वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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सोमवार, 6 अप्रैल 2009

नमस्कार - एक परिचय (Welcome!)

प्रिय पाठकों,

नमस्कार ।
'अपनी हिंदी' में आपका स्वागत है।

'अपनी हिंदी' एक प्रयास है, हिन्दी साहित्य को आम आदमी तक पहुँचाने का
'अपनी हिंदी' एक माध्यम है, हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार का
'अपनी हिंदी' एक विश्वास है, हर एक हिन्दी-प्रेमी भारतीय का



यह ब्लॉग समर्पित है हमारे देश की राष्ट्र भाषा हिन्दी को ।

आज इन्टरनेट पर हर प्रकार की सामग्री उपलब्ध है पर हिन्दी साहित्य से सम्बंधित कोई सामग्री उपलब्ध नही है।जबकि हिन्दी के पाठक बहुत अधिक है. हमारा ये ब्लॉग इसी कमी को दूर करने का एक प्रयास है

हमारा लक्ष्य हिन्दी भाषा से सम्बंधित साहित्य पाठको को उपलब्ध करवाना है जो कि internet पर उपलब्ध नही है। जैसे कि उपन्यास, कहानियाँ, पत्रिकाएं और इसके अलावा विभिन् शेर-ओ-शायरी , चुटकुले एवं लेख भी उपलब्ध करवाए जायेंगे ।

श्री बाबुराम सक्सेना ने कहा है - "हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्रनिर्माण का प्रश्न है।"

इस ब्लॉग में आपको हिन्दी साहित्य से सबंधित दुर्लभ पुस्तकें डाउनलोड करने की सुविधा मिलेगी और वो भी बिल्कुल मुफ्त!

हम चाहते है कि हम दुर्लभ हिन्दी साहित्य को हिंदुस्तान के घर-घर तक पहुंचाएं। इसके लिए हमें आप जैसे पाठकों के सहयोग और विश्वास की जरूरत है। आखिर 'अपनी हिंदी'आपका ही तो है, आपके लिए ही तो है। आज अगर इन्टरनेट पर 'अपनी हिंदी' हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम है तो उसके पीछे आप लोग ही है। हम तो बस निमित मात्र है


अगर आप इस ब्लॉग का पूरा लाभ उठाना चाहतें है तो निम्न कार्य करें:

1. अगर आप नए पाठक है तो इस ब्लॉग की सभी पुरानी पोस्ट अवश्य देखें। इनमे आपको डाउनलोड करने के लिए बहुत सारी अच्छी पुस्तकें मिलेगी

2. इस ब्लॉग पर अपने कमेंट्स जरूर दीजिये। इससे हमें आपकी फरमायश का पता लगता रहता है और हमें इस ब्लॉग को आपकी पसंद के हिसाब से बनाने में मदद मिलती है।

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और हाँ , अपने कमेंट्स के द्वारा हमारा उत्साह बढ़ाना न भूलियेगा। आपका साथ हमारा उत्साह बढ़ाएगा । आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी कि हज़ार मील का सफर भी एक कदम से ही शुरू होता है। पहला कदम हमने बढ़ा दिया है, आगे का सफर आपकी मर्ज़ी पर ।

तो आनंद लीजिये हमारी इस नई पेशकश का !

जय हिन्दी, जय भारत !




हिंदी पर भारतेंदु हरिश्चंद्र की ये रचना पठनीय है:

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत हिय को सूल

अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन

उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय

निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं ह्यैहैं सोय
लाख उपाय अनेक यों भले करे किन कोय

इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग

और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात

तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय
यह गुन भाषा और महं, कबहूं नाहीं होय

विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार

भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात

सब मिल तासों छांड़ि कै, दूजे और
उपायउन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय




- प्रबंधक ।



26 टिप्पणियां:

Pradeep on 31/1/10 9:38 PM ने कहा…

mahodaya, yadi aap sanskrit k granth bhi apne blog per dena chahe to mai apko oplabdh krwa sakta hu. meri email id hai pariharpradeep@rocketmail.com

बेनामी ने कहा…

Hindi ke liye aapka samrpan vastav me prerna dayak hai.
par aap hai kaun.. AAP ka blog me koi Picture, adress Kuch bahi nahi,, Please apna ek pic to bej dijiye sahab.

