वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

हिंदी साहित्य का संक्षिप्त सुगम इतिहास


'हिंदी साहित्य का संक्षिप्त सुगम इतिहास' एक उपयोगी पुस्तक है । इसको पढ़कर आपको हिंदी साहित्य के बारे में काफी कुछ जानने को मिलेगा।

यह पुस्तक हमें प्रिंसेस कौशल्या ने भेजी है। इसके लिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद्।


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मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

'अंगूठे की छाप' से आकृतियाँ बनाएं


'अंगूठे की छाप' एक बहुत ही उपयोगी पुस्तक है। इसमें अंगूठे की छाप से विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ बनाना सिखाया गया है। आप खुद भी सीखें और अपने बच्चों को भी सिखाएं ।


नोट: इस पुस्तक को नए सिरे से उपलब्ध करवा दिया गया हैअब इसे पढने में कोई मुश्किल नहीं आएगी

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सोमवार, 26 अप्रैल 2010

कुमार विश्वास की प्रसिद्ध कविता "पगली लड़की" (वीडियो)

कुमार विश्वास हिंदी के जाने-माने कवि है। इन्ही की एक और कविता कविता "पगली लड़की" यहाँ पेश है।

डॉ कुमार विश्वास जो अपनी वाक्-पटुता, विद्वता, और समय-अवसर पर अपनी विराट स्मरण-शक्ति के प्रयोग के कारण कवि-सम्मेलनों में काफी लोकप्रिय है।आई.आई.टी और कॉरपरेट-जगत के सचेत श्रोता हों अथवा कोटा-मेले में बेतरतीब फैला लाखों का जन समूह , प्रत्येक मंच को अपने संचालन से डॉ कुमार विश्वास इस तरह लयबद्ध कर देते हैं कि पूरा समारोह अपनी संपूर्णता को जीने लगता है।

श्रोताओं को अपने जादुई सम्मोहन में लेने का उनका यही अदभुत कौशल, उन्हें समकालीन हिन्दी कवि-सम्मेलनों का सबसे दुलारा कवि बनाता है। स्व० धर्मवीर भारती ने उन्हें हिन्दी की युवतम पीढ़ी का सर्वाधिक संभावनाशील गीतकार कहा था। महाकवि नीरज जी उनके संचालन को निशा नियामक कहते हैं और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार वे इस पीढ़ी के एकमात्र ISO 2006 कवि हैं ।




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रविवार, 25 अप्रैल 2010

कुमार विश्वास की प्रसिद्ध कविता "कोई दीवाना कहता है" (वीडियो)

कुमार विश्वास हिंदी के जाने-माने कवि है। इन्ही की कविता "कोई दीवाना कहता है" का वीडियो यहाँ पेश है।

डॉ कुमार विश्वास जो अपनी वाक्-पटुता, विद्वता, और समय-अवसर पर अपनी विराट स्मरण-शक्ति के प्रयोग के कारण कवि-सम्मेलनों में काफी लोकप्रिय है।आई.आई.टी और कॉरपरेट-जगत के सचेत श्रोता हों अथवा कोटा-मेले में बेतरतीब फैला लाखों का जन समूह , प्रत्येक मंच को अपने संचालन से डॉ कुमार विश्वास इस तरह लयबद्ध कर देते हैं कि पूरा समारोह अपनी संपूर्णता को जीने लगता है।

श्रोताओं को अपने जादुई सम्मोहन में लेने का उनका यही अदभुत कौशल, उन्हें समकालीन हिन्दी कवि-सम्मेलनों का सबसे दुलारा कवि बनाता है। स्व० धर्मवीर भारती ने उन्हें हिन्दी की युवतम पीढ़ी का सर्वाधिक संभावनाशील गीतकार कहा था। महाकवि नीरज जी उनके संचालन को निशा नियामक कहते हैं और प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के अनुसार वे इस पीढ़ी के एकमात्र ISO 2006 कवि हैं ।





