वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक, किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं। - आचार्य श्रीराम शर्मा
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सोमवार, 26 दिसम्बर 2011

कृपया ध्यान दें:

कृपया ध्यान दें:

रिलायंस और एयरटेल कंपनी ने अपने इन्टरनेट नेटवर्क पर कुछ वेबसाइट को ब्लाक कर दिया है जैसे की - Megaupload.com, Filesonic.com आदि.
इसलिए हो सकता है की 'अपनी हिंदी' पर कुछ पुस्तकों को डाउनलोड करने में आपको दिक्कत हो.

इसके लिए हम आपको २ उपाय बता रहे है:
पहला उपाय:

हमारे अधिकतर लिंक Megauplad.com पर है. और ये साईट अगर आपके नेटवर्क पर खुल नहीं रही है तो निम्न कार्य करें:
(अ) सबसे पहले तो Megaupload के डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें.
(ब) ५ सेकंड के बाद ऊपर दायें कोने में Skip Ad लिखा आएगा. इस पर क्लिक करें.
(स) अब वो पेज आएगा जिस पर रिलायंस का सन्देश लिखा होगा की ये साईट ब्लाक है.
अब इसी पन्ने पर ऊपर अपने Web Browser का वो हिस्सा देखें जहाँ आप वेबसाइट का पता भरते है. वहां कुछ इस तरह दिया हुआ होगा:
http://www.megaupload.com/?d=ZGXPHTYV

(समझने के लिए नीचे दी गयी तस्वीर पर क्लिक करें)

इसमें से आपको www. हटाना है. यानी की सिर्फ megaupload.com/?d=ZGXPHTYV रखना है, इससे पहले जो भी है, हटा देना है. इसके बाद की-बोर्ड से  Enter button दबा देना है.
अब ये साईट खुल जाएगी.

दूसरा उपाय: 
अगर आप चाहें तो दुसरे लिंक से भी फाइल डाउनलोड कर सकते है. इसके लिए निम्न कार्य करें:
(अ) सबसे पहले तो Multiupload के डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें.
(ब) ५ सेकंड के बाद ऊपर दायें कोने में Skip Ad लिखा आएगा. इस पर क्लिक करें.
(स) अब वो पेज आएगा जिसपर कई डाउनलोड लिंक दिए होंगे. इनमे से megaupload को छोड़कर बाकि किसी पर क्लिक करें और डाउनलोड कर लें.

(अगर आपको डाउनलोड करना नहीं आता है तो कृपया यहाँ क्लिक करें)


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ओशो ध्यान योग



'ओशो ध्यान योग' ओशो की एक चर्चित पुस्तक है

रजनीश चन्द्र मोहन (११ दिसम्बर १९३१ - १९ जनवरी १९९०) ओशो के नाम से प्रख्यात हैं जो अपने विवादास्पद नये धार्मिक (आध्यात्मिक) आन्दोलन के लिये मशहूर हुए और भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे। रजनीश ने प्रचलित धर्मों की व्याख्या की तथा प्यार, ध्यान और खुशी को जीवन के प्रमुख मूल्य माना।

ओशो ने सैकडों पुस्तकें लिखीं, हजारों प्रवचन दिये। उनके प्रवचन पुस्तकों, आडियो कैसेट तथा विडियो कैसेट के रूप में उपलब्ध हैं। अपने क्रान्तिकारी विचारों से उन्होने लाखों अनुयायी और शिष्य बनाये। अत्यधिक कुशल वक्ता होते हुए इनके प्रवचनों की करीब ६०० पुस्तकें हैंसंभोग से समाधि की ओर इनकी सबसे चर्चित और विवादास्पद पुस्तक है। इनके नाम से कई आश्रम चल रहे है।



यह पुस्तक हमें श्री मोहन प्रकाश ने पुणे से
भेजी है जिसके लिए हम उनके आभारी है

फाइल का आकार:३०० Kb

डाउनलोड लिंक(Megaupload) :
कृपया यहाँ क्लिक करें




डाउनलोड लिंक :(Multi Mirror)
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(डाउनलोड करने में कोई परेशानी हो तो कृपया यहाँ क्लिक करें)
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बृहस्पतिवार, 15 दिसम्बर 2011

जुलूस




'जुलूस' प्रेमचंद जी की एक प्रसिद्ध कहानी है.


प्रेमचंद (३१ जुलाई, १८८० - ८ अक्तूबर १९३६) के उपनाम से लिखने वाले धनपत राय श्रीवास्तव हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं। उन्हें मुंशी प्रेमचंद व नवाब राय नाम से भी जाना जाता है और उपन्यास सम्राट के नाम से सम्मानित किया जाता है। इस नाम से उन्हें सर्वप्रथम बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने संबोधित किया था।

प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिस पर पूरी शती का साहित्य आगे चल सका। इसने आने वाली एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित किया और साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नीव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी का विकास संभव ही नहीं था।

वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, ज़िम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ।

प्रेमचंद के बाद जिन लोगों ने साहित्‍य को सामाजिक सरोकारों और प्रगतिशील मूल्‍यों के साथ आगे बढ़ाने का काम किया, उनके साथ प्रेमचंद की दी हुई विरासत और परंपरा ही काम कर रही थी। बाद की तमाम पीढ़ियों, जिसमें यशपाल से लेकर मुक्तिबोध तक शामिल हैं, को प्रेमचंद के रचना-कर्म ने दिशा प्रदान की। 

ये पुस्तक हमें श्री अनुराग व्यास ने भेजी है .