Dhanyawad,

nLv on 26/3/10 2:55 PM ने कहा…

Appka prayas vakai sarahniya hai. Kripya dharmik aur Takniki pustako ka bhi link dijiye. Agar app mere blog ko dekh kar apne vichar prakat kare to khushi hogi..
www.dharm.co.cc
www.itgyan.co.cc

S.R.Shukla1 ने कहा…

Dear sir,
You have selected a very simple, touching and excellent name for this fantastic site.Congretulations.
Some days before a poll was conducted to include or not to include novels of Pathak/Vedprakash Sharma.What is the verdict?Pleae inform.

naved hayat agency on 6/4/10 2:52 PM ने कहा…

sir mere paas hindi ki kuch books haijaise premchand ki godan
ek do comics hindi me



mere email id: junaid.aalia@gmail.com

**KAUSHALYA** on 21/4/10 8:51 AM ने कहा…

Hallo! महोदय...
"अपनी हिंदी" में हमने सदस्य तो प्राप्त कर लिया है...
किन्तु हम इस हिंदी बचाओ अभियान में सम्मिलित होना चाहते है आपने पास जो पुस्तक है उसे भेजकर ....
हमारे पास "घनान्द : काव्य और आलोचना" यह पुस्तक है...
इसे कैसे भेज सकते है..कृपया यह विधि बताएं...

Rajesh on 24/4/10 12:12 PM ने कहा…

main aapki website se bahut prabhavit hu..iske karan hi mujhe kai acchi pustake prapt hui hai..appke hindi ko badava dena ka prayas sarahniya hai

anand on 7/5/10 11:19 PM ने कहा…

mai bahut dino se aisi hi site search kar reha tha,maaine bahut si kitabein nahi padhi thi,jo yaha uplabdh hai,kripya maithli saran gupt ki kitabe prakashit kare

बेनामी ने कहा…

ye prayash bahut achha hai,

स्वाति on 17/5/10 10:56 AM ने कहा…

आपका ब्लॉग हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत ही सार्थक प्रयास है , बहुत बहुत शुभकामनाये.

patriot on 7/8/10 8:53 AM ने कहा…

Bahoot hi accha sangrah hai. isse bahoot sare hindi pustak premit labh utha rahe honge, ekdam sulabh suvidha hai.

par lajja ko download kiya to padhne ke liye password ki mang aii isliye enka password kaise prapt kare kripya yah batane ka kast kare

Akshay kumar ojha on 30/8/10 8:03 PM ने कहा…

Very good sir ! Keep it up :)

ashutosh on 11/9/10 9:35 AM ने कहा…

Dear Editor,
First of all very thanks for your dedication to our native language.i am shame on myself, i cant write these words in Hindi(actually i dont know how to write these using keyboard).my hats off for your kind selfishness dedication...

Ashutosh.misranuc@gmail.com

Sandeep ने कहा…

Hi,

I was searching such site since long time. I would like to thank those who initiated this.

Sandeep

pankaj giri on 12/11/10 1:34 AM ने कहा…

main website developer hu... aur is site ko dekh kar kafi khushi mili..