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शनिवार, 24 अप्रैल 2010

अपना पानी, अपना जीवन - विज्ञान साहित्य


'अपना पानी अपना जीवन ' पुस्तक में पानी के बारे में अच्छी जानकारी दी गयी है। पुस्तक में बताया गया है कि जल-चक्र क्या है, जल को सुरक्षित कैसे रखें, पानी को साफ़ कैसे रखें, पानी से कौनसे रोग होते है, जल-प्रबंधन क्या है । इत्यादि जानकारियां इस पुस्तक में दी गयी है।
अवश्य पढ़ें।


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शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

जयशंकर प्रसाद की अमर रचना - 'कामायनी'


जयशंकर प्रसाद की 'कामायनी' को हिंदी-साहित्य की सर्वोत्तम रचना माना जाता है। कामायनी हिंदी के महानतम महाकाव्यों में से है । 'कामायनी ' इनकी श्रेष्ठ कृति और हिंदी का गौरव ग्रंथ है। दार्शनिक पृष्ठभूमि पर लिखा यह प्रबंध-काव्य छायावादी कविता की सर्वोच्च उपलब्धि है।

जिस समय खड़ी बोली और आधुनिक हिन्दी साहित्य किशोरावस्था में पदार्पण कर रहे थे। काशी के ‘सुंघनी साहु’ के प्रसिद्ध घराने में श्री जयशंकर प्रसाद का संवत् 1946 में जन्म हुआ। व्यापार में कुशल और साहित्य सेवी – आपके पिता श्री देवी प्रसाद पर लक्ष्मी की कृपा थी। इस तरह का प्रसाद का पालन पोषण लक्ष्मी औऱ सरस्वती के कृपापात्र घराने में हुआ। प्रसाद जी का बचपन अत्यन्त सुख के साथ व्यतीत हुआ। आपने अपनी माता के साथ अनेक तीर्थों की यात्राएँ की।

पिता और माता के दिवंगत होने पर प्रसाद जी को अपनी कॉलेज की पढ़ाई रोक देनी पड़ी और घर पर ही बड़े भाई श्री शम्भुरत्न द्वारा पढ़ाई की व्यवस्था की गई। आपकी सत्रह वर्ष की आयु में ही बड़े भाई का भी स्वर्गवास हो गया। फिर प्रसाद जी ने पारिवारिक क्षण मुक्ति के लिए सम्पत्ति का कुछ भाग बेचा। इस प्रकार आर्थिक सम्पन्नता और कठिनता के किनारों में झूलता प्रसाद का लेखकीय व्यक्तित्व समृद्धि पाता गया। संवत् 1984 में आपने पार्थिव शरीर त्यागकर परलोक गमन किया।


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हरिवंशराय बच्चन की रचना - एकांत-संगीत


एकांत-संगीत हरिवंशराय बच्चन की एक प्रसिद्ध रचना है

तट पर है तरूवर एकाकी,
नौका है, सागर में,

अंतरिक्ष में खग एकाकी,
तारा है अंबर में,

भू पर वन, वारिधि पर बेड़े,
नभ में उडु-खग मेला,

नर नारी से भरे जगत में
कवि का हृदय अकेला।



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गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

कुमार विकल का कविता-संग्रह - एक छोटी-सी लड़ाई


'एक छोटी-सी लड़ाई' प्रसिद्ध कवि कुमार विकल का कविता-संग्रह है।

कुमार विकल ने बहुत कम लिख कर बड़ा नाम कमाया। बेशक उनकी काव्य-यात्रा ज्यादा लंबी नहीं थी। बीस सालों में उनके महज तीन संग्रह आए और बेहद ज्यादा चर्चित रहे। 'एक छोटी-सी लड़ाई' (१९८०), 'रंग खतरे में हैं' (१९८२) और 'निरुपमा दत्त मैं बहुत उदास हूं' (१९९३) आदि की कविताओं से जनवादी कविता का नया मुहावरा शुरू होता है। बेवजह ही उनकी कविताओं को अंधेरे के खिलाफ सशक्त चीख की कविताएं नहीं बताया जाता।

