वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

पंडित जी - उपन्यास (शरत चंद्र)


प्रिय दोस्तों,
एक बार फिर हम आपके लिए लेकर आये है -शरत चंद्र का एक और उपन्यास। पंडित जी शरत चन्द्र का एक लोकप्रिय उपन्यास है। आशा है, आपको पसंद आएगा।



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मंगलवार, 27 अक्तूबर 2009

अपने - अपने इरादे - हास्य-व्यंग्य (क्रिशानेश्वर दिंगर)


प्रिय पाठकों,
इस बार किताब घर में प्रस्तुत है हास्य-व्यंग्य पर आधारित पुस्तक - अपने - अपने इरादे बहुत ही मनोरंजक पुस्तक है।


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शनिवार, 24 अक्तूबर 2009

कहानी नई पुरानी - कहानी संग्रह


आज हम पेश कर रहे है भारत के जाने माने लेखकों की कहानियों का संग्रह - कहानी नई- पुरानी। इसमें दी गयी सभी कहानियां मनोरंजक और ज्ञानवर्धक है।
अवश्य पढ़िए।



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बुधवार, 21 अक्तूबर 2009

जादू की सरकार - हास्य-व्यंग्य (शरद जोशी)


शरद जोशी भारत के जाने माने व्यंगकार है। आरम्भ में कुछ कहानियाँ लिखीं , फिर पूरी तरह व्यंग्य-लेखन ही करने लगे। इन्होंने व्यंग्य लेख, व्यंग्य उपन्यास, व्यंग्य कॉलम के अतिरिक्त हास्य-व्यंग्यपूर्ण धारावाहिकों की पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। हिन्दी व्यंग्य को प्रतिष्ठा दिलाने प्रमुख व्यंग्यकारों में शरद जोशी भी एक हैं। इनकी रचनाओं में समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण मिलता है।

'जादू की सरकार' में उनके कुछ प्रसिद्ध व्यंग्य लेख दिए हुए है।

आशा है, आपको पसंद आयेंगे।



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सोमवार, 19 अक्तूबर 2009

भूख - कहानी संग्रह (चित्रा मुद्गल)


समकालीन भारतीय कलाकारों में चित्रा मुद्गल का विशिष्ट स्थान है। आज जबकि अधिकतर कथाकार उपन्यास लेखन से जुड़े हैं, चित्राजी का कथाकार कहानियों के प्रति विशेष रूप से समर्पित है। उनकी कहानियाँ ऊपरी तौर से भले ही किसी वाद या राजनीतिक प्रतिबद्धता का शोर नहीं करतीं, पर दरअसल वे मानवीय सरोकारों से गहरई से जुड़ी हैं।

महिमा कथाकारों पर जिस तरह के सीमा संकेत किए जाते हैं, चित्राजी उन सभी सीमाओं का अतिक्रमण सहज रूप में इसलिए कर सकी हैं कि वे जिस कुशलता से घर, परिवार और संबंन्धों को कथात्मक सौंदर्य में बाँधती हैं उसी कुशलता से घर के बाहर निकलकर एक्जीक्यूटिव क्लास, विज्ञापन की चकाचौंध भरी दुनिया दफ्तरों और फ्रीलांसरों की जिन्दगी तथा साथ-साथ निम्न वर्ग की उस दबी-पिसी जिंदगी के आर्थिक दबावों और तनावों को भी रेखाकिंत करने में सफल हुई हैं, जो अपने आपमें स्थितियों में जीने को मजबूर हैं।

इस संग्रह की अधिकतर कहानियों के पात्र भावुकता की तर्कहीन नदी में न बहकर आर्थिक दबावों के यथार्थ को स्वीकार करते हुए ही अधिक प्रभावपूर्ण बनते हैं। आर्थिक दबावों का सीधा प्रभाव आज जिस तेजी से हमारे समाज पर पड़ रहा है उसे वैविध्यपूर्ण कथ्य और शिल्प के साथ-साथ भाषा के स्तर पर प्रस्तुत करने में चित्रा मुदगल की सजगता उल्लेखनीय है। दरअसल, यह संग्रह चित्राजी के कथा-लेखन में आए उस रचनात्मक बदलाव का दस्तावेज है, जो बहुत कम कथाकारों को मिलता है।




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शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2009

देवी चौधरानी - उपन्यास (बंकिम चंद्र)


देवी चौधरानी बंकिम चंद्र का एक सर्वकालिक महान उपन्यास है। इसमें एक निष्ठावान नारी की मर्मस्पर्शी कथा दी गयी है । अवश्य पढ़ें।

