहा…

bhartiya sanskriti ki garima ko banaye rakhne k liye aapki website bahut hi mahatvpurna hai.....

Sabhi Bhartiya apke aabhari rahenge.
Dhanyawad

आलोक ने कहा…

हमारे साथ एक समस्या है.हम जिन चीजों में अच्छे हैं हम उन्हें भी आगे नहीं ले जा रहे.शायद ही किसी अँगरेज़ को इस बात पर शर्म आती होगी की उसे हिंदी नहीं आती पर हमारे ९० प्रतिशत से ज्यादा भारतीय इस बात के लिए शर्मिंदा होंगे की उन्हें इंग्लिश नहीं आती(या गर्वित की 'आती है'). सच तो यह है की अँगरेज़ हिंदी भाषा तो क्या पूरी हिंदी वर्णमाला भी नहीं बोल सकते.
आलोक

Guddi ने कहा…

Aapse ek hi anurodh hai. Chahe kuch bhi ho jaye aapne is mahat karam ko band mat karna. Ye kitabe kahi na kahi hamare man me deshprem ki bhavana jagati hai jo bhavana har insan mein hona chahiye. Aap ke is upakar ka rin shayad hum na chuka paye par aapke uddeshya aavasya safal honge. Aap ek sacche samajsevik hain.
Bahut Bahut Dhanyawad

बेनामी ने कहा…

Premchand ji ki kahaniyo ka sunder sanklan.
dhanyawaad pustako ko uplabdh karane k liye

बेनामी ने कहा…

i like this site very much

बेनामी ने कहा…

Mujhe yeh hindi ka site buhut pasand aya Dhanyawad.

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