तेइस फरवरी, १९९७ को वह मौत को हासिल हो गए, लेकिन उनकी कविताएं जिंदा हैं। उनकी आखिरी कविताओं में से एक कविता 'मृत्यु-द्वार' है :

दुनिया की सबसे खूबसूरत/ औरत के बाद/ यदि कोई खूबसूरत चीज है/ वह है केवल मृत्यु/ मृत्यु जो हमें/ परियों के संसार में ले जाती है/ तरह-तरह के जादूगरों से मिलाती है/ जादूगरों का वह संसार/ अद्भुत होता है/ वहां आदमी/ किसी वक्त भी मर सकता है/ और दोबारा जी भी सकता है/ मैं उस जादूगर की तलाश में हूं/ जो मुझे सिर्फ मृत्यु-द्वार तक ले जाए/ और फिर वापस ले आए/ जहां दुनिया की सबसे खूबसूरत/ औरत/ मेरा इंतजार कर रही हो।


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बुधवार, 21 अप्रैल 2010

पर्वतों पर संकट - विज्ञान साहित्य

'पर्वतों पर संकट' एक विज्ञान आधारित पुस्तक है । इसमें पर्वतों की रचना, उनके सामने आने वाली चुनोतियों, भारत के प्रमुख पर्वत आदि के बारे में बताया गया है।

अवश्य पढ़ें।

यह पुस्तक हमें श्री नावेद हयात ने भेजी हैनावेद, आपका शुक्रिया


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मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

निदा फाजली का संस्मरण - अब कहाँ


जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना


यूँ उजालों से वास्ता रखना
शम्मा के पास ही हवा रखना


घर की तामीर चाहे जैसी हो
इस में रोने की जगह रखना


मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये
अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना


मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना


निदा फ़ाज़ली हिन्दी और उर्दू के मशहूर शायर हैं। वो छोटी उम्र से ही लिखने लगे थे। निदा फ़ाज़ली इनका लेखन का नाम है। निदा का अर्थ है स्वर/ आवाज़/ Voice। फ़ाज़िला क़श्मीर के एक इलाके का नाम है जहाँ से निदा के पुरखे आकर दिल्ली में बस गए थे, इसलिए उन्होंने अपने उपनाम में फ़ाज़ली जोड़ा।

इन्होने शायरी के अलावा गद्य भी लिखा है । इनके संस्मरण कि एक पुस्तक प्रकाशित हुई थी - तमाशा मेरे आगे। इसी का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है।



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सोमवार, 19 अप्रैल 2010

फणीश्वर नाथ रेणु का रिपोर्ताज - इस जल प्रलय में


फणीश्वर नाथ रेणु (४ मार्च, 1921 - ११ अप्रैल, 1977) एक हिन्दी साहित्यकार थे । इन्होंने प्रेमचंद के बाद के काल में हिन्दी में श्रेष्ठतम गद्य रचनाएं कीं । इनके पहले उपन्यास मैला आंचल को बहुत ख्याति मिली थी जिसके लिए उन्हे पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था ।

'इस जल प्रलय में' फणीश्वर नाथ रेणु का रिपोर्ताज है जिसमे पटना शहर में आई बाढ़ का दिलचस्प वर्णन किया गया है।


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रामधारी सिंह दिनकर का काव्य-नाटक - उर्वशी


साहित्य और पुराण में उर्वशी सौंदर्य की प्रतिमूर्ति रही है। स्वर्ग की इस अप्सरा की उत्पत्ति नारायण की जंघा सेमानी जाती है। पद्मपुराण के अनुसार इनका जन्म कामदेव के उरु से हुआ था।