पुस्तक के कुछ अंश:
हां, मैं सागर हूं। गंगा नहीं, यमुना नहीं, ताल नहीं, तलैया नहीं—साक्षात् सागर हूं। तुम्हारा दुर्भाग्य है न ? जब दूसरे की औरत समझा तो पैर बड़े मजे से दबा रहे थे और जब घर की औरत ने पैर दबाने को कहा तो बहुत क्रोधित होकर चले गए। खैर, मेरा वचन पूरा हुआ और तुम्हारा भी। तुमने मेरे पैर दबा दिए, अब मेरा मुंह देख सकते हो। चाहे अब चरणों में रखो या त्याग दो। देख लिया न, मैं वास्तव में ब्राह्मण की बेटी हूं।




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मंगलवार, 13 अक्तूबर 2009

विषवृक्ष - उपन्यास (बंकिम चंद्र)


बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय बंगला के शीर्षस्थ उपन्यासकार हैं। उनकी लेखनी से बंगाल साहित्य तो समृद्ध हुआ ही है, हिन्दी भी उपकृत हुई है। उनकी लोकप्रियता का यह आलम है कि पिछले डेढ़ सौ सालों से उनके उपन्यास विभिन्न भाषाओं में अनूदित हो रहे हैं और कई-कई संस्करण प्रकाशित हो रहे हैं। उनके उपन्यासों में नारी की अन्तर्वेदना व उसकी शक्तिमत्ता बेहद प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त हुई है। उनके उपन्यासों में नारी की गरिमा को नयी पहचान मिली है और भारतीय इतिहास को समझने की नयी दृष्टि।

वे ऐतिहासिक उपन्यास लिखने में सिद्धहस्त थे। वे भारत के एलेक्जेंडर ड्यूमा माने जाते हैं।

विषवृक्ष बंकिम चंद्र का एक मशहूर उपन्यास है। यह नारी की अंतर्वेदना पर आधारित उपन्यास है।

पुस्तक के कुछ अंश:

यह सुनते ही कुंद की मां के कारुणिक चेहरे पर गंभीरता छा गई, किंचित रोष, मगर मृदु स्वर में बोली, ‘बेटी, जो तुम्हारी इच्छा हो, वही करो। मेरे साथ चलती हो तो अच्छा करती हो। बाद में तुम उस नक्षत्र-लोक की तरफ देखकर वहां आने के लिए तड़पती रहोगी। मैं एक बार फिर तुम्हारे पास आऊंगी। जब तुम मनः पीड़ा से व्याकुल होकर मुझे याद करोगी और मेरे साथ चलने को रोओगी, तब मैं तुम्हारे पास आऊंगी। तब तुम मेरे साथ चल पड़ना। इस समय तुम ऊपर ताक कर देखो, जहां मैं उंगली से इशारा कर रही हूं। वहां तुम्हें दो मानव-मूर्तियां नजर आएंगी। यही दो मानव इहलोक में तुम्हारे शुभ-अशुभ का कारण बनेंगे। यदि हो सके तो देखते ही उन्हें विषघर मानकर उनसे दूर भाग जाना। वे दोनों जिस राह से जाएं, उस राह से मत जाना।



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रविवार, 11 अक्तूबर 2009

उलझन - कविता संग्रह (हरीश जोशी)

उलझन श्री हरीश जोशी का कविता संग्रह है। इस कविता संग्रह में लघु कवितायेँ दी हुई है जो बहुत ही प्रभावकारी है। इसे दिल्ली से हमारे पाठक श्री दीपक बाबा ने भेजा हैदीपक, इसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद् आशा है आपका सहयोग आगे भी बना रहेगा। दीपक जी का ख़ुद का भी एक ब्लॉग है।



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शुक्रवार, 9 अक्तूबर 2009

अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल



अमर शहीद पंडित रामप्रसाद बिस्मिल एक महान देशभक्त और क्रांतिकारी थे। यह पुस्तक उनके जीवन पर प्रकाश डालती है। अवश्य पढ़ें।


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पिछले दिनों - हास्य-व्यंग्य (शरद जोशी)



पिछले दिनों जोशी जी के चुने हुए हास्य व्यंग्य लेखों का संग्रह है। जोशी जी भारत के जाने माने व्यंग्यकार है।

शरद जोशी भारत के जाने माने व्यंगकार है। आरम्भ में कुछ कहानियाँ लिखीं , फिर पूरी तरह व्यंग्य-लेखन ही करने लगे। इन्होंने व्यंग्य लेख, व्यंग्य उपन्यास, व्यंग्य कॉलम के अतिरिक्त हास्य-व्यंग्यपूर्ण धारावाहिकों की पटकथाएँ और संवाद भी लिखे। हिन्दी व्यंग्य को प्रतिष्ठा दिलाने प्रमुख व्यंग्यकारों में शरद जोशी भी एक हैं। इनकी रचनाओं में समाज में पाई जाने वाली सभी विसंगतियों का बेबाक चित्रण मिलता है।

अवश्य पढ़े।




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अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी



यह पुस्तक अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी जी के ऊपर लिखी गई है। हर भारतीय के पढने लायक यह पुस्तक विद्यार्थी जी के देशप्रेम और उच्च जीवन मूल्यों की एक मिसाल है।


किताबघर रेटिंग:/

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