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मंगलवार, 9 मार्च 2010

राष्ट्र-कवि रामधारी सिंह दिनकर का कविता संग्रह - इतिहास के आंसू


आज किताबघर में प्रस्तुत है -
राष्ट्र-कवि रामधारी सिंह दिनकर का कविता संग्रह - 'इतिहास के आंसू'

यह उनकी ऐतिहासिक कविताओं का संकलन है । इसमें उनकी लगभग सभी ऐतिहासिक कवितायेँ संकलित है।


रामधारी सिंह दिनकर स्वतंत्रता पूर्व के विद्रोही कवि के रूप में स्थापित हुए और स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रकवि के नाम से जाने जाते रहे। वे छायावादोत्तर कवियों की पहली पीढ़ी के कवि थे। एक ओर उनकी कविताओ में ओज, विद्रोह, आक्रोश और क्रांति की पुकार है, तो दूसरी ओर कोमल श्रृँगारिक भावनाओं की अभिव्यक्ति है। इन्हीं दो प्रवृत्तियों का चरम उत्कर्ष हमें कुरूक्षेत्र और उवर्शी में मिलता है।

ऊर्वशी को छोड़कर, दिनकरजी की अधिकतर रचनाएं वीर रस से ओतप्रोत है। उनकी महान रचनाओं में रश्मिरथी और परशुराम की प्रतीक्षा शामिल है. भूषण के बाद उन्हें वीर रस का सर्वश्रेष्ठ कवि माना जाता है.

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि दिनकरजी गैर-हिंदीभाषियों के बीच हिंदी के सभी कवियों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय थे. उन्होंने कहा कि दिनकरजी अपनी मातृभाषा से प्रेम करने वालों के प्रतीक थे. हरिवंश राय बच्चन ने कहा कि दिनकरजी को एक नहीं, चार ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें गद्य, पद्य, भाषा और हिंदी भाषा की सेवा के लिए अलग-अगल ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाना चाहिए.

दो न्याय अगर तो आधा दो, और, उसमें भी यदि बाधा हो,

तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रक्खो अपनी धरती तमाम।

हम वहीं खुशी से खायेंगे,

परिजन पर असि न उठायेंगे!

लेकिन दुर्योधन

दुर्योधन वह भी दे न सका, आशीष समाज की ले न सका,

उलटे, हरि को बाँधने चला, जो था असाध्य, साधने चला।

हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया,

डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले-

'जंजीर बढ़ा कर साध मुझे,

हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।

यह देख, गगन मुझमें लय है, यह देख, पवन मुझमें लय है,

मुझमें विलीन झंकार सकल, मुझमें लय है संसार सकल।

सब जन्म मुझी से पाते हैं,

फिर लौट मुझी में आते हैं।

यह देख जगत का आदि-अन्त, यह देख, महाभारत का रण,

मृतकों से पटी हुई भू है,

पहचान, कहाँ इसमें तू है।




पृष्ठ संख्या: 90
आकार: 3.5 Mb




8 डाउनलोड लिंक (Rapidshare, , Hotfile आदि) :
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2 टिप्पणियां:

adarsh kumar patel on 27/7/11 11:38 am ने कहा…

अद्भुत कविता संग्रह , रामधारी सिंह दिनकर एक ऐसे व्यक्ति हैं केवल जिनके कारण मुझे हिन्दी साहित्य की तरफ लौटना पड़ा ........ ।
आपके इस कार्य को प्रणाम जो आपने उनकी रचित अनमोल पुस्तक हमें उपलब्ध कराई ।

Dr. Pradeep Parmar on 24/3/13 10:32 am ने कहा…

most of the downloads of ramdhari singh dinkar stuck on lnx.lu.. here when we click skip ads or download or any other link, it starts downloading a download manager with a bug... please help providing a good link for the greatest of hindi creations..
abhaari
pradeep

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