श्रीमद्भागवत के अनुसार यह स्वर्ग की सर्वसुंदर अप्सरा थी। एक बार इंद्र की राजसभा में नाचते समय वह राजा पुरुके प्रति क्षण भर के लिए आकृष्ट हो गई। इस कारण उनके नृत्य का ताल बिगड़ गया। इस अपराध के कारण राजाइंद्र ने रुष्ट होकर उसे मर्त्यलोक में रहने का अभिशाप दे दिया। मर्त्य लोक में उसने पुरु को अपना पति चुना किंतुशर्त यह रखी कि वह पुरु को नग्न अवस्था में देख ले या पुरुरवा उसकी इच्क्षा के प्रतिकूल समागम करे अथवाउसके दो मेष स्थानांतरित कर दिए जाएं तो वह उनसे संबंध विच्छेद कर स्वर्ग जाने के लिए स्वतंत्र हो जाएगी।ऊर्वशी और पुरुरवा बहुत समय तक पति पत्नि के रूप में सात-साथ रहे। इनके नौ पुत्र आयु, अमावसु, श्रुतायु, दृढ़ायु, विश्वायु, शतायु आदि उत्पन्न हुए। दीर्घ अवधि बीतने पर गंधर्वों को ऊर्वशी की अनुपस्थिति अप्रीय प्रतीतहोने लगी। गंधर्वों ने विश्वावसु को उसके मेष चुराने के लिए भेजा। उस समय पुरुरवा नग्नावस्था में थे। आहटपाकर वे उसी अवस्था में विश्वाबसु को पकड़ने दौड़े। अवसर का लाभ उठाकर गंधर्वों ने उसी समय प्रकाश करदिया। जिससे उर्वशी ने पुरुरवा को नंगा देख लिया। आरोपित प्रतिबंधों के टूट जाने पर ऊर्वशी श्राप से मुक्त हो गईऔर पुरुरवा को छोड़कर स्वर्ग लोक चली गई।

महाकवि कालीदास के संस्कृत महाकाव्य विक्रमोर्वशीय नाटक की कथा का आधार यही प्रसंग है। आधुनिक हिंदीसाहित्य में रामधारी सिंह दिनकर ने इसी कथा को अपने काव्यकृति का आधार बनाया और उसका शीर्षक भी रखाऊर्वशी। महाभारत की एक कथा के अनुसार एक बार जब अर्जुन इंद्र के पास अस्त्र विद्या की शिक्षा लेने गए तोउर्वशी उन्हें देखकर मुग्ध हो गई। अर्जुन ने ऊर्वशी को मातृवत देखा। अतः उसकी इच्छा पूर्ति करने के कारण।इन्हें शापित होकर एक वर्ष तक पुंसत्व से वंचित रहना पड़ा।


१९६१ . में प्रकाशित इस काव्य नाटक में दिनकर ने उर्वशी और पुरुरवा के प्राचीन आख्यान को एक नये अर्थ सेजोड़ना चाहा है। इस कृति में पुरुरवा और उर्वशी अलग-अलग तरह की प्यास लेकर आये हैं। पुरुरवा धरती पुत्र हैऔर उर्वशी देवलोक से उतरी हुई नारी है। पुरुरवा के भीतर देवत्य की तृष्णा और उर्वशी सहज निश्चित भाव सेपृथ्वी का सुख भोगना चाहती है।
उर्वशी प्रेम और सौन्दर्य का काव्य है। प्रेम और सौन्दर्य की मूल धारा में जीवन दर्शन सम्बन्धी अन्य छोटी-छोटीधाराएँ आकर मिल जाती हैं। प्रेम और सुन्दर का विधान कवि ने बहुत व्यापक धरातल पर किया है। कवि ने प्रेमकी छवियों को मनोवैज्ञानिक धरातल पर पहचाना है।
दिनकर की भाषा में हमेशा एक प्रत्यक्षता और सादगी दिखी है, परन्तु उर्वशी में भाषा की सादगी अलंकृति औरआभिजात्य की चमक पहन कर आयी है-शायद यह इस कृति को वस्तु की माँग रही हो।