प्रेम नारायण अहिरवाल on 16/11/10 11:47 AM ने कहा…

हमे हिंदी के ‍सतत विकास के लि‍ए पूरे मन से लगे रहना होगा सफलता इसी में हासिल होगी जय हिंदीं

Dinesh Jain on 14/12/10 9:21 PM ने कहा…

मुझे आपकी साईट देखकर बहुत ही अच्छा लगा. मैं यहाँ शिकागो के जैन मंदिर में हिंदी पढाता हूँ और हिंदी के विकास के लिए प्रयत्नशील हूँ. इसीलिए आपकी 'अपनी हिंदी' वेबसाइट देखकर अत्यधिक ख़ुशी हुई. आपके प्रयास सराहनीय हैं, और मैं इसमें योगदान करना चाहता हूँ. कृपया संपर्क करें. दिनेश@आगामी.नेट पर.

बेनामी ने कहा…

hallo good very good

वेद विभु on 26/6/11 3:49 AM ने कहा…

श्रीमान्
"यह ब्लॉग समर्पित है हमारे देश की राष्ट्र भाषा हिन्दी को।"
अरे वाह तो हिंदी राष्ट्रभाषा बन गई और हमें पता तक नहीं चला। हिंदी के नाम पर हिंगलिश के किसी चैनल पर भी न देखा न किसी रेडियो या एफ एम पर सुनी यह ख़बर, आपको कहां से मिली जरूर बताएं
बंधु अभी तो राजभाषा बनने के लिए सभी राज्यों की विधानसभाओं से राजभाषा "हिंदी" को बनाने का प्रस्ताव मिला ही नहीं है संसद को, फिर संसद फैसला लेगी, न 9 मन तेल होगा न राधा नाचेगी, तमिलनाडू, मेघालय, केरल व कश्मीर की तो छोड़ो राजस्थान दिल्ली पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र ने भी अभी तक समर्थन में प्रस्ताव नहीं दिए हैं राष्ट्रभाषा नहीं राजभाषा के लिए सोचो यह दिल्ली दूर है बहुत बहुत बहुत
पर अच्छा लगा कि सरल लोग इसे यानि हिंदी को राष्ट्रभाषा कह तो रहे हैं चाहे हो या नहीं 22 भाषाएं संविधान की 8 वीं अनुसूची में हैं जिनमें एक हिंदी है 8-10 भाषा वाले और जोर मार रहे हैं इस सूची में आने के लिए यानि 1/30 राष्ट्रभाषा का हक तो हिंदी को है ही। यह बात जरूर है कि हमारे प्रधानमंत्री कह रहे हैं हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा हम बनवा देंगे यानि अंतर्राष्ट्रीय भाषा, हिंदी जो देश में नहीं लागू कर सके हम 60 साल बाद भी, उसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व हिंदी दिवस मनाने हम विदेश जाएंगे अपने हिंदी सेवियों के साथ इसे क्या कहेंगे पाठकगण बेहतर जानते हैं

شمس शम्स Shams on 11/8/11 5:55 PM ने कहा…

वेद विभु जी यदि उक्त भाषा के चाहने वाले अपनी खुशी के लिये अपनी भाषा को राष्ट्रभाषा ही नहीं ब्रह्माण्डभाषा कहें तो खुश रहने दीजिये ये दिल्ली की ओर बढ़ तो चले हैं आप टाँग मत खींचिये।

KUNDAN JHA on 17/9/11 5:29 AM ने कहा…

HINDI ME PURAN KA PDF NAHI HO RAHA HE...........AAP SABI KO THANKU

बेनामी ने कहा…

bahut acha hai

बेनामी ने कहा…

usha priamvada hindi lekhika(upanyash) ji ke bare me kisi bi saksh ko pata ho to kiripya jankari de...........damini nirmalkar

pradhuman singh on 13/11/11 1:53 PM ने कहा…

बहुत अच्छा लगता मुझे आपकी पुस्तकें पढ़कर l
इसी तरह से आप पूरे देश को ज्ञान देते रहें l
धन्यवाद् l

rocky on 16/12/11 9:12 PM ने कहा…

muze chandrakant author books saransh chahiya

बेनामी ने कहा…

निःसंदेह एक सराहनीय प्रयास.....

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