अवश्य पढ़ें।

फाइल का आकर: 30 Kb 





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‘समय कैसा भी हो’ का लोकार्पण


(हरीश करमचंदानी)
 
सहज और ईमानदार अभिव्‍यक्ति ही बड़ी कविता है : विष्‍णु नागर 
हरीश करमचंदाणी के काव्‍य संग्रह समय कैसा भी हो का लोकार्पण
जयपुर 11 दिसंबर। वरिष्‍ठ कवि एवं पत्रकार विष्‍णु नागर का कहना है कि आज के समय के सच को सहज रूप से और बेहद ईमानदारी के साथ व्‍यक्‍त करने वाली कविता ही बड़ी कविता है। वे आज जवाहर कला केंद्र और हिंदी प्रचार प्रसार संस्‍थान द्वारा सुपरिचित कवि हरीश करमचंदाणी के काव्‍य संग्रह समय कैसा भी हो पर आयोजित  लोकार्पण समारोह में मुख्‍य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्‍होंने कहा कि जैसी वैश्विक परिस्थितियां बन रही हैं, उनमें साहित्‍य ही मनुष्‍य को बचाने का काम कर सकता है। इस अवसर पर अध्‍यक्षता करते हुए वरिष्‍ठ कवि विजेंद्र ने कहा कि मानवीय श्रम और जिजीविषा को व्‍यक्‍त करने वाले कवि ही काल का अतिक्रमण करते हैं। कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो. मोहन श्रोत्रिय, कवि नंद भारद्वाज और समालोचक राजाराम भादू ने काव्‍य संग्रह के विविध आयामों पर चर्चा की। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने आरंभ में काव्‍य संग्रह का लोकार्पण किया और हरीश करमाचंदाणी ने कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन प्रेमचंद गांधी ने किया।
रपट-प्रेमचंद गांधी
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पर्वत राग का लीलाधर जगूड़ी विशेषांक

     
पर्वत राग का लीलाधर जगूड़ी विशेषांककला, संस्कृति व साहित्य को समर्पित पत्रिका पर्वत राग का बहुप्रतीक्षित लीलाधर जगूड़ी विशेषांक प्रकाशित हो गया है। इस अंक में लीलाधर जगूड़ी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर उनके समकालीन लेखकों व अन्य शब्द- शिल्पियों ने बहुमूल्य सामग्री दी है। साथ ही लीलाधर जगूड़ी से विभिन्न लेखकों द्वारा लिए गए बेबाक साक्षात्कार भी हैं । इस अंक में लीलाधर जगूड़ी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर जिन प्रमुख लेखकों की रचनाएं पर्वत राग में शामिल हैं, उनमें कुंवर नारायण, मुद्रा राक्षस, गिरधर राठी, मंगलेश डबराल,राजेश जोशी,  अरुण कमल, विजय कुमार, विष्णु नागर, नरेन्द्र मोहन सत्यपाल सहगल, मदन कश्यप, ओम निश्चल, अनूप सेठी, रेवती रमण ,अग्निशेखर,  अवधेश प्रीत, शिरीष कुमार मौर्य, मधुकर भारती, महेश चंद्र पुनेठा, नवनीत शर्मा, प्रेम साहिल, अमित तरव, सुरेश उनियाल, नवीन चंद्र लोहनी, सुधीर महाजन, ओम नागर, शशिभूषण बडोनी, विपिन कुमार शर्मा ,मोनू सिंह व नीलम प्रभा वर्मा शामिल हैं।
    इसके अलावा इस अंक में गीताश्री, भरत प्रसाद, लाल्टू, कुलदीप शर्मा, के.आर.भारती, प्रतिभा कटियार, लीना मल्होत्रा, भूपिन्द्र कौर प्रीत, शरवाणी बैनर्जी व गुरमीत बेदी की कविताएं, संतोष शैलजा की लघु उपन्यासिका, डा. तारिक कमर, गौतम राजरिशी व अखिलेश तिवारी की गजलें हैं। पर्वत राग के इस विशेषांक का मूल्य नब्बे रूपए है। पंजीकृत डाक से मंगवाने के लिए 36 रूपए अलग से जोड़ने होंगे। 
          रचनाकारों के अलावा पर्वत राग के आजीवन व वार्षिक सदस्यों को अंक की मुद्रित प्रति डाक से भेजी जा रही है। आपकी बहुमूल्य राय का इंतजार रहेगा।
इंटरनेट पर पर्वत राग का लीलाधर जगूड़ी विशेषांक पढ़ने के लिए  www.parvatraag.com पर क्लिक करें- 
संपादक, पर्वत राग,सैट नंबर- 8, टाईप- 4,
डीसी कालोनी, ऊना- 174303
हिमाचल प्रदेश  
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