पृष्ठ संख्या: 186
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रविवार, 18 अप्रैल 2010

प्रेमचंद की मशहूर कहानियां


'प्रेमचंद की मशहूर कहानियां' एक कहानी-संग्रह है जिसमे मुंशी प्रेमचंद की मशहूर कहानियां दी गयी है।

प्रेमचंद आधुनिक हिन्दी कहानी के पितामह माने जाते हैं। यों तो उनके साहित्यिक जीवन का आरंभ १९०१ से हो चुका था पर उनकी पहली हिन्दी कहानी सरस्वती पत्रिका के दिसंबर अंक में १९१५ में सौत नाम से प्रकाशित हुई और १९३६ में अंतिम कहानी कफन नाम से। बीस वर्षों की इस अवधि में उनकी कहानियों के अनेक रंग देखने को मिलते हैं। उनसे पहले हिंदी में काल्पनिक, एय्यारी और पौराणिक धार्मिक रचनाएं ही की जाती थी। प्रेमचंद ने हिंदी में यथार्थवाद की शुरूआत की।


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मन्नू भंडारी का अमर उपन्यास - "महाभोज"

'अपनी हिंदी' के पाठकों के लिए एक ख़ास पेशकश है मन्नू भंडारी का अमर उपन्यास - "महाभोज"

मन्नू भंडारी (जन्म ३ अप्रैल १९३१) हिन्दी की सुप्रसिद्ध कहानीकार हैं। मन्नू भंडारी ने कहानियां और उपन्यास दोनों लिखे हैं। विवाह विच्छेद की त्रासदी में पिस रहे एक बच्चे को केंद्र में रखकर लिखा गया उनका उपन्यास `आपका बंटी' (१९७१) हिन्दी के सफलतम उपन्यासों में गिना जाता है। मन्नू भंडारी हिन्दी की लोकप्रिय कथाकारों में से हैं। नौकरशाही में व्याप्त भ्रष्टाचार के बीच आम आदमी की पीड़ा और दर्द की गहराई को उद्घाटित करने वाला उनका उपन्यास `महाभोज' (१९७९) अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था।


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दीवान - ए - ग़ालिब शब्दावली

'दीवान - - ग़ालिब' में जो शेर दिए गए है, उनमे से हो सकता है कि कुछ उर्दू शब्दों के अर्थ आपको समझ में ना आये।

'दीवान - - ग़ालिब शब्दावली' में उन सभी उर्दू शब्दों के अर्थ हिंदी में दिए गए है। इससे आपको 'दीवान - - ग़ालिब' पढने में और मजा आएगा.


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शनिवार, 17 अप्रैल 2010

दीवान - ए - ग़ालिब (संपूर्ण)

हजारों ख़्वाहिशें ऐसी, कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान, लेकिन फिर भी कम निकले

निकलना ख़ुल्द से आदम का सुनते आये थे, लेकिन
बहुत बेआबरू हो कर तिरे कूचे से हम निकले

हुई जिनसे तवक़्क़ो, खस्तगी की दाद पाने की
वो हम से भी ज़ियादा ख़स्त-ए-तेग़े-सितम निकले

मुहब्बत में नहीं है फ़र्क, जीने और मरने का
उसी को देखकर जीते हैं, जिस काफ़िर पे दम निकले

मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की ये पुस्तक यहाँ पर दी जा रही है ये पुस्तक हिंदी और उर्दू दोनों में है। पुस्तक अपने आप में संपूर्ण हैअवश्य पढ़ें


पृष्ठ संख्या: 472
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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

चमत्कार का रहस्य - विज्ञान पुस्तक


इंसान को जादू-टोने और चमत्कारों से हमेशा से लगाव रहा है। रहस्य के प्रति जिज्ञासा इंसान का स्वभाव है।

पानी में आग लगाना, आग पर चलना, हवा में भभूत पैदा करना इत्यादि चमत्कार आपने भी देखें होंगे।

अगर आप चाहे तो ये चमत्कार आप भी अपने घर पर कर सकते है

इस पुस्तक में बताया गया है की ये चमत्कार कोई जादू नहीं बल्कि विज्ञान की करामात है। इन्हें कोई भी आसानी से सीख सकता है और अपने घर पर ही कर सकता है।


इस पुस्तक का डाउनलोड लिंक नीचे उपलब्ध करवाया जा रहा है ।
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रांगेय राघव की कहानी- 'लहू और लोहा'


'लहू और लोहा' रांगेय राघव की एक कहानी है जिसमे मजदूरों और सत्ता के संघर्ष की पृष्ठभूमि दिखाई गयी है।

"जब खून लोहे में लगता है, तब वह जुलम बन जाता है, पर जब लोहा खून में उतरता है उस समय वह लोहा बनने लगता है - वही पानी जैसा खून लोहा बन जाता है । "


- इसी कहानी से ।

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शरत चन्द्र का उपन्यास - अन्धकार में आलोक

'अन्धकार में आलोक' शरत चन्द्र का एक छोटा उपन्यास है जिसमे एक युवक के प्रेम को चित्रित किया गया है।

शरत चन्द्र हिंदी के जाने-माने उपन्यासकार रहे है। इनके 'देवदास' उपन्यास पर कई फिल्में भी बन चुकी है।

शरत के उपन्यासों के कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं। कहा जाता है कि उनके पुरुष पात्रों से उनकी नायिकाएँ अधिक बलिष्ठ हैं। शरत्चंद्र की जनप्रियता उनकी कलात्मक रचना और नपे तुले शब्दों या जीवन से ओतप्रोत घटनावलियों के कारण नहीं है बल्कि उनके उपन्यासों में नारी जिस प्रकार परंपरागत बंधनों से छटपटाती दृष्टिगोचर होती है, जिस प्रकार पुरुष और स्त्री के संबंधों को एक नए आधार पर स्थापित करने के लिए पक्ष प्रस्तुत किया गया है, उसी से शरत् को जनप्रियता मिली।

अवश्य पढ़ें।

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सोमवार, 12 अप्रैल 2010

भगवतीचरण वर्मा का उपन्यास - आखरी दाँव


'आखरी दाँव' - भगवतीचरण वर्मा का एक मशहूर उपन्यास है।


30 अगस्त 1903 को उन्नाव के शफीपुर गांव में जन्मे भगवती चरण वर्मा ने अपने साहित्यिक जीवन की शुरुआत कविता से की थी लेकिन उन्हें ख्याति बतौर उपन्यासकार मिली। साहित्य अकादमी सहित कई पुरस्कारों के अलावा उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया और उन्हें राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया।

आधुनिक हिन्दी उपन्यासकारों में भगवती चरण वर्मा का एक खास मुकाम है क्योंकि उनकी कृतियों में रोचकता का तत्व सर्वोपरि रहता है तथा आज भी 'चित्रलेखा', 'रेखा' और 'भूले-बिसरे चित्र' जैसी उनकी रचनाएं काफी चाव से पढी जाती हैं।
वर्मा जी ने अपने दौर में ऐसे विषयों पर कलम चलाई जिन पर लिखना उस समय बेहद साहस का काम समझा जाता था । इस मामले में उनकी कृति 'चित्रलेखा' और 'रेखा' की मिसाल दी जाती है। वर्मा जी की एक अन्य विशेषता यह थी कि उनके उपन्यासों के कथाशिल्प के अनुसार उनकी वर्णनशैली भी बदलती रहती थी। उनकी कई रचनाएं तो हिंदी में सर्वाधिक पढी जाने जाने वाली पुस्तकों में शामिल है।



पृष्ठ संख्या: 275
आकार: 18 Mb




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रविवार, 11 अप्रैल 2010

रांगेय राघव की कहानी 'धर्मयुद्ध'

रांगेय राघव हिंदी के उन विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावाले रचनाकारों में से हैं जो बहुत ही कम आयु लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में ही एक साथ उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार, आलोचक, नाटककार, कवि, इतिहासवेत्ता तथा रिपोर्ताज लेखक के रूप में स्वंय को प्रतिस्थापित कर दिया, साथ ही अपने रचनात्मक कौशल से हिंदी की महान सृजनशीलता के दर्शन करा दिए।


इनकी कहानी 'धर्मयुद्ध' एक भावना प्रधान कहानी है। अवश्य पढ़ें।

फाइल का आकार: 1 Mb





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शनिवार, 10 अप्रैल 2010

नव भारत के निर्माता


'नव भारत के निर्माता ' पुस्तक में उन लोगो के बारे में बताया गया है जिन्होंने नए भारत के निर्माण में अपना योगदान दिया है। यह पुस्तक उन लोगों को एक श्रद्धांजलि है

हर भारतीय को ये पुस्तक अवश्य पढनी चाहिए।


फाइल का आकार: 7 Mb
पृष्ठ
संख्या: 184




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श्री हरिनाम महामंत्र


'श्री हरिनाम महामंत्र' एक धार्मिक पुस्तक है । इसमें धार्मिक शिक्षा सारल भाषा में दी गयी है।

यह पुस्तक हमें श्री नावेद हयात ने भेजी हैनावेद, आपका शुक्रियाउम्मीद है, आप आगे भी इसी तरह हमारी होंसलाअफजाई करते रहेंगे

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शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

ममता कालिया की कहानी - दूसरा देवदास


'दूसरा देवदास' ममता कालिया की एक प्रसिद्ध कहानी है । यह कहानी प्रेम और रूमानियत का अनोखा उदहारण है। नायक संभव और नायिका पारो के हृदय में प्रेम बड़ी अजीब परिस्थितियों में उत्पन्न होता है। कथ्य, विषयवस्तु, भाषा और शिल्प की दृष्टि से कहानी बेजोड़ है।


ममता कालिया की रचनाओं में उनके कहानी संग्रह 'उसका यौवन', 'छुटकारा', 'जाँच अभी जारी है', 'चर्चित कहानियाँ' और 'प्रतिदिन' उल्लेखनीय हैं। उनके प्रमुख उपन्यास हैं- 'नरक दर नरक', 'बेघर', 'प्रेम कहानी' और 'एक पत्नी के नोट्स।' ममता कालिया को इससे पहले 'कहानी' पत्रिका (सरस्वती प्रेस) सम्मान, उ० प्र० हिंदी संस्थान का यशपाल सम्मान तथा अभिनव-भारती (कलकत्ता) का रचना सम्मान मिल चुके हैं।

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गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

आधुनिक हवाई अड्डे



'आधुनिक हवाई अड्डे' एक उपयोगी पुस्तक है । 240 पृष्ठों की इस पुस्तक में हवाई अड्डों के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गयी है तथा विश्व के आधुनिक हवाई अड्डों के बारे में भी बताया गया है ।

इसे हमारे पास अलीगढ से श्री राधेश्याम गुप्ता ने भेजा है


नोट: इस पुस्तक को नए सिरे से उपलब्ध करवा दिया गया हैअब इसे पढने में कोई मुश्किल नहीं आएगी


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धरा पर जीवन - विज्ञान साहित्य


'धरा पर जीवन' पुस्तक में बताया गया है कि धरती पर जीवन का प्रारंभ कैसे हुआ। जीवन का वर्गीकरण कैसे हुआ। जैव विविधताएं, जैव श्रंखला क्या है इत्यादि ।

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यह पुस्तक हमें श्री नावेद हयात ने भेजी हैनावेद, आपका शुक्रिया


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बुधवार, 7 अप्रैल 2010

दोपहर का भोजन - कहानी (अमरकांत)

अमरकांत नयी कहानी आन्दोलन के एक प्रमुख कहानीकार है। उन्होंने अपनी कहानियों में शहरी और ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण किया है। उनकी शैली सहज और भाषा में नवीनता है।

दोपहर का भोजन एक गरीबी से जूझ रहे एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी है। मुंशीजी के पुरे परिवार का संघर्ष भावी उमीदों पर टिका हुआ है । सिद्धेश्वरी गरीबी के अहसास को मुखर नहीं होने देती और उसकी आंच से अपने परिवार को बचाए रखती है ।


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मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

अल्बर्ट आइन्स्टीन


अल्बर्ट आइन्स्टीन एक सर्वकालिक महान वैज्ञानिक रहे है। यह पुस्तक उन्ही के ऊपर लिखी गयी है। इस पुस्तक में उनके बारे में दिलचस्प जानकारियां दी गयी है।

अल्बर्ट आइंस्टीन (14 मार्च 1879-18 अप्रैल, 1955) एक सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानीक, दार्शनिक और लेखक थे. उन्हे व्यापक रूप से सबसे अधिक प्रभावशाली और सबसे अच्छा ज्ञात वैज्ञानिक और सभी समय के बुद्धिजीवियों के रूप में माना जाता है. उन्हे अक्सर आधुनिक भौतिकी का पिता माना जाता है. उसे फोटोवेलेक्ट्रिक प्रभाव की व्यवस्था की खोज के लिए भौतिकी में 1921 नोबेल पुरस्कार प्राप्त है. आइंस्टीन ने भौतिक विज्ञान में अनेक योगदान दिए जिसमें सापेक्षता के विशेष और सामान्य सिद्धांतों को स्थापित करना, गुरुत्व द्वारा प्रकाश के विक्षेपन की कल्पना करना और बोस आइंस्टीन संघनन की भविष्यवाणी करना शामिल है.




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रविवार, 4 अप्रैल 2010

टॉर्च बेचने वाले - हरिशंकर परसाई


टॉर्च बेचने वाले - हरिशंकर परसाई की एक व्यंग्य रचना है जो पाठकों के मन को गुदगुदाती है और सामाजिक सरोकारों पर चोट करती है।

हरिशंकर परसाई
(२२ अगस्त, १९२२ - १० अगस्त, १९९५) हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार थे। उनका जन्म जमानी, होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ था। वे हिंदी के पहले रचनाकार हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और उसे हल्केफुल्के मनोरंजन की परंपरागत परिधि से उबारकर समाज के व्यापक प्रश्नों से जोड़ा

उनकी व्यंग्य रचनाएँ हमारे मन में गुदगुदी ही पैदा नहीं करतीं बल्कि हमें उन सामाजिक वास्तविकताओं के आमने–सामने खड़ा करती है, जिनसे किसी भी व्यक्ति का अलग रह पाना लगभग असंभव है। लगातार खोखली होती जा रही हमारी सामाजिक और राजनॅतिक व्यवस्था में पिसते मध्यमवर्गीय मन की सच्चाइयों को उन्होंने बहुत ही निकटता से पकड़ा है। सामाजिक पाखंड और रूढ़िवादी जीवन–मूल्यों की खिल्ली उड़ाते हुए उन्होंने सदैव विवेक और विज्ञान–सम्मत दृष्टि को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी भाषाशैली में खास किस्म का अपनापा है, जिससे पाठक यह महसूस करता है कि लेखक उसके सामने ही बैठा है



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आरोहण - कहानी (संजीव)

आरोहन एक बहुत दिलचस्प और पठनीय कहानी है। उम्मीद है, आपको अवश्य पसंद आएगी।



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शनिवार, 3 अप्रैल 2010

आकाश नीला क्यूँ है - विज्ञान साहित्य



इस पुस्तक में भारत के मशहूर वैज्ञानिक डॉक्टर सी.वि. रमन द्वारा २२ दिसम्बर, १९६८ को अहमदाबाद में दिए गए प्रसिद्ध अंग्रेजी भाषण का हिंदी अनुवाद संकलित है।

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